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मंडी परिषद के ई-टेंडरिंग में भी हो गया खेल
Updated Sun, 03 Dec 2017 11:08 PM IST
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- फोटो : अमर उजाला
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पीलीभीत। मंडी परिषद में डीडीसी की कथित साठगांठ से एक ठेकेदार को निर्धारित क्षमता से अधिक का टेंडर प्राप्त करने के बाद उसे स्वीकृत कराने के प्रयास का मामला सामने आया है। महिला ठेकेदार शहर के मोहल्ला बागगुलशेर खां निवासी रेखा देवी ने इसकी लिखित शिकायत साक्ष्यों समेत सीएम पोर्टल व डीएम से की है। सीएम कार्यालय ने इसकी जांच सीडीओ को सौंपी है। सबकुछ ऑनलाइन है, लिहाजा महकमे में हड़कंप मचा हुआ है।
शिकायतकर्ता महिला ठेकेदार ने सीएम व डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि मंडी परिषद निर्माण खंड पीलीभीत में निर्माण कार्य के लिए ई-टेंडरिंग की टेक्निकल व फाइनेंशियल विट 29 नवंबर को खुली। महिला ठेकेदार ने बताया कि इसके बाद जब उसने ऑनलाइन अन्य ठेकेदारों के अभिलेख देखे तो उसमें पता चला कि सी क्लास ठेकेदार रामनरेश वर्मा के अभिलेखानुसार उसके काम करने की क्षमता 50 लाख रुपये तक की निर्धारित है। विभागीय अभिलेख के अनुसार कुछ दिन पहले ही करीब 34.43 लाख रुपये के दो निर्माण कार्य की विट रामनरेश वर्मा के पक्ष में खुल चुकी थी, इसके बाद भी मंडी परिषद के डीडीसी ने 20 लाख रुपये के एक और निर्माण कार्य की विट संबंधित ठेकेदार से साठगांठ कर उसके पक्ष में खोल दी। जिसके चलते नियम के तहत उसके (शिकायतकर्ता महिला ठेकेदार) द्वारा डाला गया टेंडर निरस्त कर दिया गया। महिला ठेकेदार का आरोप है कि ई-टेंडरिंग व्यवस्था होने के बाद भी डीडीसी से संबंधित ठेकेदार से साठगांठ कर वित्तीय अनियमितता बरतते हुए ठेकेदार रामनरेश वर्मा का टेंडर उसकी कार्य क्षमता से करीब 4 लाख रुपये अधिक होने के बाद भी स्वीकृत कर दिया गया। महिला ठेकेदार ने पूरे मामले की जांच कराने के साथ-साथ गलत ढंग से डाले गए रामनरेश के टेंडर को निरस्त कराने के साथ अपने द्वारा डाले गए टेंडर को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करने की मांग की है। महिला ठेकेदार का यह भी आरोप है 50 लाख रुपये तक की कार्य क्षमता वाले ठेकेदार रामनरेश ने ऑनलाइन डाले गए अपने एक शपथ पत्र में कार्य क्षमता वाले कालम में 60 लाख रुपये भरा है। ऐसा कर उसने विभागीय से धोखाधड़ी की है। महिला ठेकेदार ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ विभागीय अधिकारियों से उसे ब्लैकलिस्ट कर गलत शपथ पत्र दायर करने पर उसके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराने की मांग की है। सीएम पोर्टल पर की गई इस शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी है। शिकायतकर्ता को भी इसकी प्रति भेजी है। इस शिकायत के बाद महकमे में हड़कंप मचा है।
शिकायतकर्ता महिला ठेकेदार ने सीएम व डीएम को भेजे पत्र में कहा है कि मंडी परिषद निर्माण खंड पीलीभीत में निर्माण कार्य के लिए ई-टेंडरिंग की टेक्निकल व फाइनेंशियल विट 29 नवंबर को खुली। महिला ठेकेदार ने बताया कि इसके बाद जब उसने ऑनलाइन अन्य ठेकेदारों के अभिलेख देखे तो उसमें पता चला कि सी क्लास ठेकेदार रामनरेश वर्मा के अभिलेखानुसार उसके काम करने की क्षमता 50 लाख रुपये तक की निर्धारित है। विभागीय अभिलेख के अनुसार कुछ दिन पहले ही करीब 34.43 लाख रुपये के दो निर्माण कार्य की विट रामनरेश वर्मा के पक्ष में खुल चुकी थी, इसके बाद भी मंडी परिषद के डीडीसी ने 20 लाख रुपये के एक और निर्माण कार्य की विट संबंधित ठेकेदार से साठगांठ कर उसके पक्ष में खोल दी। जिसके चलते नियम के तहत उसके (शिकायतकर्ता महिला ठेकेदार) द्वारा डाला गया टेंडर निरस्त कर दिया गया। महिला ठेकेदार का आरोप है कि ई-टेंडरिंग व्यवस्था होने के बाद भी डीडीसी से संबंधित ठेकेदार से साठगांठ कर वित्तीय अनियमितता बरतते हुए ठेकेदार रामनरेश वर्मा का टेंडर उसकी कार्य क्षमता से करीब 4 लाख रुपये अधिक होने के बाद भी स्वीकृत कर दिया गया। महिला ठेकेदार ने पूरे मामले की जांच कराने के साथ-साथ गलत ढंग से डाले गए रामनरेश के टेंडर को निरस्त कराने के साथ अपने द्वारा डाले गए टेंडर को प्राथमिकता के आधार पर स्वीकृत करने की मांग की है। महिला ठेकेदार का यह भी आरोप है 50 लाख रुपये तक की कार्य क्षमता वाले ठेकेदार रामनरेश ने ऑनलाइन डाले गए अपने एक शपथ पत्र में कार्य क्षमता वाले कालम में 60 लाख रुपये भरा है। ऐसा कर उसने विभागीय से धोखाधड़ी की है। महिला ठेकेदार ने आरोपी ठेकेदार के खिलाफ विभागीय अधिकारियों से उसे ब्लैकलिस्ट कर गलत शपथ पत्र दायर करने पर उसके खिलाफ मुकदमा पंजीकृत कराने की मांग की है। सीएम पोर्टल पर की गई इस शिकायत पर मुख्यमंत्री कार्यालय ने इस मामले की जांच मुख्य विकास अधिकारी को सौंपी है। शिकायतकर्ता को भी इसकी प्रति भेजी है। इस शिकायत के बाद महकमे में हड़कंप मचा है।
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