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साहब रहते नहीं, तो कैसे सुरक्षित हो सिंचाई कॉलोनी
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पीलीभीत। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का फरमान है कि अफसर अपने कार्यक्षेत्र के मुख्यालय पर ही ठहरेंगे, लेकिन इसका असर सिंचाई परियोजना के मुख्यालय पर तैनात अफसरों पर नहीं पड़ा है। अफसर मुख्यालय पर ही डेरा डाले हुए हैं। यही वजह है कि नहरों की जिम्मेदारी संभाल रहे चतुर्थ श्रेणी सिंचाई कर्मियों की कॉलोनी की सुरक्षा अफसरों को दिखाई नहीं दे रही है। बाघ समेत अन्य वन्यजीवों की दहशत के बावजूद कॉलोनी की सीमाओं को सुरक्षित नहीं किया जा रहा है। ऐसा तब है जब सिंचाई कर्मी लंबे समय से बाउंड्री बनाने की मांग करते चले आ रहे है। इधर चार दिन पूर्व से भालू की दस्तक से कॉलोनीवासियों में दहशत का माहौल है।
ब्रिटिश काल के दौरान उत्तराखंड से आने वाली मेन कैनाल नहर के विभाजन के लिए बाइफकेशन में हब बनाया गया था। यहां से तीन नहरें अलग-अलग क्षेत्रों की ओर निकली हैं। जिसके चलते बाइफरकेशन को सिंचाई परियोजना का मुख्यालय बना दिया गया। बाइफरकेशन में सिंचाई विभाग की कॉलोनी है। जहां मुख्यालय के इंचार्ज सहायक अभियंता से लेकर नीचे स्तर के सभी कर्मचारियों के आवास बने हुए है, लेकिन पिछले कई सालों से मुख्यालय के जिम्मेदार बाइफकेशन स्थित आवास पर नहीं ठहरते हैं। जिससे चलते आवास भी जर्जर हो गए है। चतुर्थ श्रेणी सिंचाई कर्मी ही कॉलोनी में परिवार समेत रहते हैं। जो रात दिन नहर के हेड पर ड्यूटी करते है। जंगल क्षेत्र होने के चलते बाइफरकेशन में बाघ, तेंदुए समेत हिंसक वन्यजीवों की मौजूदगी बनी रहती है। इसके बावजूद कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए विभागीय अफसर गंभीर नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले चार दिनों से यहां भालू की दहशत बनी है। ऐसे में समय रहते कॉलोनी को सुरक्षित नहीं किया गया तो हिंसक वन्यजीवों की दस्तक विभाग के लिए मुुसीबत बन जाएगी।
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ब्रिटिश काल के दौरान उत्तराखंड से आने वाली मेन कैनाल नहर के विभाजन के लिए बाइफकेशन में हब बनाया गया था। यहां से तीन नहरें अलग-अलग क्षेत्रों की ओर निकली हैं। जिसके चलते बाइफरकेशन को सिंचाई परियोजना का मुख्यालय बना दिया गया। बाइफरकेशन में सिंचाई विभाग की कॉलोनी है। जहां मुख्यालय के इंचार्ज सहायक अभियंता से लेकर नीचे स्तर के सभी कर्मचारियों के आवास बने हुए है, लेकिन पिछले कई सालों से मुख्यालय के जिम्मेदार बाइफकेशन स्थित आवास पर नहीं ठहरते हैं। जिससे चलते आवास भी जर्जर हो गए है। चतुर्थ श्रेणी सिंचाई कर्मी ही कॉलोनी में परिवार समेत रहते हैं। जो रात दिन नहर के हेड पर ड्यूटी करते है। जंगल क्षेत्र होने के चलते बाइफरकेशन में बाघ, तेंदुए समेत हिंसक वन्यजीवों की मौजूदगी बनी रहती है। इसके बावजूद कॉलोनी को सुरक्षित करने के लिए विभागीय अफसर गंभीर नहीं हैं। यही वजह है कि पिछले चार दिनों से यहां भालू की दहशत बनी है। ऐसे में समय रहते कॉलोनी को सुरक्षित नहीं किया गया तो हिंसक वन्यजीवों की दस्तक विभाग के लिए मुुसीबत बन जाएगी।
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