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इलाज अभाव में बाढ़ पीड़ित महिला ने नाव पर तोड़ा दम
Updated Wed, 29 Aug 2018 12:13 AM IST
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इलाज अभाव में बाढ़ पीड़ित महिला ने नाव पर तोड़ा दम
क्रासर---
दूसरे गांव में करना पड़ा अंतिम संस्कार
अमर जाला ब्यूरो
हजारा (पीलीभीत)। ट्रांस शारदा क्षेत्र के ग्राम राणा प्रताप नगर में उफनाई शारदा से आई बाढ़ के प्रकोप के साथ ही गांव के लोगों में संक्रामक रोग फैलने लगा है। बाढ़ पीड़ित पूर्व प्रधान सुमन गुप्ता की सास राजो देवी (60) भी पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित चल रहीं थीं। मंगलवार सुबह हालत खराब होने पर परिवार वाले उन्हें नाव से इलाज के लिए गांव से बाहर ले जा रहे थे कि नाव पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने जिला प्रशासन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों की भी पोल खोल दी है।
मृतका के पुत्र अनिरुद्द मदेशिया ने बताया कि पिछले एक माह में गांव में चार बार बाढ़ आ चुकी है। तीन दिन पहले आई बाढ़ के दिन ही उनकी मां राजो देवी की तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें तेज बुखार था। सोमवार को सिर पर पट्टी आदि रख कर बुखार कम किया गया। बाहर दिखाने के लिए गांव में बाढ़ का पानी कम होने का इंतजार किया गया, लेकिन पानी कम नहीं हुआ। सोमवार रात उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई। लिहाजा सुबह उन्हें नाव से गांव के बाहर इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि नाव पर चारपाई रख कर उस पर वह अपनी बीमार मां को बाहर कबीरगंज मार्ग पर बह रहे रपटा पुल को अभी पार करने ही वाले थे कि उनकी मां ने नाव पर ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक गांव के और भी कई लोग बीमार चल रहे हैं, लेकिन सेहत महकमे का कोई भी अधिकारी उन्हें देखने गांव नहीं पहुंचा है।
दूसरे गांव के श्मशान घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
राणाप्रताप नगर गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। गांव के घरों से लेकर सड़कों तक पर बाढ़ का पानी भरा है। गांव का श्मशान घाट भी इससे अछूता नहीं है। उसके भी जलमग्न होने के कारण राजो देवी के अंतिम संस्कार को लेकर परिवार वाले काफी चिंतित रहे। बाद में गांव वालों की मदद से परिवार के लोगों ने पड़ोसी गांव नहरोसा के श्मशानघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया। इसके लिए काफी दूर तक पानी भरे रास्ते से होकर ग्रामीणों को वहां पहुंचना पड़ा।
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कम होने का नाम नहीं ले रहा है पानी
शारदा का जल स्तर कम होने के बाद गांव में भरा बाढ़ का पानी कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी ग्रामीणों के घरों में एक से दो फिट बाढ़ का पानी भरा होने के कारण उनकी दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। पिछले एक माह में चार बार बाढ़ का पानी ग्रामीणों के घरों में भर जाने के चलते गांव के तमाम लोग संक्रामक रोग की चपेट में आ गए हैं।
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इलाज अभाव में बाढ़ पीड़ित महिला ने नाव पर तोड़ा दम
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दूसरे गांव में करना पड़ा अंतिम संस्कार
अमर जाला ब्यूरो
हजारा (पीलीभीत)। ट्रांस शारदा क्षेत्र के ग्राम राणा प्रताप नगर में उफनाई शारदा से आई बाढ़ के प्रकोप के साथ ही गांव के लोगों में संक्रामक रोग फैलने लगा है। बाढ़ पीड़ित पूर्व प्रधान सुमन गुप्ता की सास राजो देवी (60) भी पिछले तीन दिन से बुखार से पीड़ित चल रहीं थीं। मंगलवार सुबह हालत खराब होने पर परिवार वाले उन्हें नाव से इलाज के लिए गांव से बाहर ले जा रहे थे कि नाव पर ही उन्होंने दम तोड़ दिया। इस घटना ने जिला प्रशासन के बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने के दावों की भी पोल खोल दी है।
मृतका के पुत्र अनिरुद्द मदेशिया ने बताया कि पिछले एक माह में गांव में चार बार बाढ़ आ चुकी है। तीन दिन पहले आई बाढ़ के दिन ही उनकी मां राजो देवी की तबीयत खराब हो गई थी। उन्हें तेज बुखार था। सोमवार को सिर पर पट्टी आदि रख कर बुखार कम किया गया। बाहर दिखाने के लिए गांव में बाढ़ का पानी कम होने का इंतजार किया गया, लेकिन पानी कम नहीं हुआ। सोमवार रात उनकी तबीयत अधिक खराब हो गई। लिहाजा सुबह उन्हें नाव से गांव के बाहर इलाज के लिए ले जाने की व्यवस्था की गई। उन्होंने बताया कि नाव पर चारपाई रख कर उस पर वह अपनी बीमार मां को बाहर कबीरगंज मार्ग पर बह रहे रपटा पुल को अभी पार करने ही वाले थे कि उनकी मां ने नाव पर ही दम तोड़ दिया। ग्रामीणों के मुताबिक गांव के और भी कई लोग बीमार चल रहे हैं, लेकिन सेहत महकमे का कोई भी अधिकारी उन्हें देखने गांव नहीं पहुंचा है।
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दूसरे गांव के श्मशान घाट पर हुआ अंतिम संस्कार
राणाप्रताप नगर गांव पूरी तरह से बाढ़ की चपेट में है। गांव के घरों से लेकर सड़कों तक पर बाढ़ का पानी भरा है। गांव का श्मशान घाट भी इससे अछूता नहीं है। उसके भी जलमग्न होने के कारण राजो देवी के अंतिम संस्कार को लेकर परिवार वाले काफी चिंतित रहे। बाद में गांव वालों की मदद से परिवार के लोगों ने पड़ोसी गांव नहरोसा के श्मशानघाट पर उनका अंतिम संस्कार किया। इसके लिए काफी दूर तक पानी भरे रास्ते से होकर ग्रामीणों को वहां पहुंचना पड़ा।
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कम होने का नाम नहीं ले रहा है पानी
शारदा का जल स्तर कम होने के बाद गांव में भरा बाढ़ का पानी कुछ कम जरूर हुआ है, लेकिन अभी भी ग्रामीणों के घरों में एक से दो फिट बाढ़ का पानी भरा होने के कारण उनकी दिक्कतें कम नहीं हुई हैं। पिछले एक माह में चार बार बाढ़ का पानी ग्रामीणों के घरों में भर जाने के चलते गांव के तमाम लोग संक्रामक रोग की चपेट में आ गए हैं।