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राम लक्ष्मण, सीता वनवास प्रसंग सुन श्रद्वालुजन भाव विभोर हो झूमे।

Thu, 06 Jul 2017 01:27 AM IST
Updated Thu, 06 Jul 2017 01:27 AM IST
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राम लक्ष्मण, सीता वनवास प्रसंग सुन श्रद्वालुजन भाव विभोर हो झूमे।
खेकड़ा (बागपत)। ग्राम डूंडाहेडा स्थित श्री बालाजी धाम आश्रम में महामंडलेश्वर भैया दास महाराज के सानिध्य में चल रही कथा में बाल साध्वी राधा देवी ने कहा राजा परीक्षित के पूछने पर सुखदेव मुनि ने महाराज दशरथ के पुत्र जो साक्षात्कार विष्णु भगवान के अवतार के रूप में अवतरित हुए हैं। उनके जीवन के बारे में पूछा तो महाराजा सुखदेव ने राजा परीक्षित को राम कथा बडे़ ही प्रेम के साथ सुनाई। इससे सुखदेव मुनि आनंद विभोर हो गए और मुनि ने राजा परीक्षित का बताया जो धर्म का अनुसरण करते हैं। धर्म सदैव उनकी रक्षा करता है। भगवान राम सौतेली मां कैकयी की इच्छा से अपने पिता राजा का वचन पूरा करने के लिए चौदह वर्ष के वनवास को चले गए। माता सीता भी अपने पति की सेवा करने के लिए राज सुख त्याग कर धर्म को निभाते हुए उनके साथ ही वनवास चली गई। जब लक्ष्मण को पता चला, राम वन जा रहे हैं। तो लक्ष्मण भी उनके साथ सभी कुछ त्याग कर चले जाते हैं। वहां वह साधु संतों की रक्षार्थ रावण का वध करते हैं। प्रसंग को सुन श्रद्धालु भाव विभोर हो झूमते रहे।
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