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पर्याप्त बसों के संचालन के दावे से अलग है हकीकत
Updated Thu, 14 Jun 2018 12:28 AM IST
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टुल्ला- आखिर कैसे सुहाना हो सफर
सरकारी बसें गिनती की, ट्रेनें बंद, कैसे जाएं मुसाफिर
पर्याप्त सरकारी बसों के संचालन के दावे से अलग है हकीकत
धूप में घंटों खड़े होकर यात्री करते हैं बसों का इंतजार
डग्गामार वाहन भूसे की तरह भरते है सवारी
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद परिवहन निगम की अधूरी तैयारी लोगों के पसीने छुड़ा रही है। निगम के अफसर भले ही पर्याप्त बसों के संचालन का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत इससे इतर है। रोडवेज की कुछ बसों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन आवागमन करने वाले यात्रियों की भीड़ के मुकाबिल ये नाकाफी है। यात्रियों को बसों के लिए धूप में खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। बसों के आवागमन का समय और स्थान नियत न होने से भी यात्रियों को डग्गामार वाहन में यात्रा करनी पड़ती है। डग्गामार वाहन संचालक यात्रियों की भीड़ का फायदा उठाकर उन्हें भीषण गर्मी में भूसे की तरह वाहन में ठूंसते हैं। भारी असुविधा से यात्रियों में खासा रोष है।
पीलीभीत-मैलानी के बीच आमान परिवर्तन को लेकर 31 मई से बंद हुई ट्रेनों से जिला मुख्यालय तक का सफर कठिनाई भरा साबित हो रहा है। नगर में रोडवेज बस स्टैंड का निर्माण अंतिम चरण में है। पहले अधिकांश बसों का संचालन स्टेशन चौराहा से होता था। नगर को होकर अन्य स्थानों को जाने वाली बसें भी स्टेशन चौराहा होकर गुजरती थीं, अब अधिकांश बसें असम हाइवे से ही निकल जाने से इन बसों के संचालन का लाभ नगर के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। अमर उजाला टीम ने यात्रियों से उनकी दिक्कत पर बातचीत की और उनकी दिक्कतों को कैमरे में भी कैद किया। पेश है एक रिपोर्ट-
13 पीबीटीपी 23
महिलाओं को सर्वाधिक होती है असुविधा
ट्रेन बंद होने का सबसे ज्यादा खामियाजा नौकरीपेशा महिलाओं और डेली अपडाउन करने वाली छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। डग्गामार वाहनों पर यात्रा करना मजबूरी है ज्यादातर बसें असम रोड से ही गुजर जाती हैं। -अंजुम खान, रजागंज, पूरनपुर
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13 पीबीटीपी 22
किराये की तिगुनी झेलनी पड़ती है मार
रोडवेज की बस हो या प्राइवेट वाहन इनका किराया गरीब आदमी को भारी पड़ रहा है। ट्रेनों का संचालन होने से एक तिहाई किराए में ही सफर पूरा हो जाता था।- मेवाराम, लुकटिहाई
13 पीबीटीपी 21
पुलिस की उदासीनता का नतीजा है डग्गामार वाहन
पुलिस चौकी के सामने से ही डग्गामार वाहन, वैन आदि का संचालन गलत ढंग से हो रहा है। पुलिस फिर भी मूकदर्शक बनी रहती है। सवारियां भूसे की तरह न भरी जाएं। कम से कम इतनी तो सख्ती होनी चाहिए। - मुमताज खान, पूरनपुर
13 पीबीटीपी 20
बैठाने से मना करते हैं बस संचालक
पूरनपुर से दिल्ली, बरेली को कुछ बसों का संचालन होता है। शाम को दिल्ली जाने वाली रोडवेज में रास्ते की सवारियों को मनमानी के चलते बस में नहीं चढ़ने दिया जाता। लंबी दूरी की असम हाइवे से निकलने वाली बसें रुकती नहीं।- रवि कुमार, चौक, पूरनपुर
वाहन देखकर दौड़ पड़ती है भीड़
आवागमन को वाहनों की कम संख्या पर घंटों इंतजार करने वाले यात्रियों की भीड़ बस दिखाई देते ही बैठने को उसके पीछे भाग पड़ती है। कई यात्रियों को तो ट्रकों और टाटा मैजिकों पर लटक कर यात्रा करनी पड़ रही है।
स्टेशन चौराहा सहित छह स्थानों पर रहती है गहमागहमी
वाहन के इंतजार में स्टेशन चौराहा, असम रोड के खुटार, घुंघचाई चौरबाहा, माधोटांडा रेलवे क्रॉसिंग, एलआईसी कार्यालय के पास यात्रियों को वाहन का अक्सर इंतजार करते देखा जा सकता है।
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नगर से लखीमपुर, गोला, लखनऊ सहित कई प्रमुख शहरों के लिए बस सेवा नहीं है। बसें बाईपास होकर निकल रही हैं। परिवहन विभाग के अफसर दिन में नो एंट्री का बहाना बना रहे हैं, जबकि उनको बसों के आवागमन को प्रशासन से बात करने को भी आश्वासन दिया गया। विधायक को भी समस्या की जानकारी दी गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। पर्याप्त बसों का संचालन न होने से नगर का व्यापार 70 प्रतिशत तक घट गया है। शीघ्र ही स्टेशन चौराहे से बसों का संचालन न होने पर बसों का घेराव किया जाएगा। - हंसराज गुलाटी, प्रांतीय उपाध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल।
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टुल्ला- आखिर कैसे सुहाना हो सफर
सरकारी बसें गिनती की, ट्रेनें बंद, कैसे जाएं मुसाफिर
पर्याप्त सरकारी बसों के संचालन के दावे से अलग है हकीकत
धूप में घंटों खड़े होकर यात्री करते हैं बसों का इंतजार
डग्गामार वाहन भूसे की तरह भरते है सवारी
अमर उजाला ब्यूरो
पूरनपुर। ट्रेनों का संचालन बंद होने के बाद परिवहन निगम की अधूरी तैयारी लोगों के पसीने छुड़ा रही है। निगम के अफसर भले ही पर्याप्त बसों के संचालन का दावा कर रहे हों, लेकिन हकीकत इससे इतर है। रोडवेज की कुछ बसों की संख्या तो बढ़ी है, लेकिन आवागमन करने वाले यात्रियों की भीड़ के मुकाबिल ये नाकाफी है। यात्रियों को बसों के लिए धूप में खड़े होकर घंटों इंतजार करना पड़ता है। बसों के आवागमन का समय और स्थान नियत न होने से भी यात्रियों को डग्गामार वाहन में यात्रा करनी पड़ती है। डग्गामार वाहन संचालक यात्रियों की भीड़ का फायदा उठाकर उन्हें भीषण गर्मी में भूसे की तरह वाहन में ठूंसते हैं। भारी असुविधा से यात्रियों में खासा रोष है।
पीलीभीत-मैलानी के बीच आमान परिवर्तन को लेकर 31 मई से बंद हुई ट्रेनों से जिला मुख्यालय तक का सफर कठिनाई भरा साबित हो रहा है। नगर में रोडवेज बस स्टैंड का निर्माण अंतिम चरण में है। पहले अधिकांश बसों का संचालन स्टेशन चौराहा से होता था। नगर को होकर अन्य स्थानों को जाने वाली बसें भी स्टेशन चौराहा होकर गुजरती थीं, अब अधिकांश बसें असम हाइवे से ही निकल जाने से इन बसों के संचालन का लाभ नगर के लोगों को नहीं मिल पा रहा है। अमर उजाला टीम ने यात्रियों से उनकी दिक्कत पर बातचीत की और उनकी दिक्कतों को कैमरे में भी कैद किया। पेश है एक रिपोर्ट-
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महिलाओं को सर्वाधिक होती है असुविधा
ट्रेन बंद होने का सबसे ज्यादा खामियाजा नौकरीपेशा महिलाओं और डेली अपडाउन करने वाली छात्राओं को भुगतना पड़ रहा है। डग्गामार वाहनों पर यात्रा करना मजबूरी है ज्यादातर बसें असम रोड से ही गुजर जाती हैं। -अंजुम खान, रजागंज, पूरनपुर
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किराये की तिगुनी झेलनी पड़ती है मार
रोडवेज की बस हो या प्राइवेट वाहन इनका किराया गरीब आदमी को भारी पड़ रहा है। ट्रेनों का संचालन होने से एक तिहाई किराए में ही सफर पूरा हो जाता था।- मेवाराम, लुकटिहाई
13 पीबीटीपी 21
पुलिस की उदासीनता का नतीजा है डग्गामार वाहन
पुलिस चौकी के सामने से ही डग्गामार वाहन, वैन आदि का संचालन गलत ढंग से हो रहा है। पुलिस फिर भी मूकदर्शक बनी रहती है। सवारियां भूसे की तरह न भरी जाएं। कम से कम इतनी तो सख्ती होनी चाहिए। - मुमताज खान, पूरनपुर
13 पीबीटीपी 20
बैठाने से मना करते हैं बस संचालक
पूरनपुर से दिल्ली, बरेली को कुछ बसों का संचालन होता है। शाम को दिल्ली जाने वाली रोडवेज में रास्ते की सवारियों को मनमानी के चलते बस में नहीं चढ़ने दिया जाता। लंबी दूरी की असम हाइवे से निकलने वाली बसें रुकती नहीं।- रवि कुमार, चौक, पूरनपुर
वाहन देखकर दौड़ पड़ती है भीड़
आवागमन को वाहनों की कम संख्या पर घंटों इंतजार करने वाले यात्रियों की भीड़ बस दिखाई देते ही बैठने को उसके पीछे भाग पड़ती है। कई यात्रियों को तो ट्रकों और टाटा मैजिकों पर लटक कर यात्रा करनी पड़ रही है।
स्टेशन चौराहा सहित छह स्थानों पर रहती है गहमागहमी
वाहन के इंतजार में स्टेशन चौराहा, असम रोड के खुटार, घुंघचाई चौरबाहा, माधोटांडा रेलवे क्रॉसिंग, एलआईसी कार्यालय के पास यात्रियों को वाहन का अक्सर इंतजार करते देखा जा सकता है।
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नगर से लखीमपुर, गोला, लखनऊ सहित कई प्रमुख शहरों के लिए बस सेवा नहीं है। बसें बाईपास होकर निकल रही हैं। परिवहन विभाग के अफसर दिन में नो एंट्री का बहाना बना रहे हैं, जबकि उनको बसों के आवागमन को प्रशासन से बात करने को भी आश्वासन दिया गया। विधायक को भी समस्या की जानकारी दी गई। लेकिन कुछ नहीं हुआ। पर्याप्त बसों का संचालन न होने से नगर का व्यापार 70 प्रतिशत तक घट गया है। शीघ्र ही स्टेशन चौराहे से बसों का संचालन न होने पर बसों का घेराव किया जाएगा। - हंसराज गुलाटी, प्रांतीय उपाध्यक्ष उद्योग व्यापार मंडल।