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डाकघर की जमीन कब्जाने वाले भी कम रसूखदार नहीं
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पीलीभीत। अभी ध्यान योग केंद्र बनाने के नाम पर शत्रु संपत्ति का एक बड़े अफसर की साठगांठ से बैनामा कराने का मामला शांत नहीं हो सका था कि सिटी डाकघर की खाली पड़ी बेशकीमती जमीन पर अवैध कब्जा करने की घटना ने सिस्टम की लापरवाही की एक और नजीर पेश कर दी है। खास बात ये है कि इस मामले में भी राजस्व विभाग चुप्पी साधे रहा। तहसीलदार ने लेखपाल और कानूनगो की उस रिपोर्ट को ही नजरंदाज कर दिया, जिसमें उन्होंने डाकघर की जमीन पर अवैध कब्जा होने की आशंका जताई थी। तहसीलदार की इस रिपोर्ट को दबा लेने का नतीजा यह हुआ कि रसूखदारों ने डाक विभाग की जमीन की दीवार ढहाकर उस पर कब्जा कर लिया। इन रसूखदारों में जिले में तैनात रहे एक बड़े अफसर के रिश्तेदार से लेकर जहानाबाद के चेयरमैन का बेटा तक शामिल है।
कोतवाली क्षेत्र के बरेली गेट के पास सिटी डाकघर की करीब साढ़े छह सौ वर्ग गज जमीन सालों से खाली पड़ी है। दरअसल, इस जमीन पर पहले सिटी डाकघर था। करीब बीस साल पहले भवन जर्जर हो जाने पर डाकघर दूसरे भवन में शिफ्ट कर दिया गया। जर्जर भवन गिर जाने पर डाक विभाग ने भूखंड की इसकी चहारदीवारी कराके गेट लगवा दिया और उसमें ताले डाल दिए। इस जमीन पर मंगलवार की रात अवैध कब्जा करने की कोशिश की गई। रात भर में जेसीबी से चहारदीवार को ढहा दिया गया और फिर निर्माण भी शुरू करा दिया। बुधवार सुबह डाकघर के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर हालात देखे तो शिकायत पुलिस तक पहुंची। इसके बाद पुलिस ने काम रुकवा दिया। सहायक अधीक्षक डाकघर अजय जैन की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। करोड़ों की इस जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर भी रसूखदारों की सिस्टम से साठगांठ की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। दर्ज की गई रिपोर्ट में एक नाम करीमाबाद बड़ा गांव केकोली काकोरी लखनऊ निवासी पारसमणि पांडेय का है। यह पूर्व में जिले में तैनात रहे एक बड़े अधिकारी के भांजे बताए जाते हैं। दूसरा नाम जहानाबाद की चेयरमैन ममता गुप्ता के बेटे शिवा गुप्ता का है। ऐसे में जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर सिस्टम से साठगांठ की ओर साफ इशारा है। शायद यही वजह रही कि अब तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। अगर डाकघर के अफसर बुधवार सुबह न पहुंचते तो शायद आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब भी हो जाते।
लेखपाल, कानूनगो ने तो महीनों पहले जता दी थी कब्जे की आशंका
पीलीभीत। सिटी डाकघर की जमीन पर किए गए कब्जे को लेकर सिस्टम पर सवाल उठ रहा है। यह इसलिए लाजिमी है चूंकि इसकी जानकारी पहले से ही अधिकारियों को दे दी गई थी। फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
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लेखपाल चूरीलाल ने आठ दिसंबर 2018 को एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें बताया था कि डाकघर की इस सरकारी जमीन का करीब 500 वर्गमीटर हिस्सा खाली पड़ा है। इसकी बाउंड्री बनी हुई है। यह बाउंड्री करीब दो दशक पुरानी बताई गई है। सिटी डाकघर का भवन जर्जर होने पर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। शेष क्षेत्रफल में व्यक्तिगत आबादी है। सिटी पोस्ट ऑफिस वाली जगह पर इकबालुद्दीन नामक व्यक्ति ने वाद दायर कर रखा है। रिपोर्ट में जमीन पर डाक विभाग के काबिज होने और उसके अधिकारियों द्वारा ही देखरेख किए जाने की बात कही गई थी। यह भी साफ कहा गया था कि इस सरकारी जमीन पर कुछ लोग अवैध कब्जा कर सकते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला लापरवाह बना रहा और नतीजा वही हुआ जिसका लेखपाल और कानूनगो ने अपनी रिपोर्ट में अंदेशा जताया था।
..तो क्या खतौनी में भी किया गया है हेर-फेर
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि उक्त जमीन को लेकर बताए गए गाटा संख्या में दो पक्ष हैं। आरोपी पक्ष कागजात पेश कर इसे अलग गाटा संख्या बताकर अपना हक जता रहा है। उसका कहना है कि डाकघर की जमीन की गाटा संख्या अलग है। इसके कागजात भी प्रस्तुत किए जा रहे हैं, लेकिन लेखपाल की रिपोर्ट खतौनी में हेराफेरी की ओर इशारा कर रही है। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में डाकघर की जमीन की वही गाटा संख्या बताई है, जिस पर आरोपी अपना दावा कर रहे हैं। लेखपाल ने जिस भूखंड को डाकघर का बताते हुए उसकी निगरानी के लिए तहसीलदार को लिखा था, उसकी गाटा संख्या वही है, जिस पर आरोपी पक्ष अपना हक जता रहा है।
कई चर्चित चेहरे भी दिखाई दे रहे थे मौके पर
सिटी डाकघर की जमीन पर कब्जा करने की सूचना मिलने के बाद जब खलबली मची तो मंजर अलग था। पुलिस के मुताबिक कुछ भूमाफिया भी मौके पर दिखाई दिए थे। हालांकि वह पुलिस के पहुंचने पर खिसक गए। इसके अलावा इस मामले में रसूखदारों के शामिल होने की बात भी कुछ पुलिसकर्मी साफ तौर पर बता गए थे। विवेचना के दौरान सब तथ्य जुटाने की बात कहकर इसे लेकर हालांकि पुलिस अभी खुलकर कुछ नहीं कह रही है। डाकघर की जमीन पर कब्जे के दौरान मौजूद एक नेता के रिश्तेदार तो उस वक्त खिसक लिए जब पुलिस ने उनसे नाम पूछकर उनका फोटो खींचना चाहा।
चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल
सहायक अधीक्षक डाकघर की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में शामिल चार लोगों पर कार्रवाई की शुरुआत कर दी गई है। नामजद आरोपी भिठौराखुर्द गजरौला निवासी उमेश सिंह, शेष कुमार, आशीष और नई बस्ती निवासी बृजेश का बृहस्पतिवार को कोतवाली पुलिस ने चालान कर दिया। अभी नामचीन की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
मेरी ओर से सिटी डाकघर की इस जमीन से संबंधित रिपोर्ट तैयार की गई थी। जिसमें अवैध कब्जा किए जाने की आशंका जताते हुए अधिकारियों को भेज दिया था। इसके बाद क्या हुआ, मुझे नहीं पता चला। खेवट में आरोपियों के नाम शामिल नहीं हुए हैं।
- चूरीलाल, लेखपाल
शिकायत मिलने के बाद ही तत्काल प्रकरण की 13 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी। चार को गिरफ्तार कर चालान किया गया है। इसकी गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई करने के निर्देश कोतवाली पुलिस को दिए गए हैं।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी
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कोतवाली क्षेत्र के बरेली गेट के पास सिटी डाकघर की करीब साढ़े छह सौ वर्ग गज जमीन सालों से खाली पड़ी है। दरअसल, इस जमीन पर पहले सिटी डाकघर था। करीब बीस साल पहले भवन जर्जर हो जाने पर डाकघर दूसरे भवन में शिफ्ट कर दिया गया। जर्जर भवन गिर जाने पर डाक विभाग ने भूखंड की इसकी चहारदीवारी कराके गेट लगवा दिया और उसमें ताले डाल दिए। इस जमीन पर मंगलवार की रात अवैध कब्जा करने की कोशिश की गई। रात भर में जेसीबी से चहारदीवार को ढहा दिया गया और फिर निर्माण भी शुरू करा दिया। बुधवार सुबह डाकघर के अफसरों ने मौके पर पहुंचकर हालात देखे तो शिकायत पुलिस तक पहुंची। इसके बाद पुलिस ने काम रुकवा दिया। सहायक अधीक्षक डाकघर अजय जैन की तहरीर पर पुलिस ने रिपोर्ट दर्ज कर ली। करोड़ों की इस जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर भी रसूखदारों की सिस्टम से साठगांठ की परतें खुलनी शुरू हो गई हैं। दर्ज की गई रिपोर्ट में एक नाम करीमाबाद बड़ा गांव केकोली काकोरी लखनऊ निवासी पारसमणि पांडेय का है। यह पूर्व में जिले में तैनात रहे एक बड़े अधिकारी के भांजे बताए जाते हैं। दूसरा नाम जहानाबाद की चेयरमैन ममता गुप्ता के बेटे शिवा गुप्ता का है। ऐसे में जमीन पर हो रहे अवैध कब्जे को लेकर सिस्टम से साठगांठ की ओर साफ इशारा है। शायद यही वजह रही कि अब तक इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया। अगर डाकघर के अफसर बुधवार सुबह न पहुंचते तो शायद आरोपी अपने मंसूबों में कामयाब भी हो जाते।
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लेखपाल, कानूनगो ने तो महीनों पहले जता दी थी कब्जे की आशंका
पीलीभीत। सिटी डाकघर की जमीन पर किए गए कब्जे को लेकर सिस्टम पर सवाल उठ रहा है। यह इसलिए लाजिमी है चूंकि इसकी जानकारी पहले से ही अधिकारियों को दे दी गई थी। फर्क सिर्फ इतना रहा कि इस पर कोई एक्शन नहीं लिया गया।
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लेखपाल चूरीलाल ने आठ दिसंबर 2018 को एक रिपोर्ट तैयार की थी। इसमें बताया था कि डाकघर की इस सरकारी जमीन का करीब 500 वर्गमीटर हिस्सा खाली पड़ा है। इसकी बाउंड्री बनी हुई है। यह बाउंड्री करीब दो दशक पुरानी बताई गई है। सिटी डाकघर का भवन जर्जर होने पर दूसरी जगह शिफ्ट कर दिया गया। शेष क्षेत्रफल में व्यक्तिगत आबादी है। सिटी पोस्ट ऑफिस वाली जगह पर इकबालुद्दीन नामक व्यक्ति ने वाद दायर कर रखा है। रिपोर्ट में जमीन पर डाक विभाग के काबिज होने और उसके अधिकारियों द्वारा ही देखरेख किए जाने की बात कही गई थी। यह भी साफ कहा गया था कि इस सरकारी जमीन पर कुछ लोग अवैध कब्जा कर सकते हैं। इसके बावजूद प्रशासनिक अमला लापरवाह बना रहा और नतीजा वही हुआ जिसका लेखपाल और कानूनगो ने अपनी रिपोर्ट में अंदेशा जताया था।
..तो क्या खतौनी में भी किया गया है हेर-फेर
इस पूरे मामले में बड़ा सवाल यह है कि उक्त जमीन को लेकर बताए गए गाटा संख्या में दो पक्ष हैं। आरोपी पक्ष कागजात पेश कर इसे अलग गाटा संख्या बताकर अपना हक जता रहा है। उसका कहना है कि डाकघर की जमीन की गाटा संख्या अलग है। इसके कागजात भी प्रस्तुत किए जा रहे हैं, लेकिन लेखपाल की रिपोर्ट खतौनी में हेराफेरी की ओर इशारा कर रही है। लेखपाल ने अपनी रिपोर्ट में डाकघर की जमीन की वही गाटा संख्या बताई है, जिस पर आरोपी अपना दावा कर रहे हैं। लेखपाल ने जिस भूखंड को डाकघर का बताते हुए उसकी निगरानी के लिए तहसीलदार को लिखा था, उसकी गाटा संख्या वही है, जिस पर आरोपी पक्ष अपना हक जता रहा है।
कई चर्चित चेहरे भी दिखाई दे रहे थे मौके पर
सिटी डाकघर की जमीन पर कब्जा करने की सूचना मिलने के बाद जब खलबली मची तो मंजर अलग था। पुलिस के मुताबिक कुछ भूमाफिया भी मौके पर दिखाई दिए थे। हालांकि वह पुलिस के पहुंचने पर खिसक गए। इसके अलावा इस मामले में रसूखदारों के शामिल होने की बात भी कुछ पुलिसकर्मी साफ तौर पर बता गए थे। विवेचना के दौरान सब तथ्य जुटाने की बात कहकर इसे लेकर हालांकि पुलिस अभी खुलकर कुछ नहीं कह रही है। डाकघर की जमीन पर कब्जे के दौरान मौजूद एक नेता के रिश्तेदार तो उस वक्त खिसक लिए जब पुलिस ने उनसे नाम पूछकर उनका फोटो खींचना चाहा।
चार लोगों को पुलिस ने गिरफ्तार कर भेजा जेल
सहायक अधीक्षक डाकघर की तहरीर पर दर्ज मुकदमे में शामिल चार लोगों पर कार्रवाई की शुरुआत कर दी गई है। नामजद आरोपी भिठौराखुर्द गजरौला निवासी उमेश सिंह, शेष कुमार, आशीष और नई बस्ती निवासी बृजेश का बृहस्पतिवार को कोतवाली पुलिस ने चालान कर दिया। अभी नामचीन की गिरफ्तारी नहीं हो सकी है।
मेरी ओर से सिटी डाकघर की इस जमीन से संबंधित रिपोर्ट तैयार की गई थी। जिसमें अवैध कब्जा किए जाने की आशंका जताते हुए अधिकारियों को भेज दिया था। इसके बाद क्या हुआ, मुझे नहीं पता चला। खेवट में आरोपियों के नाम शामिल नहीं हुए हैं।
- चूरीलाल, लेखपाल
शिकायत मिलने के बाद ही तत्काल प्रकरण की 13 लोगों के खिलाफ रिपोर्ट दर्ज करा दी गई थी। चार को गिरफ्तार कर चालान किया गया है। इसकी गंभीरता से जांच कराकर कार्रवाई करने के निर्देश कोतवाली पुलिस को दिए गए हैं।
- धर्म सिंह मार्छाल, सीओ सिटी