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Pilibhit News: अमृतपाल ने अमरिया क्षेत्र के ग्रंथी की स्कॉर्पियो का किया इस्तेमाल

Thu, 30 Mar 2023 01:13 AM IST
Bareily Bureau बरेली ब्यूरो
Updated Thu, 30 Mar 2023 01:13 AM IST
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Amritpal used Scorpio of Granthi of Amaria region
पंजाब के फगवाड़ा क्षेत्र से बरामद हुई कार, छानबीन में जुटी पुलिस
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संवाद न्यूज एजेंसी

पीलीभीत। पंजाब से फरार खालिस्तानी समर्थक अमृतपाल जिस स्कॉर्पियो कार से फरार हुआ, वह अमरिया क्षेत्र के बड़ेपुरा स्थित गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी की निकली। बुधवार को कार बरामद होने के बाद इसका खुलासा हुआ। बताया जा रहा है फगवाड़ा से अमृतपाल स्कॉर्पियो को छोड़कर इनोवा कार से फरार हो गया। स्कॉर्पियो उस तक कैसे पहुंची, अभी यह स्पष्ट नहीं है।

अमृतपाल के उत्तराखंड के रास्ते नेपाल भागने की खुफिया एजेंसियों ने आशंका जताई थी। इसके बाद से जनपद में भी सतर्कता बढ़ाई गई थी। तीन दिन से लगातार उत्तराखंड और नेपाल के बॉर्डर पर पुलिस सघन चेकिंग में भी जुटी थी, लेकिन पुलिस की सतर्कता को चुनौती देकर अमृतपाल स्कॉर्पियो कार से पंजाब के फगवाड़ा पहुंचा, जहां स्कॉर्पियो को छोड़कर इनोवा कार से फरार हो गया। बरामद स्कॉर्पियो की जांच पड़ताल में वह अमरिया के बड़ेपुरा स्थित गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी बाबा मोहन सिंह की निकली। कार का नंबर उत्तराखंड का है।
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बताया जा रहा है कार को चिह्नित करने के बाद पंजाब पुलिस बुधवार सुबह जनपद के अमरिया स्थित बड़ेपुरा पहुंची। चर्चा है कि मुख्य ग्रंथी को हिरासत में लेकर चली गई। हालांकि स्थानीय पुलिस इस बात को स्वीकार नहीं कर रही है। मामला सुर्खियों में आने के बाद देर शाम क्षेत्रीय पुलिस ने बड़ेपुरा स्थित गुरुद्वारे में पहुंचकर छानबीन शुरू की है। मुख्य ग्रंथी की तलाश की जा रही, लेकिन उनका कोई सुराग नहीं मिल सका है।
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पूरनपुर के गुरुद्वारे के ग्रंथी से बदली गई थी कार...

पीलीभीत। बड़ेपुरा गुरुद्वारे के मुख्य ग्रंथी मोहन सिंह पिछले छह साल से यहां रह रहे थे। सेवादार गुरुप्रीत सिंह ने बताया कि सुबह ग्रंथी गुरुद्वारे में थे। इसके बाद से उनका पता नहीं चल सका। अक्सर वह आसपास के गुरुद्वारों में बगैर बताए चले जाते हैं।


आशंका व्यक्त की जा रही है कि पंजाब पुलिस सुबह मोहन सिंह को पकड़ कर ले गई। इस संबंध में देर रात अमरिया पुलिस भी गुरुद्वारे गई, लेकिन बाबा मोहन सिंह नहीं मिले। सेवादार ने यह भी बताया कि जिस गाड़ी की बात की जा रही है उसे पूरनपुर के एक गुरुद्वारे के ग्रंथी को दिया गया था। इसके बदले में दूसरी गाड़ी बाबा मोहन सिंह ने ले ली थी। गाड़ी अमृतपाल तक कैसे पहुंची, इसका जवाब किसी के पास नहीं है। संवाद
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