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जंग ए आजादी के योद्धा उत्तम सिंह नहीं रहे
पूरनपुर/पीलीभीत।
Updated Wed, 03 Jun 2015 12:03 AM IST
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जंग ए आजादी के योद्धा गांव खैरपुर निवासी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी
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उत्तम सिंह का सोमवार रात निधन हो गया। सूचना पर सीओ, तहसीलदार सहित कई
अधिकारी व गणमान्य लोगों ने उनके घर पहुंचकर शोक जताया। श्मशान स्थल पर
गारद ने उन्हें सलामी दी। इसके बाद उनके पुत्र मुखत्यार सिंह ने मुखाग्नि
दी।
मूलरूप से पंजाब के जिला अमृतसर की तहसील तरनतारन के गांव रूड़िया निवासी 97 वर्षीय उत्तम सिंह करीब पचास साल पहले क्षेत्र के गांव खैरपुर में आकर बस गए थे। उनके छोटे पुत्र मंजीत सिंह ने बताया कि सोमवार की शाम को खाना खाने के बाद अचानक उनकी हालत खराब हो गई।
इलाज के उन्हें पहले शेरपुर पीएचसी और बाद में पूरनपुर सीएचसी ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घर वाले प्रशासन को सूचना देकर शव को घर ले आए। मंगलवार को सुबह तहसीलदार दिग्विजय सिंह राजस्व निरीक्षक और हल्का लेखपाल के साथ घर पहुंचे और शोकसंवदेना व्यक्त की साथ ही अंतिम संस्कार को प्रशासन की ओर से धनराशि सौंपी। मंजीत सिंह ने बताया कि उसके पिता ने जंग ए आजादी के लिए लड़ाई लड़ी।
सुभाषचंद्र बोस के साथ भी कुछ दिन रहे। आजादी की लड़ाई पर उनको चार साल जेल में भी रहना पड़ा। मंगलवार को दोपहर गमगीन माहौल में जंग-ए-आजादी के योद्धा को सलामी देने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम यात्रा में सीओ राजेश्वर सिंह, इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह, व्यापारी नेता विजयपाल विक्की, दरबारा सिंह, जसपाल सिंह, हरभजन सिंह, सुवेंद्र सिंह, बाबा जस्सा सिंह, गुरनाम सिंह, निंदर सिंह, बलवीर सिंह, परमजीत सिंह, दलजीत सिंह, सरदारा सिंह, चन्ना सिंह आदि थे।
भरा-पूरा परिवार है उत्तम सिंह का
उत्तम सिंह के तीनों पुत्रों में सबसे बड़े मुखत्यार सिंह, उससे छोटे सुखदेव सिंह और सबसे छोटे मंजीत सिंह के अलावा भरा पूरा परिवार है। मंजीत सिंह ने बताया कि उनकी मां का करीब डेढ़ दशक पहले निधन हो गया था।
मूलरूप से पंजाब के जिला अमृतसर की तहसील तरनतारन के गांव रूड़िया निवासी 97 वर्षीय उत्तम सिंह करीब पचास साल पहले क्षेत्र के गांव खैरपुर में आकर बस गए थे। उनके छोटे पुत्र मंजीत सिंह ने बताया कि सोमवार की शाम को खाना खाने के बाद अचानक उनकी हालत खराब हो गई।
इलाज के उन्हें पहले शेरपुर पीएचसी और बाद में पूरनपुर सीएचसी ले जाया गया। जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। घर वाले प्रशासन को सूचना देकर शव को घर ले आए। मंगलवार को सुबह तहसीलदार दिग्विजय सिंह राजस्व निरीक्षक और हल्का लेखपाल के साथ घर पहुंचे और शोकसंवदेना व्यक्त की साथ ही अंतिम संस्कार को प्रशासन की ओर से धनराशि सौंपी। मंजीत सिंह ने बताया कि उसके पिता ने जंग ए आजादी के लिए लड़ाई लड़ी।
सुभाषचंद्र बोस के साथ भी कुछ दिन रहे। आजादी की लड़ाई पर उनको चार साल जेल में भी रहना पड़ा। मंगलवार को दोपहर गमगीन माहौल में जंग-ए-आजादी के योद्धा को सलामी देने के बाद अंतिम संस्कार कर दिया गया। अंतिम यात्रा में सीओ राजेश्वर सिंह, इंस्पेक्टर धर्मपाल सिंह, व्यापारी नेता विजयपाल विक्की, दरबारा सिंह, जसपाल सिंह, हरभजन सिंह, सुवेंद्र सिंह, बाबा जस्सा सिंह, गुरनाम सिंह, निंदर सिंह, बलवीर सिंह, परमजीत सिंह, दलजीत सिंह, सरदारा सिंह, चन्ना सिंह आदि थे।
भरा-पूरा परिवार है उत्तम सिंह का
उत्तम सिंह के तीनों पुत्रों में सबसे बड़े मुखत्यार सिंह, उससे छोटे सुखदेव सिंह और सबसे छोटे मंजीत सिंह के अलावा भरा पूरा परिवार है। मंजीत सिंह ने बताया कि उनकी मां का करीब डेढ़ दशक पहले निधन हो गया था।