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लापरवाही: अभिभावकों को भी नहीं है नौनिहालों की फिक्र
Updated Wed, 11 Jul 2018 10:41 PM IST
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खटारा स्कूल वाहन, खतरे में बच्चों की जान
स्कूल प्रबंधन बेपरवाह, अभिभावकों को भी नहीं है नौनिहालों की फिक्र
मानकों को ताक पर रखकर दौड़ाए जा रहे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले में सड़कों पर यातायात नियमों का पालन कराने में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग फेल साबित होता दिख रहा है। स्कूल वाहन चालक मानकों को ताक पर रखकर कमाई के चक्कर में बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। कई वाहनों में अग्निशमन यंत्र के साथ फर्स्ट एड किट नहीं है। अधिकांश वाहन बिना बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्कूल प्रबंधक और अभिभावकों की अनदेखी से हर दिन सैकड़ों नौनिहाल जान हथेली पर रखकर स्कूलों को सफर तय करने को मजबूर है।
बुधवार को शहर की सड़कों पर परिवहन विभाग व यातायात पुलिस को ठेंगा दिखाकर बेतरतीब दौड़ रहे स्कूल वाहनों की हकीकत अमर उजाला टीम ने कैमरे में कैद की। शहर के नौगवा चौराहा, असम चौराहा, गौहनिया चौराहा, छतरी चौराहा आदि चौराहों पर पिकेट ड्यूटी पर मौजूद सिपाही से लेकर यातायात पुलिस के अफसरों के सामने से स्कूल वाहन दौड़ते रहे और जिम्मेदार मूकदर्शक बने रहे। परिवहन विभाग के आंकड़ों की बात करें तो 166 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें करीब तीन दर्जन स्कूल व कॉलजों की बसें हैं। करीब दो माह पूर्व कुशीनगर हादसे में 25 बच्चों की मौत के बाद परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की थी। साथ में हादसा होने पर स्कूल प्रबंधकों की जवाबदेही तय करने के मद्देनजर नोटिस जारी किया था। इसके बाद कुछ समय तक तो नियमों का पालन किया गया बाद में फिर वहीं हालात हो गए।
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कमाई के खेल में सुरक्षा से खिलवाड़
शहर से ग्रामीण क्षेत्र तक निजी स्कूलों में बिना परमिट और फिटनेस के सैकड़ों वाहन अटैच है। इसमें बच्चों को उनके घर से स्कूल लाने और ले जाने की सुविधा के एवज में वाहन मालिक व स्कूल प्रबंधन हर महीने मोटी रकम वसूल रहे हैं। ऐसे कई वाहनों की हालत खस्ताहाल है। इनमें न तो सही सीटें हैं और न ही उनका रंग पीला है। वाहन की फिटनेस आदि, गैस किट की गुणवत्ता शायद ही किसी में सही मिले।
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यह है मानक
- स्कूल वाहन की नियमित तरीके से फिटनेस हो।
- वाहन में मानक से अधिक बच्चे न बैठाएं।
- फर्स्टएड बाक्स, सीज फायर की व्यवस्था हो।
- किट की निर्धारित समय पर जांच होनी चाहिए।
- सीट के नीचे बस्ते रखने की व्यवस्था हो।
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बच्चों की सुरक्षा से नहीं होगा खिलवाड़
एआरटीओ अमिताभ राय का कहना है कि स्कूल वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। परिवहन नियमों की अनदेखी करने पर बुधवार को माधोटांडा और पूरनपुर में स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की गई है। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले में स्कूल प्रबंधकों भी पत्र भेजा जाएगा।
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खटारा स्कूल वाहन, खतरे में बच्चों की जान
स्कूल प्रबंधन बेपरवाह, अभिभावकों को भी नहीं है नौनिहालों की फिक्र
मानकों को ताक पर रखकर दौड़ाए जा रहे वाहन
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। जिले में सड़कों पर यातायात नियमों का पालन कराने में ट्रैफिक पुलिस और परिवहन विभाग फेल साबित होता दिख रहा है। स्कूल वाहन चालक मानकों को ताक पर रखकर कमाई के चक्कर में बच्चों की जान से खिलवाड़ कर रहे हैं। कई वाहनों में अग्निशमन यंत्र के साथ फर्स्ट एड किट नहीं है। अधिकांश वाहन बिना बिना बीमा के सड़कों पर दौड़ रहे हैं। स्कूल प्रबंधक और अभिभावकों की अनदेखी से हर दिन सैकड़ों नौनिहाल जान हथेली पर रखकर स्कूलों को सफर तय करने को मजबूर है।
बुधवार को शहर की सड़कों पर परिवहन विभाग व यातायात पुलिस को ठेंगा दिखाकर बेतरतीब दौड़ रहे स्कूल वाहनों की हकीकत अमर उजाला टीम ने कैमरे में कैद की। शहर के नौगवा चौराहा, असम चौराहा, गौहनिया चौराहा, छतरी चौराहा आदि चौराहों पर पिकेट ड्यूटी पर मौजूद सिपाही से लेकर यातायात पुलिस के अफसरों के सामने से स्कूल वाहन दौड़ते रहे और जिम्मेदार मूकदर्शक बने रहे। परिवहन विभाग के आंकड़ों की बात करें तो 166 स्कूली वाहन पंजीकृत हैं। इनमें करीब तीन दर्जन स्कूल व कॉलजों की बसें हैं। करीब दो माह पूर्व कुशीनगर हादसे में 25 बच्चों की मौत के बाद परिवहन विभाग ने स्कूल वाहनों के खिलाफ चेकिंग अभियान चलाकर बड़ी कार्रवाई की थी। साथ में हादसा होने पर स्कूल प्रबंधकों की जवाबदेही तय करने के मद्देनजर नोटिस जारी किया था। इसके बाद कुछ समय तक तो नियमों का पालन किया गया बाद में फिर वहीं हालात हो गए।
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कमाई के खेल में सुरक्षा से खिलवाड़
शहर से ग्रामीण क्षेत्र तक निजी स्कूलों में बिना परमिट और फिटनेस के सैकड़ों वाहन अटैच है। इसमें बच्चों को उनके घर से स्कूल लाने और ले जाने की सुविधा के एवज में वाहन मालिक व स्कूल प्रबंधन हर महीने मोटी रकम वसूल रहे हैं। ऐसे कई वाहनों की हालत खस्ताहाल है। इनमें न तो सही सीटें हैं और न ही उनका रंग पीला है। वाहन की फिटनेस आदि, गैस किट की गुणवत्ता शायद ही किसी में सही मिले।
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यह है मानक
- स्कूल वाहन की नियमित तरीके से फिटनेस हो।
- वाहन में मानक से अधिक बच्चे न बैठाएं।
- फर्स्टएड बाक्स, सीज फायर की व्यवस्था हो।
- किट की निर्धारित समय पर जांच होनी चाहिए।
- सीट के नीचे बस्ते रखने की व्यवस्था हो।
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बच्चों की सुरक्षा से नहीं होगा खिलवाड़
एआरटीओ अमिताभ राय का कहना है कि स्कूल वाहनों के खिलाफ लगातार अभियान चलाया जा रहा है। परिवहन नियमों की अनदेखी करने पर बुधवार को माधोटांडा और पूरनपुर में स्कूली वाहनों पर कार्रवाई की गई है। बच्चों की सुरक्षा से खिलवाड़ नहीं होने दिया जाएगा। इस मामले में स्कूल प्रबंधकों भी पत्र भेजा जाएगा।