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संस्कार भारती सेवा संस्थान का हुआ पुर्नगठन
Updated Mon, 04 Jun 2018 12:19 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
नगर में संस्कार भारती सेवा संस्थान का पुनर्गठन हुआ। इसकी जिलाध्यक्ष राज गोस्वामी बनी। इस मौके पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने कविताओं के माध्यम से लोगों को भाव विभोर कर दिया।
नगर में जैन कॉलेज मार्ग स्थित सागर मल धर्मशाला में संस्कार भारती सेवा संस्थान के पुनर्गठन किया। इसमें राकेश आचार्य जिला संयोजक, अजय तोमर सहसंयोजक, राज गोस्वामी अध्यक्ष, संजय कुमार शर्मा मंत्री, शैलेष जैन कोषाध्यक्ष और अश्वनी प्रभाकर को संगठन मंत्री बनाया। इसके बाद काव्य गोष्ठी का आयोजन किया । इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि चंद्रभान मिश्रा ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। संस्कार भारती का उद्देश्य इसको जाग्रत करना है।
इस दौरान कवि गजेंद्र गजानन ने कहा कि जिन सीढ़ी के सहारे हम चढे़ हैं, उन्हीं को आज हम सब भूले पडे़ हैं, जिन मां बाप की गोद में हम पले हैं, उन्हीं की आवश्यकता को भूले पडे़ हैं। कवि अजय तोमर ने कहा कि नया कुछ करके दिखाओं तो बात बने, आग पानी में लगाओ को कोई बात बने, साये लोगों को जगाना तो है आसान बहुत, जागतो को जगाओ तो कोई बात बने। कवि अनंग पाल दांगी ने कहा, जिसके आंचल में हर दर्द की दवा मिलती है, हर वक्त वफा ही वफा मिलती है, बच जाते है वो लोग सब हादसों से, जिनको मां की दुआ मिलती है। कवि चंद्रभान मिश्रा ने कहा, मेरे बेटे तुम्हें पता क्या, कैसे तुम्हें पढ़ाया पता क्या, कहा नही मैने मन्नत मांगी, कहा नहीं मैने शीश झुकाया है। कवि राकेश आचार्य ने कहा, चंदन माटी का तिलक करें, ह्रदय में अमृत कलश भरे, भावनाओं के दीप जलाकर आज उतारे आरती, मां भारती मां भारती मां भारती। महिला कवि राज गोस्वामी ने कहा, धन वैभव, गौरव और गर्व, सब एक राह के राही है, अनजानी मंजिल कितनी दूर और कितनी बाधाएं हैं। कवि राकेश धामा ने कहा कि जहर पिलो जितना मगर, यहां अमृत पीने पर पाबंदी है, यहां मरने पर पाबंदी नहीं, यहां तो जीने पर पाबंदी है। कवि नरेंद्र गुलशन ने कहा कि झूठी शोहरत, झूठी शान एक दिन करती है नुकसान, बाद में बनिये हिंदू, मुस्लिम पहले बनिये इंसान। इस दौरान अनेक कवि एवं श्रोता मौजूद रहे।
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नगर में संस्कार भारती सेवा संस्थान का पुनर्गठन हुआ। इसकी जिलाध्यक्ष राज गोस्वामी बनी। इस मौके पर आयोजित काव्य गोष्ठी में कवियों ने कविताओं के माध्यम से लोगों को भाव विभोर कर दिया।
नगर में जैन कॉलेज मार्ग स्थित सागर मल धर्मशाला में संस्कार भारती सेवा संस्थान के पुनर्गठन किया। इसमें राकेश आचार्य जिला संयोजक, अजय तोमर सहसंयोजक, राज गोस्वामी अध्यक्ष, संजय कुमार शर्मा मंत्री, शैलेष जैन कोषाध्यक्ष और अश्वनी प्रभाकर को संगठन मंत्री बनाया। इसके बाद काव्य गोष्ठी का आयोजन किया । इसका शुभारंभ मुख्य अतिथि चंद्रभान मिश्रा ने मां सरस्वती के चित्र के समक्ष दीप प्रज्वलन कर किया। उन्होंने कहा कि हम अपनी संस्कृति को भूलते जा रहे हैं। संस्कार भारती का उद्देश्य इसको जाग्रत करना है।
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इस दौरान कवि गजेंद्र गजानन ने कहा कि जिन सीढ़ी के सहारे हम चढे़ हैं, उन्हीं को आज हम सब भूले पडे़ हैं, जिन मां बाप की गोद में हम पले हैं, उन्हीं की आवश्यकता को भूले पडे़ हैं। कवि अजय तोमर ने कहा कि नया कुछ करके दिखाओं तो बात बने, आग पानी में लगाओ को कोई बात बने, साये लोगों को जगाना तो है आसान बहुत, जागतो को जगाओ तो कोई बात बने। कवि अनंग पाल दांगी ने कहा, जिसके आंचल में हर दर्द की दवा मिलती है, हर वक्त वफा ही वफा मिलती है, बच जाते है वो लोग सब हादसों से, जिनको मां की दुआ मिलती है। कवि चंद्रभान मिश्रा ने कहा, मेरे बेटे तुम्हें पता क्या, कैसे तुम्हें पढ़ाया पता क्या, कहा नही मैने मन्नत मांगी, कहा नहीं मैने शीश झुकाया है। कवि राकेश आचार्य ने कहा, चंदन माटी का तिलक करें, ह्रदय में अमृत कलश भरे, भावनाओं के दीप जलाकर आज उतारे आरती, मां भारती मां भारती मां भारती। महिला कवि राज गोस्वामी ने कहा, धन वैभव, गौरव और गर्व, सब एक राह के राही है, अनजानी मंजिल कितनी दूर और कितनी बाधाएं हैं। कवि राकेश धामा ने कहा कि जहर पिलो जितना मगर, यहां अमृत पीने पर पाबंदी है, यहां मरने पर पाबंदी नहीं, यहां तो जीने पर पाबंदी है। कवि नरेंद्र गुलशन ने कहा कि झूठी शोहरत, झूठी शान एक दिन करती है नुकसान, बाद में बनिये हिंदू, मुस्लिम पहले बनिये इंसान। इस दौरान अनेक कवि एवं श्रोता मौजूद रहे।
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