{"_id":"122-57701","slug":"Pilibhit-57701-122","type":"story","status":"publish","title_hn":"सश्रम सजा काटने वालों कैदियों को मिली पगार","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सश्रम सजा काटने वालों कैदियों को मिली पगार
Pilibhit
Updated Sat, 29 Dec 2012 05:30 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
पीलीभीत। सश्रम कठोर कारावास की सजा काट रहे कैदियों को नए साल से पहले दोगुनी खुशी मिल गई है। नववर्ष के आगमन से चार रोज पहले उनकी दो माह की बकाया पगार मिल जाने से उनके नए साल की शुरूआत खुशियों से भरी रहेगी। जिला कारागार प्रशासन ने उनकी बकाया मजदूरी का 51,820 रुपये का भुगतान कर दिया है। अधिकांश कैदियों ने मेहनत कर कमाई गई गाढ़ी कमाई को अपने परिजनों को भेज दिया।
जेल मैनुअल के तहत सश्रम कठोर कारावास की सजा पाने वाले कैदियों को मजदूरी देने का प्रावधान है। इस मजदूरी को साधारण, अर्द्धकुशल और कुशल तीन श्रेणियों में बांटा गया है। साधारण काम के बदले 25, अर्द्धकुशल को 30 और कुशल को 40 रुपये मजदूरी देने का प्रावधान है। जिला कारागार में माह मई में 77 और माह जून में 76 कैदियों ने काम किया था। जेल प्रशासन इन बंदियों को किए गए उनके कार्यों का भुगतान नहीं कर सकी थी। जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि माह मई में पाकशाला के 38 कैदियों को 12,210, सर्किल बाहर काम करने वाले 16 कैदियों को 5,150, 10 नंबरदारों को 3525, गोदाम कमान के पांच कैदियों को 1575, कार्यालय कमान में चार को 1550 और महिला बैरक की साफ-सफाई करने वाली चार कैदी महिलाओं को 1250 रुपये की मजदूरी दी गई है। इसी प्रकार जून में काम करने वाले पाकशाला के 40 कैदियों को 13235, सर्किल बाहर काम करने वाले 13 को 4250, 10 नंबरदारों को 3550, गोदाम पर लगे छह कैदियों को 1900, कार्यालय के तीन कैदियों को 1275 और महिला बैरक की चार महिला कैदियों को 1350 रुपये की मजदूरी का भुगतान का कुल 51,820 रुपये का भुगतान किया गया है। जेल अधीक्षक ने बताया कि कई कैदियों ने मजदूरी की प्राप्त धनराशि में से अधिकांश रुपये अपने बीवी और बच्चों को भेज दिए हैं।
विज्ञापन
जेल मैनुअल के तहत सश्रम कठोर कारावास की सजा पाने वाले कैदियों को मजदूरी देने का प्रावधान है। इस मजदूरी को साधारण, अर्द्धकुशल और कुशल तीन श्रेणियों में बांटा गया है। साधारण काम के बदले 25, अर्द्धकुशल को 30 और कुशल को 40 रुपये मजदूरी देने का प्रावधान है। जिला कारागार में माह मई में 77 और माह जून में 76 कैदियों ने काम किया था। जेल प्रशासन इन बंदियों को किए गए उनके कार्यों का भुगतान नहीं कर सकी थी। जेल अधीक्षक विनोद कुमार ने बताया कि माह मई में पाकशाला के 38 कैदियों को 12,210, सर्किल बाहर काम करने वाले 16 कैदियों को 5,150, 10 नंबरदारों को 3525, गोदाम कमान के पांच कैदियों को 1575, कार्यालय कमान में चार को 1550 और महिला बैरक की साफ-सफाई करने वाली चार कैदी महिलाओं को 1250 रुपये की मजदूरी दी गई है। इसी प्रकार जून में काम करने वाले पाकशाला के 40 कैदियों को 13235, सर्किल बाहर काम करने वाले 13 को 4250, 10 नंबरदारों को 3550, गोदाम पर लगे छह कैदियों को 1900, कार्यालय के तीन कैदियों को 1275 और महिला बैरक की चार महिला कैदियों को 1350 रुपये की मजदूरी का भुगतान का कुल 51,820 रुपये का भुगतान किया गया है। जेल अधीक्षक ने बताया कि कई कैदियों ने मजदूरी की प्राप्त धनराशि में से अधिकांश रुपये अपने बीवी और बच्चों को भेज दिए हैं।
विज्ञापन