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शहरियों में दिखा महादानी बनने का उत्साह
पीलीभीत।
Updated Fri, 12 Jun 2015 11:14 PM IST
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विश्व रक्तदाता दिवस पर ’अमर उजाला फाउंडेशन ‘की ओर से 14 जून को लगने वाले
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रक्तदान शिविर में रजिस्ट्रेशन कराने वाले महादानियों का हुजूम उमड़ने लगा
है। शहर के छात्र, व्यापारी समेत अन्य तबके से जुड़े लोग सामने आने लगे
हैं। सभी का मकसद खून देकर जरुरतमंद की जान बचाना है।
रोटरी क्लब के तत्वावधान में जिला अस्पताल के राजकीय रक्तकोष (ब्लड बैंक) में रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दूसरी बार आयोजित होने वाले शिविर में शहर के हर कोने से रक्तदाता जुड़ने लगे हैं। शुक्रवार को तमाम स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने पंजीकरण कराया, वहीं कई लोगों ने कार्यालय में दूरभाष पर संपर्क कर शिविर में शामिल होने की बात कही और पंजीकरण कराया। अमर उजाला परिवार सभी लोगों से अपील करता है कि वह इस खास मौके को अपनी जिदंगी का यादगार लम्हा बनाएं और रक्तदान कर चार जिदंगियां बचाने का संकल्प लें।
यहां कराएं पंजीकरण
- अमर उजाला कार्यालय- 9675201362
- ब्यूरो इंचार्ज - 9415168135
स्वास्थ्य महकमे में भी हैं कई महादानी
पीलीभीत। जिले के स्वास्थ्य महकमे में भी कई ऐसे महादानी हैं जिन्होंने एक बार नहीं बल्कि दर्जनों बार खून देकर जरुरतमंद मरीजों की जानें बचाई। उनके मुताबिक रक्तदान करने से नई ऊर्जा प्राप्त और स्फूर्ति तो प्राप्त होती ही है, साथ ही परोपकार की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।
खुद 20 जिदंगियां बचा चुके हैं सीनियर एलटी
राजकीय रक्तकोष में कार्यरत वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन 40 वर्षीय नायाब रसूल सिर्फ मरीजों के रक्त को ट्रांसफर नहीं करते बल्कि खुद अब तक करीब 20 बार रक्तदान कर जरुरतमंदों की जान बना चुके हैं। अब उनका बेटा नावेद रसूल भी पापा के नक्शे कदम पर चलने को आतुर है।
रक्तदान सबसे बड़ी जनसेवा
महिला अस्पताल में लिपिक के पद पर तैनात सुशील कुमार अब तक करीब सात बार रक्तदान कर चुके हैं। मोहल्ला थान सिंह निवासी 43 वर्षीय सुशील ने वर्ष 2000 में जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे एक अपरिचित व्यक्ति को खून देकर जान बचाई थी। वह रकतदान को ही सबसे बड़ी जनसेवा मानते हैं।
रक्तदान से मिलती है आत्मशांति
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नीरज श्रीवास्तव भी अब तक 12 बार रक्तदान कर लोगों को जिदंगी दे चुके हैं। सिविल लाइंस निवासी नीरज कहते हैं कि रक्तदान से उन्हें आत्मशांति तो मिलती है, साथ ही दूसरों की सेवा करने का मौका भी। सामान्य व्यक्तियों को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
तीन बार रक्तदान कर चुके हैं युवा दिग्विजय
ब्लड बैंक में कार्यरत लैब टैक्नीशियन 29 वर्षीय दिग्विजय आर्य भी प्रेरणा लेकर अब तक तीन बार रक्तदान कर चुके हैं। अपने दादा व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. स्वामी इंद्रदेव यति को आर्दश मानने वाले दिग्विजय कहते हैं कि रक्तदान करने से ब्लडप्रेशर, हार्ट, किडनी से संबंधित बीमारियों से बचाव की संभावना भी रहती है।
रोटरी क्लब के तत्वावधान में जिला अस्पताल के राजकीय रक्तकोष (ब्लड बैंक) में रक्तदान शिविर लगाया जाएगा। अमर उजाला फाउंडेशन की ओर से दूसरी बार आयोजित होने वाले शिविर में शहर के हर कोने से रक्तदाता जुड़ने लगे हैं। शुक्रवार को तमाम स्वैच्छिक रक्तदाताओं ने पंजीकरण कराया, वहीं कई लोगों ने कार्यालय में दूरभाष पर संपर्क कर शिविर में शामिल होने की बात कही और पंजीकरण कराया। अमर उजाला परिवार सभी लोगों से अपील करता है कि वह इस खास मौके को अपनी जिदंगी का यादगार लम्हा बनाएं और रक्तदान कर चार जिदंगियां बचाने का संकल्प लें।
यहां कराएं पंजीकरण
- अमर उजाला कार्यालय- 9675201362
- ब्यूरो इंचार्ज - 9415168135
स्वास्थ्य महकमे में भी हैं कई महादानी
पीलीभीत। जिले के स्वास्थ्य महकमे में भी कई ऐसे महादानी हैं जिन्होंने एक बार नहीं बल्कि दर्जनों बार खून देकर जरुरतमंद मरीजों की जानें बचाई। उनके मुताबिक रक्तदान करने से नई ऊर्जा प्राप्त और स्फूर्ति तो प्राप्त होती ही है, साथ ही परोपकार की भावना को भी बढ़ावा मिलता है।
खुद 20 जिदंगियां बचा चुके हैं सीनियर एलटी
राजकीय रक्तकोष में कार्यरत वरिष्ठ लैब टेक्नीशियन 40 वर्षीय नायाब रसूल सिर्फ मरीजों के रक्त को ट्रांसफर नहीं करते बल्कि खुद अब तक करीब 20 बार रक्तदान कर जरुरतमंदों की जान बना चुके हैं। अब उनका बेटा नावेद रसूल भी पापा के नक्शे कदम पर चलने को आतुर है।
रक्तदान सबसे बड़ी जनसेवा
महिला अस्पताल में लिपिक के पद पर तैनात सुशील कुमार अब तक करीब सात बार रक्तदान कर चुके हैं। मोहल्ला थान सिंह निवासी 43 वर्षीय सुशील ने वर्ष 2000 में जिला अस्पताल में जिंदगी और मौत से जूझ रहे एक अपरिचित व्यक्ति को खून देकर जान बचाई थी। वह रकतदान को ही सबसे बड़ी जनसेवा मानते हैं।
रक्तदान से मिलती है आत्मशांति
स्वास्थ्य विभाग में कार्यरत नीरज श्रीवास्तव भी अब तक 12 बार रक्तदान कर लोगों को जिदंगी दे चुके हैं। सिविल लाइंस निवासी नीरज कहते हैं कि रक्तदान से उन्हें आत्मशांति तो मिलती है, साथ ही दूसरों की सेवा करने का मौका भी। सामान्य व्यक्तियों को रक्तदान अवश्य करना चाहिए।
तीन बार रक्तदान कर चुके हैं युवा दिग्विजय
ब्लड बैंक में कार्यरत लैब टैक्नीशियन 29 वर्षीय दिग्विजय आर्य भी प्रेरणा लेकर अब तक तीन बार रक्तदान कर चुके हैं। अपने दादा व स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. स्वामी इंद्रदेव यति को आर्दश मानने वाले दिग्विजय कहते हैं कि रक्तदान करने से ब्लडप्रेशर, हार्ट, किडनी से संबंधित बीमारियों से बचाव की संभावना भी रहती है।