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उपकरण कमरे में, भटक रहे विकलांग

Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
Pilibhit
Pilibhit Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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पीलीभीत। पुराने जिला अस्पताल के कक्ष में विकलांगाें को वितरित किए जाने वाले विभिन्न प्रकार के उपकरण एक कमरे में बंद हैं। इनका वितरण विकलांग कल्याण विभाग को करना है, जबकि विकलांग पुनर्वास केंद्र पर पंजीकृत सैंकड़ों विकलांग उपकरण पाने की आस में प्रति - दिन जिला विकलांग कल्याण दफ्तर का चक्कर लगा रहे हैं।
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विकलांग कल्याण के नाम पर विकलांगों के साथ उच्च स्तर पर खासा अच्छा मजाक होता है। अप्रैल 2011 में जिला विकलांग पुर्नवास केन्द्र के माध्यम से सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्रालय को 66.99 लाख रुपये के उपकरण खरीदने का प्रस्ताव भेजा गया था। इस धनराशि से बैसाखियां, व्हील चेयर, ट्राई साइकिल, ब्लाइंड स्टिक, कैलिपर्स और हेयरिंग एंड की खरीद की जानी थी। प्रस्तावित बजट से कुल मिलाकर 1555 उपकरण खरीदे जाने का प्रस्ताव था। पूरा एक वर्ष बीतने के बाद मार्च 2012 में मंत्रालय से मात्र नौ लाख रुपये का बजट रिलीज किया गया। इस धनराशि से 100 हेयरिंग एंड, 130 जोड़ी बैसाखी, 10 व्हील चेयर, 107 ट्राई साइकिल, 30 ब्लाइंड स्टिक, 33 कैलिपर्स और 33 कृत्रिम पैर की व्यवस्था की जा रही है। जिले के करीब 400 विकलांगों में वितरित किया जाएगा। यानी बाकी पंजीकृत विकलांगों को फिर विकलांग पुर्नवास के चक्कर काटने होंगे। बात यही खत्म नहीं होती। विकलांग पुर्नवास केंद्र ने एलिम्को कानपुर के सहयोग से सितंबर 2011 के अंत में तीन शिविर लगाकर विकलांगाें का पंजीकरण किया था। इनमें विकलांग पुर्नवास केंद्र पर 339, पूरनपुर में 217 और बीसलपुर में 470 विकलांगों के पंजीकरण किए गए। इन विकलांगों को उपकरण कब मिलेंगे, यह अभी तय नहीं है। इधर पुराने जिला अस्पताल के एक कक्ष में विकलांगों को वितरित किए जाने वाले उपकरण बंद हैं। यह उपकरण जिला विकलांग कल्याण विभाग के हैं। इन उपकरणों का वितरण विकलांग पुर्नवास केंद्र पर पंजीकृत विकलांगों को नहीं कराया जा रहा है। दरअसल यह उपकरण सिफारिश वाले विकलांगों के लिए रखे गए हैं।
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इंसेट
जल्द आएंगे और उपकरण
विकलांगों को वितरित करने के लिए दो चार दिन में उपकरण की खेप आने वाली है। उपकरण आने पर पंजीकृत विकलांगों को उनका वितरण कराया जाएगा। जिला अस्पताल में कुछ ट्राई साइकिलें रखी हैं। कई बार इमर्जेंसी में किसी विकलांग को उपकरण देने की जरूरत पड़ती है। यह उनके लिए रोकी गई हैं।
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हरीश कुमार
जिला विकलांग कल्याण अधिकारी
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