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आज से बंद हो जाएंगे 599 लोक शिक्षा केंद्र
ब्यूरो /पीलीभीत
Updated Thu, 30 Mar 2017 11:59 PM IST
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भारत साक्षर मिशन के तहत जिले में संचालित किए जा रहे 599 लोक शिक्षा केंद्रों का कार्यकाल 31 मार्च को समाप्त हो जाएगा। वहीं इन केंद्रों में निरक्षरों को साक्षर बनाने में जुटे करीब 1100 से अधिक प्रेरकबेरोजगार हो जाएंगे। इसको लेकर प्रेरकों में मायूसी देखी गई। प्रदेश में 15 वर्ष से अधिक आयुवर्ग के निरक्षरों को साक्षर बनाने के लिए भारत साक्षर मिशन के तहत साक्षरता निदेशालय द्वारा लोक शिक्षा केंद्र खोले गए थे। जिले में अगस्त 2012 में साक्षरता कार्यक्रम की शुरूआत करते हुए 599 लोक शिक्षा केंद्र संचालित किए गए थे। प्रत्येक लोक शिक्षा केंद्र में एक पुरुष व एक महिला प्रेरक तैनात किए गए। प्रत्येक वर्ष इन शिक्षा केंद्रों में दो बार साक्षरता भी कराई गई। साक्षरता निदेशालय के मुताबिक जिले में वर्ष 2012 से शुरू किया गया साक्षरता कार्यक्रम 31 मार्च 2017 का चलाया जाना था। 31 मार्च के बाद इन लोक शिक्षा केंद्रों का संचालन बंद कर दिया जाएगा।
वर्तमान में तैनात हैं 1100 से अधिक प्रेरक
साक्षरता कार्यक्रम के तहत चार डिस्ट्रिक कोआर्डीनेटर, सात ब्लाक कोआर्डीनेटर व लोक शिक्षा केंद्रों पर 1198 प्रेरकों के पद सृजित है। वर्तमान में दो डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर, तीन ब्लाक कोआर्डिनेटर और करीब 1113 प्रेरक तैनात हैं। 31 मार्च को कार्यकाल पूरा होने के बाद ये सभी बेरोजगार हो जाएंगे।
बकाया मानदेय मिला नहीं, ऊपर से बेरोजगारी
जिले में साक्षरता कार्यक्रम बंद होने के बाद इससे जुड़े सभी कोआर्डिनेटर व प्रेरक पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। खास बात यह है कि साक्षरता कार्यक्रम का कार्यकाल खत्म होने के बाद इन्हें बेरोजगारी का दंश तो झेलना पड़ेगा। साथ ही दो साल के बकाया मानदेय भुगतान को अब ठोकरें खानी पड़ेगी। बताते हैं कि डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर को साल भर कर मानदेय नहीं मिल सका, जबकि ब्लाक कोआर्डिनेटर को दो साल से मानदेय ही नहीं मिला है। कमोवेश ऐसा ही कुछ हाल प्रेरकों का है। अधिकांश प्रेरकों को पांच से छह माह तक का मानदेय नहीं दिया गया है।
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साक्षरता निदेशालय से इस संबंध में कोई आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। निदेशालय के निर्देशानुसार की कार्रवाई की जाएगी। - मसऊद अख्तर अंसारी, बीएसए
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वर्तमान में तैनात हैं 1100 से अधिक प्रेरक
साक्षरता कार्यक्रम के तहत चार डिस्ट्रिक कोआर्डीनेटर, सात ब्लाक कोआर्डीनेटर व लोक शिक्षा केंद्रों पर 1198 प्रेरकों के पद सृजित है। वर्तमान में दो डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर, तीन ब्लाक कोआर्डिनेटर और करीब 1113 प्रेरक तैनात हैं। 31 मार्च को कार्यकाल पूरा होने के बाद ये सभी बेरोजगार हो जाएंगे।
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बकाया मानदेय मिला नहीं, ऊपर से बेरोजगारी
जिले में साक्षरता कार्यक्रम बंद होने के बाद इससे जुड़े सभी कोआर्डिनेटर व प्रेरक पूरी तरह से बेरोजगार हो जाएंगे। खास बात यह है कि साक्षरता कार्यक्रम का कार्यकाल खत्म होने के बाद इन्हें बेरोजगारी का दंश तो झेलना पड़ेगा। साथ ही दो साल के बकाया मानदेय भुगतान को अब ठोकरें खानी पड़ेगी। बताते हैं कि डिस्ट्रिक कोआर्डिनेटर को साल भर कर मानदेय नहीं मिल सका, जबकि ब्लाक कोआर्डिनेटर को दो साल से मानदेय ही नहीं मिला है। कमोवेश ऐसा ही कुछ हाल प्रेरकों का है। अधिकांश प्रेरकों को पांच से छह माह तक का मानदेय नहीं दिया गया है।
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साक्षरता निदेशालय से इस संबंध में कोई आदेश अभी तक प्राप्त नहीं हुआ है। निदेशालय के निर्देशानुसार की कार्रवाई की जाएगी। - मसऊद अख्तर अंसारी, बीएसए