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57 दिन फैलाई दहशत, 14 मिनट में हुआ कैद
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पीलीभीत/ माधोटांडा। पीलीभीत टाइगर रिजर्व के जंगल से बाहर निकला बाघ 57 दिनों तक रिहायशी इलाकोंमें दहशत फैलाए रहा। शासन से अनुमति मिलने के बाद शनिवार को वन विभाग की टीम ने 14 मिनट में बेहोश करने के बाद बाघ को पकड़ लिया। बाघ पकड़े जाने की भनक लगते मौके पर लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई।सुरक्षा के मद्देनजर पुलिस और पीएसी भी मौजूद रही। आबादी क्षेत्र में घूम रहे बाघ को लेकर कई बार वन अफसरों और निगरानी टीम को ग्रामीणों के आक्रोश का शिकार होना पड़ा।
बराही रेंज से भटका एक बाघ पिछले साल नवंबर के अंतिम सप्ताह में माधोटांडा क्षेत्र में पहुंच गया था। 29 नवंबर को दो छुट्टा मवेशियों को निवाला बनाने के बाद बाघ हरदोई ब्रांच नहर के चित्तरपुर पुल, गजरौला के सिसैया, पुरनपुर के मनहरिया खुर्द आदि में होते हुए करीब 150 किमी दूरी तय करने के बाद दो दिन पहले बाघ हरदोई ब्रांच नहर के समीप पहुंच गया। इस बीच बाघ को पकड़ने के लिए चार अलग-अलग स्थानों पर पिंजड़े भी लगाए गए थे, लेकिन बाघ हत्थे नहीं चढ़ सका। इसी बीच वन अफसरों को कई बार ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ा। दो दिन पूर्व शासन ने बाघ को बेहोश करने की अनुमति दी थी। इसके बाद बाघ को बेहोश करने ने वाले चिकित्सकों की टीम का गठन किया गया। शनिवार को अभियान चलाकर बाघ को पकड़ लिया गया।
सुबह से वनकर्मियों ने शुरू कर दी थी बाघ की घेराबंदी
शनिवार को बाघ पकड़ने के लिए अभियान चलाने को लेकर वन अफसरों ने निगरानी टीम को शुक्रवार को ही बाघ की लोकेशन पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। शनिवार सुबह कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव ककरौआ से करीब 200 मीटर दूरी पर गन्ने के खेत में बाघ की लोकेशन पाई गई। अफसरों के निर्देश पर वनकर्मियों ने गन्ने के खेत की जाल से घेराबंदी की। अपराह्न लखनऊ से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर (एपीसीसीएफ) कमलेश कुमार पहुंच गए। उन्होंने खेत का जायजा लेने के साथ अफसरों से पूरी जानकारी की।
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चार बजे शुरू हुआ अभियान
बाघ को पकड़ने को लेकर सुबह से पूरी तैयारी कर ली गई थी। चार ट्रैक्टर, एक जेसीबी, पिंजड़ा और स्ट्रेचर आदि की व्यवस्था कर ली गई। बेहोश करने वाली टीम के आने पर बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर की देखरेख में शाम चार बजे अभियान शुरू किया गया। जिम कार्बेट पार्क के ट्रेंक्युलाइज एक्सपर्ट डॉ. दुष्यंत शर्मा और पीटीआर के डॉ. दक्ष गंगवार ट्रैक्टर पर सवार होकर खेत पर पहुंचे और बाघ की लोकेशन देखी। बाघ पर नजर पड़ने के बाद डॉ. दुष्यंत शर्मा ने ट्रेंक्युलाइज गन से निशाना साधा और एक डार्ट में ही बाघ को बेहोश कर दिया। करीब 15 मिनट बाद बेहोश बाघ को स्ट्रेचर पर लादकर वाहन तक ले जाया गया। जहां चिकित्सक डॉ. दुष्यंत, डॉ. दक्ष, डॉ. राजुल और डॉ. एसके राठौर ने बाघ का परीक्षण किया। परीक्षण के बाद सुरक्षा के बीच बाघ को पिजड़े में बंद करके माला रेंज की गढ़ा बीट ले जाया गया।
कोविड प्रोटोकाल का रखा गया ध्यान
बाघ को बेहोश करने के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखा गया। अभियान में जुटी टीम के अलावा पिंजड़े और स्ट्रेचर को भी सैनिटाइज किया गया।
अभियान से पूर्व हुआ रिर्हसल
बाघ को बेहोश करने के बाद कहीं कोई चूक न हो जाए, इसलिए अभियान से पहले एसडीओ हेमंत सेठ और उमेश राय के नेतृत्व में वनकर्मियों ने बाकायदा बाघ को पकड़कर वाहन तक ले जाने का रिहर्सल किया।
अभियान में यह रहे शामिल
मुख्य वन संरक्षक बरेली वृत ललित वर्मा, फील्ड डायरेक्टर पीटीआर जावेद अख्तर, डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल, डीएफओ सामाजिक वानिकी संजीव कुमार, रेंजर डीके गोयल, सत्येंद्र चौधरी समेत पीटीआर के भी रेंजों के वनकर्मी, डब्ल्यूटीआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सदस्य मौजूद रहे। अभियान की समाप्ति पर अफसरों ने वनकर्मियों को शाबासी दी।
जंगल से निकलकर एक बाघ कई दिनों से आबादी क्षेत्र में घूम रहा था, जिसे शनिवार को बेहोश करने के बाद पकड़ लिया गया है। बाघ को पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा किसी अन्य जंगल में छोड़ा जाएगा। - कमलेश कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रोजेक्ट टाइगर
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बराही रेंज से भटका एक बाघ पिछले साल नवंबर के अंतिम सप्ताह में माधोटांडा क्षेत्र में पहुंच गया था। 29 नवंबर को दो छुट्टा मवेशियों को निवाला बनाने के बाद बाघ हरदोई ब्रांच नहर के चित्तरपुर पुल, गजरौला के सिसैया, पुरनपुर के मनहरिया खुर्द आदि में होते हुए करीब 150 किमी दूरी तय करने के बाद दो दिन पहले बाघ हरदोई ब्रांच नहर के समीप पहुंच गया। इस बीच बाघ को पकड़ने के लिए चार अलग-अलग स्थानों पर पिंजड़े भी लगाए गए थे, लेकिन बाघ हत्थे नहीं चढ़ सका। इसी बीच वन अफसरों को कई बार ग्रामीणों का आक्रोश झेलना पड़ा। दो दिन पूर्व शासन ने बाघ को बेहोश करने की अनुमति दी थी। इसके बाद बाघ को बेहोश करने ने वाले चिकित्सकों की टीम का गठन किया गया। शनिवार को अभियान चलाकर बाघ को पकड़ लिया गया।
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सुबह से वनकर्मियों ने शुरू कर दी थी बाघ की घेराबंदी
शनिवार को बाघ पकड़ने के लिए अभियान चलाने को लेकर वन अफसरों ने निगरानी टीम को शुक्रवार को ही बाघ की लोकेशन पर नजर रखने के निर्देश दिए थे। शनिवार सुबह कलीनगर तहसील क्षेत्र के गांव ककरौआ से करीब 200 मीटर दूरी पर गन्ने के खेत में बाघ की लोकेशन पाई गई। अफसरों के निर्देश पर वनकर्मियों ने गन्ने के खेत की जाल से घेराबंदी की। अपराह्न लखनऊ से अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर (एपीसीसीएफ) कमलेश कुमार पहुंच गए। उन्होंने खेत का जायजा लेने के साथ अफसरों से पूरी जानकारी की।
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चार बजे शुरू हुआ अभियान
बाघ को पकड़ने को लेकर सुबह से पूरी तैयारी कर ली गई थी। चार ट्रैक्टर, एक जेसीबी, पिंजड़ा और स्ट्रेचर आदि की व्यवस्था कर ली गई। बेहोश करने वाली टीम के आने पर बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रोजेक्ट टाइगर की देखरेख में शाम चार बजे अभियान शुरू किया गया। जिम कार्बेट पार्क के ट्रेंक्युलाइज एक्सपर्ट डॉ. दुष्यंत शर्मा और पीटीआर के डॉ. दक्ष गंगवार ट्रैक्टर पर सवार होकर खेत पर पहुंचे और बाघ की लोकेशन देखी। बाघ पर नजर पड़ने के बाद डॉ. दुष्यंत शर्मा ने ट्रेंक्युलाइज गन से निशाना साधा और एक डार्ट में ही बाघ को बेहोश कर दिया। करीब 15 मिनट बाद बेहोश बाघ को स्ट्रेचर पर लादकर वाहन तक ले जाया गया। जहां चिकित्सक डॉ. दुष्यंत, डॉ. दक्ष, डॉ. राजुल और डॉ. एसके राठौर ने बाघ का परीक्षण किया। परीक्षण के बाद सुरक्षा के बीच बाघ को पिजड़े में बंद करके माला रेंज की गढ़ा बीट ले जाया गया।
कोविड प्रोटोकाल का रखा गया ध्यान
बाघ को बेहोश करने के दौरान कोविड प्रोटोकाल का पूरा ध्यान रखा गया। अभियान में जुटी टीम के अलावा पिंजड़े और स्ट्रेचर को भी सैनिटाइज किया गया।
अभियान से पूर्व हुआ रिर्हसल
बाघ को बेहोश करने के बाद कहीं कोई चूक न हो जाए, इसलिए अभियान से पहले एसडीओ हेमंत सेठ और उमेश राय के नेतृत्व में वनकर्मियों ने बाकायदा बाघ को पकड़कर वाहन तक ले जाने का रिहर्सल किया।
अभियान में यह रहे शामिल
मुख्य वन संरक्षक बरेली वृत ललित वर्मा, फील्ड डायरेक्टर पीटीआर जावेद अख्तर, डिप्टी डायरेक्टर नवीन खंडेलवाल, डीएफओ सामाजिक वानिकी संजीव कुमार, रेंजर डीके गोयल, सत्येंद्र चौधरी समेत पीटीआर के भी रेंजों के वनकर्मी, डब्ल्यूटीआई, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के सदस्य मौजूद रहे। अभियान की समाप्ति पर अफसरों ने वनकर्मियों को शाबासी दी।
जंगल से निकलकर एक बाघ कई दिनों से आबादी क्षेत्र में घूम रहा था, जिसे शनिवार को बेहोश करने के बाद पकड़ लिया गया है। बाघ को पीलीभीत टाइगर रिजर्व के अलावा किसी अन्य जंगल में छोड़ा जाएगा। - कमलेश कुमार, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक, प्रोजेक्ट टाइगर