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जलस्तर कम होते ही धीमा हुआ बुझिया का कटान
Updated Mon, 16 Jul 2018 11:29 PM IST
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जलस्तर घटते ही धीमा हुआ बुझिया का कटान
पत्थर की ठोकरें क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों की बढ़ी चिंताएं
क्रासर
अधिशासी अभियंता को ठहराया जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट आने से रमनगरा बुझिया में सोमवार को कटान की गति धीमी रही। वहीं कटान को देखते हुए बाढ़ खंड द्वारा बचाव कार्य जारी रहा। इधर, ग्राम प्रधान समेत ग्रामीणों ने कटान का जिम्मेदार बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता को ठहराकर बरसात से पहले कार्य न कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि पिछली बरसात के बाद यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाते तो आज कटान की स्थिति पैदा न होती।
शारदा नदी पर रमनगरा बुझिया क्षेत्र के अपस्ट्रीम में बनी पत्थर की ठोकरों को नदी ने तीन दिन पूर्व ही अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। वजह यह रही कि इन ठोकरों के डाउन स्ट्रीम में जो बाढ़खंड को बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने थे, वह नहीं कराए जा सके। इसको लेकर क्षेत्रवासी भी आक्रोशित हो उठे। रमनगरा के ग्राम प्रधान प्रशांत साना सहित ग्रामीण ने इसके लिए बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शैलेश कुमार को ही दोषी मान रहे हैं। उनका कहना है कि अधिशासी अभियंता के निर्देश पर गत वर्ष बरसात के दौरान रमनगरा बुझिया में अस्थाई ठोकरें बनाई गई। यह ठोकरें भी मानक के अनुरूप नहीं बनाई गई, हालांकि नदी का वेग कम होने से ठोकरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।
इधर एक बार पुन: शारदा ने रमनगरा बुझिया में कटान शुरू किया है। हालांकि कटान की स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने आनन फानन में यहां बैंबो कटर में झाड़ झंकाड़ डलवाना शुरू कर दिया था, लेकिन कुल मिलाकर बाढ़ नियंत्रण कार्य समय से न होने के चलते रमनगरा बुझिया में बर्बादी शुरू हुई जो अभी भी जारी है। ऐसे में यदि नदी में बाढ़ आती है तो यहां और भी तबाही होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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वर्जन:
अफसरों ने समय से बाढ़ नियंत्रण योजनाएं बनाकर मंजूरी के लिए भेजी थी, लेकिन समय से बजट न मिलने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। फिलहाल यहां इमरजेंसी कार्य कराए जा रहे हैं।- ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता बाढ़ खंड
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जलस्तर घटते ही धीमा हुआ बुझिया का कटान
पत्थर की ठोकरें क्षतिग्रस्त होने से ग्रामीणों की बढ़ी चिंताएं
क्रासर
अधिशासी अभियंता को ठहराया जिम्मेदार
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)। शारदा नदी के जलस्तर में गिरावट आने से रमनगरा बुझिया में सोमवार को कटान की गति धीमी रही। वहीं कटान को देखते हुए बाढ़ खंड द्वारा बचाव कार्य जारी रहा। इधर, ग्राम प्रधान समेत ग्रामीणों ने कटान का जिम्मेदार बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता को ठहराकर बरसात से पहले कार्य न कराने का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि यदि पिछली बरसात के बाद यहां बाढ़ नियंत्रण कार्य कराए जाते तो आज कटान की स्थिति पैदा न होती।
शारदा नदी पर रमनगरा बुझिया क्षेत्र के अपस्ट्रीम में बनी पत्थर की ठोकरों को नदी ने तीन दिन पूर्व ही अपना निशाना बनाना शुरू कर दिया था। वजह यह रही कि इन ठोकरों के डाउन स्ट्रीम में जो बाढ़खंड को बाढ़ नियंत्रण कार्य कराने थे, वह नहीं कराए जा सके। इसको लेकर क्षेत्रवासी भी आक्रोशित हो उठे। रमनगरा के ग्राम प्रधान प्रशांत साना सहित ग्रामीण ने इसके लिए बाढ़ खंड के अधिशासी अभियंता शैलेश कुमार को ही दोषी मान रहे हैं। उनका कहना है कि अधिशासी अभियंता के निर्देश पर गत वर्ष बरसात के दौरान रमनगरा बुझिया में अस्थाई ठोकरें बनाई गई। यह ठोकरें भी मानक के अनुरूप नहीं बनाई गई, हालांकि नदी का वेग कम होने से ठोकरों को कोई नुकसान नहीं पहुंचा था।
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इधर एक बार पुन: शारदा ने रमनगरा बुझिया में कटान शुरू किया है। हालांकि कटान की स्थिति को देखते हुए बाढ़ खंड के अभियंताओं ने आनन फानन में यहां बैंबो कटर में झाड़ झंकाड़ डलवाना शुरू कर दिया था, लेकिन कुल मिलाकर बाढ़ नियंत्रण कार्य समय से न होने के चलते रमनगरा बुझिया में बर्बादी शुरू हुई जो अभी भी जारी है। ऐसे में यदि नदी में बाढ़ आती है तो यहां और भी तबाही होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।
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वर्जन:
अफसरों ने समय से बाढ़ नियंत्रण योजनाएं बनाकर मंजूरी के लिए भेजी थी, लेकिन समय से बजट न मिलने के कारण यह स्थिति पैदा हुई। फिलहाल यहां इमरजेंसी कार्य कराए जा रहे हैं।- ध्रुव नारायण शुक्ला, सहायक अभियंता बाढ़ खंड