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कुपोषण दूर करने के लिए समन्वय जरूरी: रमेश
Pilibhit
Updated Wed, 22 May 2013 05:30 AM IST
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पीलीभीत। विनोबा सेवा आश्रम की ओर से आयोजित कार्यशाला में कुपोषित बच्चों के समक्ष आ रही समस्याओं पर विचार मंथन किया गया। वक्ताओं ने कहा कि कुपोषण सिर्फ पोषाहार से नहीं जागरूकता से दूर किया जा सकता है। इसके लिये जन जागरण अभियान चलाने का लोगों ने संकल्प लिया।
नकटादाना स्थित सेवाधाम में मंगलवार को उत्तर प्रदेश फोर्सेज नेटवर्क के सहयोग से विनोबा सेवा आश्रम और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ कार्यशाला की। बाल विकास एवं देखरेख की चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर विचार मंथन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कुपोषण दूर करने की दिशा में आ रही दिक्कतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनका कहना था कि चिन्ह्ति कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए हायर सेंटर भेजा जाना नितांत आवश्यक है। इसमें दो तरह की दिक्कतें आती हैं। पहली यह कि ऐसे बच्चों के संरक्षक जागरूक नहीं हैं। दूसरी यह कि जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर पहुंचने वाले बच्चों को सीएचसी से रेफर कराने की शर्त लगाकर वापस भेज दिया जाता है। फोर्सेज नेटवर्क के अध्यक्ष रमेश भैय्या ने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए सेवा दाताओं का ग्रामीणों के साथ समन्वय बेहद जरूरी है। बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक कंचन गंगवार ने कहा कि कुपोषित बच्चों का चिन्हीकरण हो चुका है। उन्हें रेफर करने के बाद भी बच्चों के संरक्षक उन्हें उपचार के लिए ले जाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। समन्वयक रंजना ने कहा कि विकासखंड मरौरी क्षेत्र के बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने में प्राथमिकता दी जाएगी।
कार्यशाला में संयोजक दिनेश बाथम, निर्मला मिश्रा, कमलेश कुमारी, पूनम कुशवाहा, हीराकली, अनीता देवी, विजय लक्ष्मी, शकुंतला ने विचार व्यक्त किया। कार्यशाला का संचालन बिशन कुमार ने किया।
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नकटादाना स्थित सेवाधाम में मंगलवार को उत्तर प्रदेश फोर्सेज नेटवर्क के सहयोग से विनोबा सेवा आश्रम और आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों के साथ कार्यशाला की। बाल विकास एवं देखरेख की चुनौतियां और संभावनाएं विषय पर विचार मंथन के दौरान आंगनबाड़ी कार्यकत्रियों ने कुपोषण दूर करने की दिशा में आ रही दिक्कतों पर विस्तार से प्रकाश डाला। उनका कहना था कि चिन्ह्ति कुपोषित बच्चों को स्वास्थ्य सेवाएं प्रदान करने के लिए हायर सेंटर भेजा जाना नितांत आवश्यक है। इसमें दो तरह की दिक्कतें आती हैं। पहली यह कि ऐसे बच्चों के संरक्षक जागरूक नहीं हैं। दूसरी यह कि जिला अस्पताल में स्थापित पोषण पुनर्वास केंद्र पर पहुंचने वाले बच्चों को सीएचसी से रेफर कराने की शर्त लगाकर वापस भेज दिया जाता है। फोर्सेज नेटवर्क के अध्यक्ष रमेश भैय्या ने कहा कि कुपोषण दूर करने के लिए सेवा दाताओं का ग्रामीणों के साथ समन्वय बेहद जरूरी है। बाल विकास विभाग की पर्यवेक्षक कंचन गंगवार ने कहा कि कुपोषित बच्चों का चिन्हीकरण हो चुका है। उन्हें रेफर करने के बाद भी बच्चों के संरक्षक उन्हें उपचार के लिए ले जाने में रुचि नहीं ले रहे हैं। समन्वयक रंजना ने कहा कि विकासखंड मरौरी क्षेत्र के बच्चों को कुपोषण से मुक्त कराने में प्राथमिकता दी जाएगी।
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कार्यशाला में संयोजक दिनेश बाथम, निर्मला मिश्रा, कमलेश कुमारी, पूनम कुशवाहा, हीराकली, अनीता देवी, विजय लक्ष्मी, शकुंतला ने विचार व्यक्त किया। कार्यशाला का संचालन बिशन कुमार ने किया।
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