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वनकर्मियों का दिया बाघ गणना का प्रशिक्षण
Updated Tue, 23 Jan 2018 10:01 AM IST
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वनकर्मियों को दिया बाघ गणना का प्रशिक्षण
बराही और माला के जंगल ले जाकर कराया डेमो
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। अगले माह होने वाली बाघ की गणना के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सोमवार को कलक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में वनकर्मियाें को प्रशिक्षण दिया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रशिक्षकों ने बाघ गणना के तरीके समझाए। इसके बाद दो टीमें बनाकर माला और बराही रेंज में डेमो भी कराया गया।
एनटीसीए के निर्देश पर अगले माह बाघों की गणना की जानी है। सोमवार को गांधी सभागार में डीएफओ कैलाश प्रकाश की मौजूदगी में वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी पीलीभीत के स्टाफ के अलावा रामपुर, खुटार के अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद रहे। डब्ल्यूडब्ल्यूएएफ के प्रशिक्षक आशीष बिष्टा ने बाघ गणना को बनने वाले ग्रिड, पैदल गश्त करने, इस दौरान एकत्र की जाने वाली सूचनाओं को प्रोजेक्टर के माध्यम से समझाया। उन्होेंने बताया कि जिस ट्रैक पर एक दिन जाएं उस पर दोबारा कम से कम दो तीन बाद जाया जाए। पैदल गश्त के दौरान वन्यजीवों के मल के अलावा पेड़ों पर जमीन पर बनाए गए निशान, शिकार के अवशेष, पगचिह्न आदि की पहचान कर दिए गए प्रपत्र में अंकित किया जाएगा। उन्होंने कहा इस दौरान तृणभोजी और मांसाहारी वन्यजीवों की उपस्थिति के चिन्हों को अलग-अलग दर्ज करना है। प्रशिक्षक ने गणना की इस प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाें पर भी विस्तार से चर्चा की। करीब तीन घंट के प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षुआें की दो टीमें बनाई र्गइं। इसमें एक रामपुर, खुटार के अलावा पूरनपुर, दियोरिया व बीसलपुर की सामाजिक वानिकी की टीम को माला रेंज और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सभी रेंजों के वनकर्मियों की टीम को बराही रेंज ले जाकर डेमो भी दिखाया गया। प्रशिक्षण के दौरान डीएफओ के अलावा सेवानिवृत्त एसडीओ केपी सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार, कंधईलाल, रोहित झा सहित कई लोग थे।
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बैठने तक की नहीं थी व्यवस्था
बाघ की गणना के लिए वन अधिकारियों ने कलक्ट्रेट के गांधी सभागार को चुना था, लेकिन प्रशिक्षुओं की संख्या के अनुसार उनके बैठने तक की व्यवस्था नहीं कराई गई। इसके चलते 20 से अधिक वनकर्मियों को खड़े रहकर ही प्रशिक्षण प्राप्त करना पड़ा।
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वनकर्मियों को दिया बाघ गणना का प्रशिक्षण
बराही और माला के जंगल ले जाकर कराया डेमो
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। अगले माह होने वाली बाघ की गणना के लिए वन विभाग ने तैयारियां शुरू कर दी हैं। सोमवार को कलक्ट्रेट स्थित गांधी सभागार में वनकर्मियाें को प्रशिक्षण दिया गया। डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के प्रशिक्षकों ने बाघ गणना के तरीके समझाए। इसके बाद दो टीमें बनाकर माला और बराही रेंज में डेमो भी कराया गया।
एनटीसीए के निर्देश पर अगले माह बाघों की गणना की जानी है। सोमवार को गांधी सभागार में डीएफओ कैलाश प्रकाश की मौजूदगी में वनकर्मियों को प्रशिक्षण दिया गया। प्रशिक्षण में पीलीभीत टाइगर रिजर्व और सामाजिक वानिकी पीलीभीत के स्टाफ के अलावा रामपुर, खुटार के अधिकारी कर्मचारी भी मौजूद रहे। डब्ल्यूडब्ल्यूएएफ के प्रशिक्षक आशीष बिष्टा ने बाघ गणना को बनने वाले ग्रिड, पैदल गश्त करने, इस दौरान एकत्र की जाने वाली सूचनाओं को प्रोजेक्टर के माध्यम से समझाया। उन्होेंने बताया कि जिस ट्रैक पर एक दिन जाएं उस पर दोबारा कम से कम दो तीन बाद जाया जाए। पैदल गश्त के दौरान वन्यजीवों के मल के अलावा पेड़ों पर जमीन पर बनाए गए निशान, शिकार के अवशेष, पगचिह्न आदि की पहचान कर दिए गए प्रपत्र में अंकित किया जाएगा। उन्होंने कहा इस दौरान तृणभोजी और मांसाहारी वन्यजीवों की उपस्थिति के चिन्हों को अलग-अलग दर्ज करना है। प्रशिक्षक ने गणना की इस प्रक्रिया के दौरान बरती जाने वाली सावधानियाें पर भी विस्तार से चर्चा की। करीब तीन घंट के प्रशिक्षण के बाद प्रशिक्षुआें की दो टीमें बनाई र्गइं। इसमें एक रामपुर, खुटार के अलावा पूरनपुर, दियोरिया व बीसलपुर की सामाजिक वानिकी की टीम को माला रेंज और पीलीभीत टाइगर रिजर्व के सभी रेंजों के वनकर्मियों की टीम को बराही रेंज ले जाकर डेमो भी दिखाया गया। प्रशिक्षण के दौरान डीएफओ के अलावा सेवानिवृत्त एसडीओ केपी सिंह, डब्ल्यूडब्ल्यूएफ के परियोजना अधिकारी नरेश कुमार, कंधईलाल, रोहित झा सहित कई लोग थे।
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बैठने तक की नहीं थी व्यवस्था
बाघ की गणना के लिए वन अधिकारियों ने कलक्ट्रेट के गांधी सभागार को चुना था, लेकिन प्रशिक्षुओं की संख्या के अनुसार उनके बैठने तक की व्यवस्था नहीं कराई गई। इसके चलते 20 से अधिक वनकर्मियों को खड़े रहकर ही प्रशिक्षण प्राप्त करना पड़ा।
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