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इको सेंसेटिव जोन में व्यापार के लिए लेनी होगी एनटीसीए की अनुमति
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पीलीभीत। टाइगर रिजर्व में पर्यटकों की बढ़ती संख्या को व्यापार के लिहाज से मुफीद मानने वालों को सुप्रीम कोर्ट ने झटका दे दिया है। सुप्रीम कोर्ट के आदेश के मुताबिक जंगल के आसपास के इलाकों में व्यापार करना अब आसान नहीं होगा। इसके लिए व्यापारियों को काफी मशक्कत करनी होगी। वन्यजीव सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण को देखते हुए कोर्ट के निर्णय के बाद अब इसके लिए एनटीसीए की अनुमति लेनी होगी। कोर्ट से मिली गाइड लाइन के बाद अब विभागीय अधिकारियों ने प्रस्ताव बनाकर भेज दिया है। इसको जल्द ही मंजूरी मिलने का दावा किया जा रहा है।
पीलीभीत के जंगल को साढ़े चार साल पहले टाइगर रिजर्व का दर्जा दे दिया गया। 73 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला जंगल पांच रेंजों में बंटा है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल के कानूनों में भी बदलाव किए गए। इसके साथ ही लंबे समय से चली आ रही संसाधनों की कमी को दूर करने के प्रयास भी तेज हुए। हालांकि बजट के अभाव के चलते संसाधनों की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। इधर, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के नियमानुसार वर्ष 2016 में टाइगर रिजर्व को इको सेंसेटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। इधर, टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीवों के बीच संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इको सेंसेटिव जोन निर्धारित करने का आदेश दे दिया। इसके लिए टाइगर रिजर्व के अफसरों ने रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसमें जंगल की सीमा के चारों ओर पांच किलोमीटर के दायरे को सेंसेटिव जोन में शामिल किया गया है।
सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। इको सेंसेटिव जोन को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद व्यवस्थाएं उसी हिसाब से तय कर दी जाएंगी। - आदर्श कुमार डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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पीलीभीत के जंगल को साढ़े चार साल पहले टाइगर रिजर्व का दर्जा दे दिया गया। 73 हजार वर्ग किलोमीटर में फैला जंगल पांच रेंजों में बंटा है। टाइगर रिजर्व बनने के बाद जंगल के कानूनों में भी बदलाव किए गए। इसके साथ ही लंबे समय से चली आ रही संसाधनों की कमी को दूर करने के प्रयास भी तेज हुए। हालांकि बजट के अभाव के चलते संसाधनों की कमी पूरी तरह दूर नहीं हो सकी है। इधर, राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (एनटीसीए) के नियमानुसार वर्ष 2016 में टाइगर रिजर्व को इको सेंसेटिव जोन घोषित करने का प्रस्ताव शासन को भेजा गया था, लेकिन लंबा समय बीतने के बाद इसे मंजूरी नहीं मिल सकी। इधर, टाइगर रिजर्व में वन्यजीवों की सुरक्षा और मानव-वन्यजीवों के बीच संघर्ष की बढ़ती घटनाओं को देखते हुए सुप्रीम कोर्ट ने स्वत: संज्ञान लेकर इको सेंसेटिव जोन निर्धारित करने का आदेश दे दिया। इसके लिए टाइगर रिजर्व के अफसरों ने रिपोर्ट तैयार कर प्रस्ताव शासन को भेज दिया है। इसमें जंगल की सीमा के चारों ओर पांच किलोमीटर के दायरे को सेंसेटिव जोन में शामिल किया गया है।
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सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन के अनुसार प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिया गया है। इको सेंसेटिव जोन को जल्द मंजूरी मिलने की उम्मीद है। इसके बाद व्यवस्थाएं उसी हिसाब से तय कर दी जाएंगी। - आदर्श कुमार डिप्टी डायरेक्टर, टाइगर रिजर्व
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