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स्फूर्ति से मिलेगा बांसुरी उद्योग स्वरों को नया आयाम
पीलीभ्ाीत ब्यूराो
Updated Wed, 12 Apr 2017 09:19 PM IST
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बांसुरी बनाने वाले कारीगरों को सामाजिक एवं आर्थिक रूप से मजबूत बनाने के लिए विनोवा सेवा आश्रम खादी ग्रामोद्योग से मिलकर जिले में स्फूर्ति योजना संचालित करेगी। इसके लिए आश्रम के माध्यम से पूरी कार्य योजना तैयार कर ली गई है।
जिले के बांसुरी उद्योग की वर्तमान स्थिति पर विनोबा सेवा आश्रम ने पिछले दिनों शोध किया था जिसे आश्रम के परियोजना निदेशक मोहित कुमार ने पिछले माह लखनऊ में खादी ग्रामोद्योग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रखा था। कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने बांसुरी क्लस्टर स्थापित कर इससे जुड़े कारीगरों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने पर जोर दिया था। इसके बाद विनोबा सेवा आश्रम ने पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना स्फूर्ति (स्कीम ऑफ फंड फार रीजनेरेशन ऑफ ट्रेडिसनल इंस्डट्रीज) के माध्यम से जिले के योजना तैयार की है जिसे स्वीकृति भी मिल गई है। 20 मार्च को इसे मुम्बई में आयोजित कार्यक्रम में अनुमोदित भी किया जाएगा। आश्रम के परियोजना निदेशक मोहित कुमार ने बताया कि कारीगरों की सुविधा के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए रॉ मैटेरियल बैंक स्थापित किया जाएगा। साथ ही कारीगरों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के लिए आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस उद्योग में लगभग 140 परिवारों के 525 लोग लगे हैं जिसमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। इन कारीगरों को दिन रात भी कड़ी मेहनत के बाद मात्र 65 से 125 रुपये तक दिहाड़ी पड़ती है। इसे बढ़ाकर 300 रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इसमें इंटरनेट डिजिटल मार्केटिंग का भी सहारा लिया जाएगा।
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बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति
दरअसल बांसुरी बनाने वाले कारीगरों का बड़े शहरों में बिक्री करने वाले से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। ऐसे में बिचौलिए औसत चार रुपये में खरीदी गई बांसुरी थोक में सात से आठ रुपये में सप्लाई करते हैं और यहीं बांसुरी बाद में दुकानों पर 10-12 रुपये में बिकती है। स्फूर्ति के चलने वाले कार्यक्रम में कारीगरों को सीधे विक्रेताओं से जोड़ा जाएगा जिससे बिचौलियों से मुक्ति मिल सकेगी।
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जिले के बांसुरी उद्योग की वर्तमान स्थिति पर विनोबा सेवा आश्रम ने पिछले दिनों शोध किया था जिसे आश्रम के परियोजना निदेशक मोहित कुमार ने पिछले माह लखनऊ में खादी ग्रामोद्योग द्वारा आयोजित कार्यक्रम में रखा था। कार्यक्रम में मौजूद केंद्रीय लघु एवं मध्यम उद्यम मंत्री कलराज मिश्र ने बांसुरी क्लस्टर स्थापित कर इससे जुड़े कारीगरों को आर्थिक रूप से सुदृढ़ करने पर जोर दिया था। इसके बाद विनोबा सेवा आश्रम ने पारंपरिक उद्योगों को बढ़ावा देने की योजना स्फूर्ति (स्कीम ऑफ फंड फार रीजनेरेशन ऑफ ट्रेडिसनल इंस्डट्रीज) के माध्यम से जिले के योजना तैयार की है जिसे स्वीकृति भी मिल गई है। 20 मार्च को इसे मुम्बई में आयोजित कार्यक्रम में अनुमोदित भी किया जाएगा। आश्रम के परियोजना निदेशक मोहित कुमार ने बताया कि कारीगरों की सुविधा के लिए कॉमन फैसिलिटी सेंटर और कच्चा माल उपलब्ध कराने के लिए रॉ मैटेरियल बैंक स्थापित किया जाएगा। साथ ही कारीगरों को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के लिए आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध कराई जाएंगी। उन्होंने बताया कि वर्तमान में इस उद्योग में लगभग 140 परिवारों के 525 लोग लगे हैं जिसमें बच्चे व महिलाएं भी शामिल हैं। इन कारीगरों को दिन रात भी कड़ी मेहनत के बाद मात्र 65 से 125 रुपये तक दिहाड़ी पड़ती है। इसे बढ़ाकर 300 रुपये करने का लक्ष्य रखा गया है। उन्होंने बताया कि इसमें इंटरनेट डिजिटल मार्केटिंग का भी सहारा लिया जाएगा।
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बिचौलियों से मिलेगी मुक्ति
दरअसल बांसुरी बनाने वाले कारीगरों का बड़े शहरों में बिक्री करने वाले से कोई सीधा जुड़ाव नहीं है। ऐसे में बिचौलिए औसत चार रुपये में खरीदी गई बांसुरी थोक में सात से आठ रुपये में सप्लाई करते हैं और यहीं बांसुरी बाद में दुकानों पर 10-12 रुपये में बिकती है। स्फूर्ति के चलने वाले कार्यक्रम में कारीगरों को सीधे विक्रेताओं से जोड़ा जाएगा जिससे बिचौलियों से मुक्ति मिल सकेगी।
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