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45 दिन पोस्टमार्टम रिपोर्ट दबाने में इंस्पेक्टर बरखेड़ा से जवाब तलब
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पीलीभीत। किसान जानकी प्रसाद की मौत पोस्टमार्टम रिपोर्ट में चोटों से होने की पुष्टि हो गई। फिर भी इंस्पेक्टर बरखेड़ा कोतवाली उमेश सिंह सोलंकी 45 दिन तक उसे दबाए रहे। लापरवाही उजागर होने पर एएसपी रोहित मिश्र ने मामले का संज्ञान लेकर इंस्पेक्टर से जवाब तलब किया है। साथ ही उन्हें इस मामले में पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए हैं।
बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गंगापुरी गांव के निवासी 56 वर्षीय जानकी प्रसाद का शव चार दिन लापता रहने के बाद 21 अप्रैल को माला नदी किनारे खेत पर बरामद हुआ था। वह दवा लेने के लिए शहर जाने की बात कहकर निकले थे और फिर रास्ते से लापता हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर आई चोटों से मौत होने की पुष्टि हुई तो मामला हत्या का निकला था। परिवार वाले उनकी हत्या की आशंका शुरुआत से जता रहे थे। मगर पुलिस ने इस मामले को एक्सपर्ट की राय लेने के नाम पर टाल दिया था। 45 दिन तक गुमशुदगी पहले से दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। अमर उजाला के सात जून के अंक में समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। एएसपी रोहित मिश्र ने इंस्पेक्टर बरखेड़ा से पूरे मामले में जवाब तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्हें तुरंत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं। उधर, अधिकारियों से कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद कई दिनों से मामले को दबाए बैठी पुलिस अभी भी असमंजस में है कि इस मामले में एफआईआर गैर इरादतन हत्या की धारा में की जाए या फिर हत्या की। इंस्पेक्टर बरखेड़ा उमेश सिंह सोलंकी का कहना है कि एफआईआर दर्ज की जाएगी। हालांकि उसे किस धारा में तरमीम किया जाएगा, यह अभी तय नहीं है।
इस मामले में इंस्पेक्टर बरखेड़ा से जवाब तलब किया गया है। उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। - रोहित मिश्र, एएसपी
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बरखेड़ा थाना क्षेत्र के गंगापुरी गांव के निवासी 56 वर्षीय जानकी प्रसाद का शव चार दिन लापता रहने के बाद 21 अप्रैल को माला नदी किनारे खेत पर बरामद हुआ था। वह दवा लेने के लिए शहर जाने की बात कहकर निकले थे और फिर रास्ते से लापता हो गए। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में शरीर पर आई चोटों से मौत होने की पुष्टि हुई तो मामला हत्या का निकला था। परिवार वाले उनकी हत्या की आशंका शुरुआत से जता रहे थे। मगर पुलिस ने इस मामले को एक्सपर्ट की राय लेने के नाम पर टाल दिया था। 45 दिन तक गुमशुदगी पहले से दर्ज होने के बावजूद कार्रवाई नहीं की गई। अमर उजाला के सात जून के अंक में समाचार प्रकाशित होने के बाद अधिकारियों ने मामले का संज्ञान लिया। एएसपी रोहित मिश्र ने इंस्पेक्टर बरखेड़ा से पूरे मामले में जवाब तलब किया है। उनसे पूछा गया है कि अब तक पोस्टमार्टम रिपोर्ट पर कार्रवाई क्यों नहीं की। उन्हें तुरंत पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई आगे बढ़ाने के भी निर्देश दिए हैं। उधर, अधिकारियों से कार्रवाई के निर्देश मिलने के बाद कई दिनों से मामले को दबाए बैठी पुलिस अभी भी असमंजस में है कि इस मामले में एफआईआर गैर इरादतन हत्या की धारा में की जाए या फिर हत्या की। इंस्पेक्टर बरखेड़ा उमेश सिंह सोलंकी का कहना है कि एफआईआर दर्ज की जाएगी। हालांकि उसे किस धारा में तरमीम किया जाएगा, यह अभी तय नहीं है।
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इस मामले में इंस्पेक्टर बरखेड़ा से जवाब तलब किया गया है। उन्हें पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर कार्रवाई करने के निर्देश दिए गए हैं। संतोषजनक जवाब न मिलने पर जांच कर विभागीय कार्रवाई की जाएगी। - रोहित मिश्र, एएसपी
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