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मंगल कलश स्थापना समारोह उल्लास पूर्वक मनाया
Updated Mon, 06 Aug 2018 01:28 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में परम पूज्य आर्यिका रत्न गुरू मां एक सौ पांच दृष्टि भूषण माता जी का रजत वर्षा योग मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम श्रद्धा पूर्वक मना।
क्षेत्र के बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में रविवार को विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या परम पूज्य आर्यिका रत्न गुरू मां एक सौ पांच द्रष्टिभूषण माता जी का रजत वर्षा योग मंगल कलश स्थापना चतुर्मास कार्यक्रम श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। इसका शुभारंभ श्रद्धालुओं ने माता जी की विशेष पूजा अर्चना की। सुबह दस बजे मुख्य कलश की श्रद्धालुओं ने स्थापना की। संगीतकार रामकुमार एंड पार्टी भोपाल ने भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित भक्ति गीत प्रस्तुत किए।
इस मौके पर दृष्टि भूषण माता जी ने कहा कि मनुष्य को साधु संतों की संगति में रहना चाहिए। कभी भी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। दीन दुखी असहाय की सेवा से बढ़कर कोई परोपकार नहीं है। जीवन में दान अवश्य करना चाहिए और भगवान को सदैव याद रख सत्य अहिंसा के मार्ग पर चले तभी मानव कल्याण संभव है। इस दौरान पारस भैया, त्रिलोक तीर्थ धाम के अध्यक्ष त्रिलोक चंद जैन, पंडित धनराज जैन, दिनेश जैन, सुभाष जैन, विनोद जैन, मोहित जैन, संजय जैन, मनोज जैन, विपिन जैन, हरीश जैन आदि रहे।
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त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में परम पूज्य आर्यिका रत्न गुरू मां एक सौ पांच दृष्टि भूषण माता जी का रजत वर्षा योग मंगल कलश स्थापना कार्यक्रम श्रद्धा पूर्वक मना।
क्षेत्र के बड़ागांव स्थित त्रिलोक तीर्थ धाम जैन मंदिर में रविवार को विद्या भूषण सन्मति सागर जी महाराज की सुयोग्य शिष्या परम पूज्य आर्यिका रत्न गुरू मां एक सौ पांच द्रष्टिभूषण माता जी का रजत वर्षा योग मंगल कलश स्थापना चतुर्मास कार्यक्रम श्रद्धा पूर्वक मनाया गया। इसका शुभारंभ श्रद्धालुओं ने माता जी की विशेष पूजा अर्चना की। सुबह दस बजे मुख्य कलश की श्रद्धालुओं ने स्थापना की। संगीतकार रामकुमार एंड पार्टी भोपाल ने भगवान पार्श्वनाथ को समर्पित भक्ति गीत प्रस्तुत किए।
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इस मौके पर दृष्टि भूषण माता जी ने कहा कि मनुष्य को साधु संतों की संगति में रहना चाहिए। कभी भी किसी का बुरा नहीं करना चाहिए। दीन दुखी असहाय की सेवा से बढ़कर कोई परोपकार नहीं है। जीवन में दान अवश्य करना चाहिए और भगवान को सदैव याद रख सत्य अहिंसा के मार्ग पर चले तभी मानव कल्याण संभव है। इस दौरान पारस भैया, त्रिलोक तीर्थ धाम के अध्यक्ष त्रिलोक चंद जैन, पंडित धनराज जैन, दिनेश जैन, सुभाष जैन, विनोद जैन, मोहित जैन, संजय जैन, मनोज जैन, विपिन जैन, हरीश जैन आदि रहे।
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