फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Pilibhit News ›   जीपीएस से खुली डीजल खर्चे की पोल

जीपीएस से खुली डीजल खर्चे की पोल

Fri, 18 Jan 2019 11:34 PM IST
pawan chandra पवन चंद्रा
Updated Fri, 18 Jan 2019 11:34 PM IST
विज्ञापन
जीपीएस से खुली डीजल खर्चे की पोल
पीलीभीत। भ्रष्टाचार पर रोक लगाने में ऑनलाइन सिस्टम किस हद तक कारगर है, इसका खुलासा नगर पालिका की सफाई व्यवस्था में हुआ। नगर पालिका के कूड़ा उठाने वाले वाहनों पर हर माह लाखों रुपये का डीजल खर्च दर्शाया जा रहा था, लेकिन नवंबर में वाहनों के जीपीएस से लैस होते ही खर्च में 90 हजार रुपये से अधिक का खर्च एकाएक कम हो गया। ऐसे में सफाई के नाम पर किसी बड़े खेल के होने से इंकार नहीं किया नहीं किया जा सकता है।
विज्ञापन

करीब ढाई लाख की आबादी वाले शहर में नगर पालिका द्वारा हर माह करीब 65 लाख रुपये खर्च किए जा रहे हैं। शहर के 27 वार्डों की साफ सफाई को 187 स्थायी सफाई कर्मी और करीब 215 ठेका सफाई कर्मी लगाए गए हैं। पालिका प्रशासन के मुताबिक स्थायी सफाई कर्मचारियों पर वेतन मद से हर माह 46 लाख रुपये से अधिक खर्च किया जा रहा है, जबकि ठेका सफाई कर्मियों पर 15 लाख खर्च हो रहा है। वहीं पालिका के वाहन बेडे़ पर करीब साढ़े तीन लाख रुपये का डीजल खर्च होना दर्शाया जाता रहा है। इतनी बड़ी रकम खर्च होने के बाद भी शहर की सफाई व्यवस्था ढर्रे पर नहीं आ पा रही है।
विज्ञापन

वाहन बेड़े में शामिल हैं 20 वाहन
नगर पालिका के वाहन बेड़े में एक जेसीबी, एक लोडर, एक डंपर, आठ ट्रैक्टर, पांच टाटा लोडर, दो सीवर सक्शन मशीन समेत कुल 20 वाहन हैं। नगर पालिका के आंकड़ों के मुताबिक अभी तक इन वाहनों पर हर महीने करीब तीन-साढ़े तीन लाख रुपये का खर्च होना दर्शाया जा रहा है।
विज्ञापन
विज्ञापन

स्वच्छ भारत मिशन के तहत पालिका प्रशासन द्वारा सभी वाहनों में नवंबर में जीपीएस लगाई गई थी। माना जा रहा था कि वाहन बेड़े की ऑनलाइन ट्रेकिंग से सफाई में हो रहे खेल पर अंकुश लगेगा और हुआ भी यही। खुद पालिका के आंकड़े इसके गवाह है। अक्तूबर में कचरा वाहनों पर डीजल के नाम पर 3,49,039 रुपये खर्च होना दर्शाया गया। यही खर्च नवंबर में वाहनों में जीपीएस लगने के बाद घटकर 2,58,557 रुपये रह गया। बताते हैं कि सफाई कार्य में लगाए गए कुछ वाहन खड़े ही रहते थे, इसके बावजूद उन पर डीजल खर्च होना दर्शाया जा रहा था। अब जीपीएस लगने के बाद पकड़े जाने के डर से मजबूरन खेल बंद करना पड़ा, इसी के चलते डीजल खर्च की हकीकत भी सामने आ गई।

कूड़ा उठाने वाले वाहनों में जीपीएस लगने से निगरानी बढ़ी है। डीजल खर्च मामले में ऐसी कोई जानकारी नहीं है। इस मामले की जानकारी की जाएगी। फिलहाल सफाई निरीक्षक को वाहनों के बेतहाशा प्रयोग पर अंकुश लगाने को कह दिया गया है।
विमला जायसवाल, अध्यक्ष नगर पालिका परिषद

 
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed