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31 के बाद नहीं चलेंगे बिना चिप वाले एटीएम कार्ड
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पीलीभीत। अगर आपके पास बिना चिप वाला एटीएम कार्ड है तो एक जनवरी को वो बेकार हो जाएगा। एक जनवरी से केवल चिप वाले एटीएम कार्ड ही चलेंगे। बिना चिप वाले एटीएम कार्ड स्वत: ब्लॉक हो जाऐंगे। बैंक उपभोक्ताओं को बिना आवेदन ही चिप वाले एटीएम कार्ड भेजे रहे हैं। एसएमएस के जरिये उपभोक्ताओं को इसके बारे में जागरूक किया जा रहा है।
अब उपभोक्ताओं के लिए एटीएम कार्ड पासबुक से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। कैशलेस लेनदेन में एटीएम कार्ड भी एक प्रमुख जरिया बनता जा रहा है, लेकिन एटीएम कार्ड को लेकर कई बार उपभोक्ता फ्राड का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अब उपभोक्ताओं की फायदे के लिए एटीएम कार्ड जारी किए जा रहे हैं। चिप वाले एटीएम कार्ड को सुरक्षित माना जाता है। जिले में दो लाख से अधिक उपभोक्ता हैं, इनमें 28 हजार उपभोक्ताओं को चिप वाले एटीएम बैंक द्वारा प्राप्त कराए जा चुके हैं। वहीं जिन उपभोक्ताओं ने एटीएम कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया उन्हें भी बैंक चिप वाले एटीएम कार्ड भेज रहा है। इसके साथ ही बैंक पुराने वाले एटीएम कार्ड को ब्लॉक कर रहा है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक नए कार्ड काफी सिक्योर हैं। उपभोक्ता एक जनवरी से अब केवल चिप वाले एटीएम कार्ड ही प्रयोग करेंगे।
बैंक नहीं मालूम करता खाते की डिटेल
एटीएम व क्रेडिट कार्ड के फ्राड को रोकना उपभोक्ताओं पर ही निर्भर है। बैंक कभी भी उपभोक्ताओं से खाते या एटीएम/डेबिट कार्ड की कोई भी जानकारी फोन पर नहीं मांगता। आधार नंबर भी नहीं मालूम करता। अगर कोई फोन पर खुद को बैंक कर्मचारी बताकर बैंक से जुड़ी कुछ भी जानकारी मांगता है तो इसका मतलब फ्राड है। समय-समय पर बैंक इसको लेकर लोगों को जागरूक भी करता है।
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ज्यादा सुरक्षित है इसलिए बैंक ने लिया फैसला
एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक समीर मेहरोत्रा ने बताया कि पुराने एटीएम और डेबिट कार्ड के पीछे की तरफ एक काली पट्टी नजर आती है। यही काली पट्टी मैग्नेटिक स्ट्रिप है। जिसमें आपके खाते की पूरी जानकारी दर्ज होती है। इसी स्ट्रिप की मदद से डुप्लीकेट कार्ड आसानी से बन जाता है। अब बैंक जो चिप वाले कार्ड जारी कर रही है, वह सिम कार्ड बेस्ड हैं। उपभोक्ता की सारी जानकारी चिप में मौजूद है। मशीन चिप में मौजूद डिटेल रीड नहीं करती। इसलिए यह चिप वाले कार्ड ज्यादा सिक्योर हैं। इसमें डाटा चोरी होने की आशंका नहीं है। चिप वाले कार्ड में हर ट्रांजेक्शन के लिए एक इनक्रिप्टेड कोड जारी होता है। इस कोड में सेंध लगाना बहुत ही मुश्किल है।
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अब उपभोक्ताओं के लिए एटीएम कार्ड पासबुक से भी ज्यादा महत्वपूर्ण हो गया है। कैशलेस लेनदेन में एटीएम कार्ड भी एक प्रमुख जरिया बनता जा रहा है, लेकिन एटीएम कार्ड को लेकर कई बार उपभोक्ता फ्राड का शिकार हो जाते हैं। ऐसे में अब उपभोक्ताओं की फायदे के लिए एटीएम कार्ड जारी किए जा रहे हैं। चिप वाले एटीएम कार्ड को सुरक्षित माना जाता है। जिले में दो लाख से अधिक उपभोक्ता हैं, इनमें 28 हजार उपभोक्ताओं को चिप वाले एटीएम बैंक द्वारा प्राप्त कराए जा चुके हैं। वहीं जिन उपभोक्ताओं ने एटीएम कार्ड के लिए आवेदन नहीं किया उन्हें भी बैंक चिप वाले एटीएम कार्ड भेज रहा है। इसके साथ ही बैंक पुराने वाले एटीएम कार्ड को ब्लॉक कर रहा है। बैंक अधिकारियों के मुताबिक नए कार्ड काफी सिक्योर हैं। उपभोक्ता एक जनवरी से अब केवल चिप वाले एटीएम कार्ड ही प्रयोग करेंगे।
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बैंक नहीं मालूम करता खाते की डिटेल
एटीएम व क्रेडिट कार्ड के फ्राड को रोकना उपभोक्ताओं पर ही निर्भर है। बैंक कभी भी उपभोक्ताओं से खाते या एटीएम/डेबिट कार्ड की कोई भी जानकारी फोन पर नहीं मांगता। आधार नंबर भी नहीं मालूम करता। अगर कोई फोन पर खुद को बैंक कर्मचारी बताकर बैंक से जुड़ी कुछ भी जानकारी मांगता है तो इसका मतलब फ्राड है। समय-समय पर बैंक इसको लेकर लोगों को जागरूक भी करता है।
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ज्यादा सुरक्षित है इसलिए बैंक ने लिया फैसला
एसबीआई के मुख्य शाखा प्रबंधक समीर मेहरोत्रा ने बताया कि पुराने एटीएम और डेबिट कार्ड के पीछे की तरफ एक काली पट्टी नजर आती है। यही काली पट्टी मैग्नेटिक स्ट्रिप है। जिसमें आपके खाते की पूरी जानकारी दर्ज होती है। इसी स्ट्रिप की मदद से डुप्लीकेट कार्ड आसानी से बन जाता है। अब बैंक जो चिप वाले कार्ड जारी कर रही है, वह सिम कार्ड बेस्ड हैं। उपभोक्ता की सारी जानकारी चिप में मौजूद है। मशीन चिप में मौजूद डिटेल रीड नहीं करती। इसलिए यह चिप वाले कार्ड ज्यादा सिक्योर हैं। इसमें डाटा चोरी होने की आशंका नहीं है। चिप वाले कार्ड में हर ट्रांजेक्शन के लिए एक इनक्रिप्टेड कोड जारी होता है। इस कोड में सेंध लगाना बहुत ही मुश्किल है।