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प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना दुर्गति का शिकार

Wed, 09 May 2018 08:48 PM IST
Updated Wed, 09 May 2018 08:48 PM IST
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प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना दुर्गति का शिकार
09 पीबीटीपी 7, 8
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प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना दुर्गति का शिकार
सबसीडरी नहर के फाटक खराब, मरम्मत के नाम पर खानापूरी
प्रदेश के कई जिलों में खड़ा हो सकता है सिंचाई का संकट
अमर उजाला ब्यूरो
माधोटांडा (पीलीभीत)।
प्रदेश की महत्वपूर्ण सिंचाई परियोजना सिंचाई विभाग की लापरवाही की भेंट चढ़ती जा रही है। सूखा पड़ने या फिर पहाड़ों से पानी कम मिलने की दशा में प्रदेश के दस से अधिक जनपदों को सिंचाई के लिए पानी मुहैय्या कराने वाली एकलौती सबसीडरी नहर का भी बुरा हाल है। ऐसे में यदि इस पर तत्काल ध्यान नहीं दिया गया तो जरूरत पड़ने पर कभी भी सिंचाई का बड़ा संकट खड़ा हो सकता है।
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पत्थरों के सहारे बंद किए जाते हैं सबसीडरी नहर के फाटक
जिला समेत प्रदेश के दस से अधिक जिलों की लाखों एकड़ कृषि भूमि की सिंचाई शारदा डैम में भंडार किए गए पानी से की जाती है। शारदा डैम में भंडार किए गए पानी को इसी सबसीडरी हरदोई ब्रांच नहर के माध्यम से हरदोई ब्रांच को पानी दिया जाता है। इसकी दशा देखे तो इस नहर के हेड के सभी फाटक खराब हैं। आलम यह है कि फाटकों को बंद करने के लिए उस पर बड़े-बड़े पत्थर फेंक कर बंद कराए जाते हैं। तब कहीं जाकर फाटक तो बंद दिखते हैं, लेकिन पानी का रिसाव निरंतर जारी रहता है।
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मरम्मत के नाम पर वर्षों से हो रही खानापूरी
प्रदेश के जिलों से जब सिंचाई के लिए डिमांड आती है तो जुगाड़ से ही सबसीडरी नहर के फाटकों को ऊपर नीचे करना पड़ता है। नहर की डाउनस्ट्रीम में भी मरम्मत के नाम पर खानापूरी की जा रही है। कुल मिलाकर देखा जाए तो सारे कार्य सिर्फ कागजों पर ही दिखते हैं। लापरवाही आलम यह है कि यहां रोजाना ही भवन निर्माण व ईंट भट्ठों के लिए अवैध रूप से चोरी छिपे रेत निकलवाई जाती है जो सिंचाई विभाग के नियमों के मुताबिक बहुत बड़ा कानूनी जुर्म है।
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कई बार जा चुके हैं प्रोजेक्ट
सिंचाई के लिहाज से बाइफरकेशन परियोजना प्रदेश की एक महत्वपूर्ण परियोजना है, लेकिन यहां किसी सहायक अभियंता तक की तैनात नहीं है। कुछ अवर अभियंता यहां तैनात भी है तो उन्हें यहां के बजाए रूहेलखंड में भी अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। ऐसे में नहरों के संचालन की जिम्मेदारी मात्र चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों हवाले है। सिंचाई विभाग के अभियंता बताते हैं कि सबसीडरी हरदोई ब्रांच के हेड को लेकर 18 करोड़ का एक प्रोजेक्ट सपा सरकार के कार्यकाल में भेजा गया था। आला अफसरों ने दौड़ भाग भी की, लेकिन हाथ कुछ नहीं लगा। इसके बाद पुन: प्रोजेक्ट बनाकर भेजे गए, लेकिन हर बार की तरह इन्हें भी रद्दी की टोकरी में डाल दिया गया।
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बिजली उत्पादन के लिए भी बने थे दो प्रोजेक्ट
सपा सरकार में यहां बिजली उत्पादन के लिए सबसीडरी हरदोई ब्रांच व हरदोई ब्रांच पर अलग-अलग दो प्रोजेक्ट बनाने के प्रयास शुरू हुए थे। बिजली विभाग व सिंचाई विभाग के अफसरों ने यहां कई दौरे भी किए थे। माना जा रहा था कि शीघ्र ही इन प्रोजेक्टों की हरी झंडी मिल जाएगी और क्षेत्र के विकास के लिए इस महत्वपूर्ण प्रोजेक्ट पर कार्य शुरू हो जाएगा, लेकिन शासन स्तर पर इस प्रोजेक्ट को कोई खास तवज्जो नहीं दी गई और मामला टलता रहा।

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वर्जन:
शारदा डैम से निकलने वाली सबसीडरी हरदोई ब्रांच के हेड के फाटक काफी खराब हो चुके हैं। हेड की मरम्मत को लेकर पूर्व में प्रोजेक्ट भेजे गए थे, लेकिन स्वीकृत नहीं हुए। अब पुन: प्रोजेक्ट मंजूरी के लिए शासन को भेज रखा है।
राजेश चौधरी, इंचार्ज, अभियंता, हेड वर्क्स खंड, बाइफरकेशन
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