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महकमे ने गैरहाजिर शिक्षकों व अनुदेशकों को भेजे नोटिस
Updated Mon, 05 Jun 2017 06:39 PM IST
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पीलीभीत। डीएम की ओर से 30 शिक्षकों व नौ अनुदेशकों के खिलाफ की गई बर्खास्तगी की कार्रवाई से बेसिक शिक्षा विभाग में खलबली मची हुई है। इधर, बीएसए ने सभी गैरहाजिर शिक्षकों व अनुदेशकों को नोटिस भेजकर तीन दिन के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए हैं। हालांकि ग्रीष्मकालीन छुट्टियों में शिक्षकों को नोटिस कैसे तामील कराए जाएं, इसको लेकर विभाग में पसोपेश की स्थिति बनी हुई है।
डीएम शीतल वर्मा के निर्देश पर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने 20 मई तक जिले के परिषदीय स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण रिपोर्ट अधिकारियों ने जिला प्रशासन को सौंप दी। जिसके बाद डीएम ने सीडीओ की रिपोर्ट के आधार पर गैरहाजिर पाए गए 30 शिक्षकों व नौ अनुदेशक व एक शिक्षामित्र को बर्खास्त करने के निर्देश बीएसए को दिए थे। डीएम द्वारा बर्खास्त करने के निर्देश संबंधी खबर समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद बेसिक शिक्षा महकमे में खलबली मच गई। महकमा बिना किसी नोटिस सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई करने से बच रहा है। बीएसए मसऊद अख्तर अंसारी ने भी शिक्षा नियमावली में बिना नोटिस सीधे बर्खास्त करने का कोई विकल्प न होने की बात कहते हुए डीएम को पत्रावली पुर्ननविचार के लिए भेजी है। इधर, अब इस मामले में बीएसए ने गैरहाजिर मिले 30 शिक्षकों, नौ अनुदेशकों व एक शिक्षामित्र को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के अंदर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए है। बीएसए मसऊद अख्तर अंसारी ने बताया कि गैरहाजिर मिले शिक्षकों व अनुदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी को तीन दिन के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
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इनको जारी किया गया नोटिस
शिक्षक: योगिता सिंह, खुर्शीद जमाल, ममता देवी, शकील अहमद, रामकिशन, रामकृष्ण, सुरेंद्र कुमार, रूबी, विभु कुमार मिश्रा, शोविंदर सिंह, सौरभ कुमार, अमनदीप, मुक्ता कुमारी, प्रतापशील, सूरजपाल, मीना कुमारी, रौनक जहां, उपदेश वर्मा, दीपेश चंद्र सक्सेना, नीतू सैनी, कीर्ति गंगवार, राजश्री गंगवार, आरती, कुमारी पूनम, रुकमणी देवी, बबीता रानी, शिल्पी रानी, अंजूलता व शमशुल।
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अनुदेशक: आरती जायसवाल, नितिन कुमार, सुरेश कुमार, रेखारानी, कमला प्रसाद, भारती देवी, पुलकित शर्मा, कविता, राजेश व शिक्षामित्र रीना जायसवाल।
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शिक्षक आउट ऑफ स्टेशन, कैसे तामील होगा नोटिस
महकमे द्वारा गैरहाजिर मिले शिक्षकों, अनुदेशकों को कारण बताओ नोटिस तो जारी किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई शिक्षक ग्रीष्मकालीन छुट्टियां मनाने बाहर गए हुए हैं। ऐसे में शिक्षकों को नोटिस तामील कराने में विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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बर्खास्तगी की है लंबी प्रक्रिया
शिक्षा महकमे के जानकारों के मुताबिक बर्खास्तगी एक लंबी प्रक्रिया है। गंभीर वित्तीय अनियमितता, आपराधिक मामलों में वांछित मिलने पर, लगातार विद्यालय से अनुपस्थित रहने, अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना आदि में बर्खास्तगी संभव है, लेकिन इससे पूर्व संबंधित को नोटिस भेजे जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके बाद बर्खास्तगी संबंधी पत्रावली डीएम को अनुमोदन के लिए भेजी जाती है।
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शिक्षक नेताओं ने साधी चुप्पी
शिक्षकों की समस्याओं को मुद्दा बनाकर धरना प्रदर्शन करने वाले शिक्षक नेता बर्खास्तगी की कार्रवाई को लेकर चुप्पी साधे बैठे हैं। बताते हैं कि शिक्षक नेताओं को एक उच्चाधिकारी ने बर्खास्तगी की कार्रवाई न होने का मौन आश्वासन दिया है। वहीं दूसरी ओर शिक्षक नेता बिना किसी नोटिस बर्खास्तगी की कार्रवाई न होने को लेकर आश्वस्त हैं।
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शिक्षक नेताओं ने कार्रवाई को नियमवली के विपरीत बताया, सौंपा ज्ञापन
पीलीभीत। डीएम द्वारा गैरहाजिर मिले शिक्षकों व अनुदेशकों की बर्खास्तगी को लेकर चल रही प्रक्रिया को गलत बताते हुए ज्ञापन सौंपकर बर्खास्तगी की कार्रवाई को रोकने की मांग की है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री उमेश गंगवार के नेतृत्व में सोमवार को शिक्षक नेताओं ने डीएम को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में कहा कि जिले में 20 मई से पूर्व हुए निरीक्षण में कई शिक्षकों व अनुदेशकों के गैरहाजिर रहने के आरोप लगाए गए। जिसके चलते बर्खास्तगी की कार्रवाई गतिमान है। कहा कि जो शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, उनसे उनका पक्ष भी नहीं लिया गया और एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी गई जोकि बेसिक शिक्षा नियमावली के अलावा राज्य कर्मचारी आचार संहिता के विपरीत है। शिक्षकों से उनका पक्ष लिया जाना चाहिए। यदि दोषी पाए जाते हैं तो शासकीय नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। ज्ञापन में बर्खास्तगी कार्रवाई को रोकने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला कोषाध्यक्ष पवन कुमार सिन्हा, ब्लाक अध्यक्ष बाबूराम गंगवार, पंकज गंगवार, नंदकिशोर, विजय कुमार, अश्वनी गंगवार आदि शामिल रहे।
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डीएम शीतल वर्मा के निर्देश पर जिले के प्रशासनिक अधिकारियों ने 20 मई तक जिले के परिषदीय स्कूलों का औचक निरीक्षण किया था। निरीक्षण रिपोर्ट अधिकारियों ने जिला प्रशासन को सौंप दी। जिसके बाद डीएम ने सीडीओ की रिपोर्ट के आधार पर गैरहाजिर पाए गए 30 शिक्षकों व नौ अनुदेशक व एक शिक्षामित्र को बर्खास्त करने के निर्देश बीएसए को दिए थे। डीएम द्वारा बर्खास्त करने के निर्देश संबंधी खबर समाचार पत्र में प्रकाशित होने के बाद बेसिक शिक्षा महकमे में खलबली मच गई। महकमा बिना किसी नोटिस सीधे बर्खास्तगी की कार्रवाई करने से बच रहा है। बीएसए मसऊद अख्तर अंसारी ने भी शिक्षा नियमावली में बिना नोटिस सीधे बर्खास्त करने का कोई विकल्प न होने की बात कहते हुए डीएम को पत्रावली पुर्ननविचार के लिए भेजी है। इधर, अब इस मामले में बीएसए ने गैरहाजिर मिले 30 शिक्षकों, नौ अनुदेशकों व एक शिक्षामित्र को कारण बताओ नोटिस जारी करते हुए तीन दिन के अंदर जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए है। बीएसए मसऊद अख्तर अंसारी ने बताया कि गैरहाजिर मिले शिक्षकों व अनुदेशकों को कारण बताओ नोटिस जारी किए गए हैं। इन सभी को तीन दिन के अंदर जवाब देने के निर्देश दिए गए हैं।
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इनको जारी किया गया नोटिस
शिक्षक: योगिता सिंह, खुर्शीद जमाल, ममता देवी, शकील अहमद, रामकिशन, रामकृष्ण, सुरेंद्र कुमार, रूबी, विभु कुमार मिश्रा, शोविंदर सिंह, सौरभ कुमार, अमनदीप, मुक्ता कुमारी, प्रतापशील, सूरजपाल, मीना कुमारी, रौनक जहां, उपदेश वर्मा, दीपेश चंद्र सक्सेना, नीतू सैनी, कीर्ति गंगवार, राजश्री गंगवार, आरती, कुमारी पूनम, रुकमणी देवी, बबीता रानी, शिल्पी रानी, अंजूलता व शमशुल।
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अनुदेशक: आरती जायसवाल, नितिन कुमार, सुरेश कुमार, रेखारानी, कमला प्रसाद, भारती देवी, पुलकित शर्मा, कविता, राजेश व शिक्षामित्र रीना जायसवाल।
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शिक्षक आउट ऑफ स्टेशन, कैसे तामील होगा नोटिस
महकमे द्वारा गैरहाजिर मिले शिक्षकों, अनुदेशकों को कारण बताओ नोटिस तो जारी किए गए हैं, लेकिन इनमें से कई शिक्षक ग्रीष्मकालीन छुट्टियां मनाने बाहर गए हुए हैं। ऐसे में शिक्षकों को नोटिस तामील कराने में विभाग को खासी मशक्कत करनी पड़ रही है।
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बर्खास्तगी की है लंबी प्रक्रिया
शिक्षा महकमे के जानकारों के मुताबिक बर्खास्तगी एक लंबी प्रक्रिया है। गंभीर वित्तीय अनियमितता, आपराधिक मामलों में वांछित मिलने पर, लगातार विद्यालय से अनुपस्थित रहने, अधिकारियों के आदेशों की अवहेलना आदि में बर्खास्तगी संभव है, लेकिन इससे पूर्व संबंधित को नोटिस भेजे जाने की प्रक्रिया अपनाई जाती है। इसके बाद बर्खास्तगी संबंधी पत्रावली डीएम को अनुमोदन के लिए भेजी जाती है।
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शिक्षक नेताओं ने साधी चुप्पी
शिक्षकों की समस्याओं को मुद्दा बनाकर धरना प्रदर्शन करने वाले शिक्षक नेता बर्खास्तगी की कार्रवाई को लेकर चुप्पी साधे बैठे हैं। बताते हैं कि शिक्षक नेताओं को एक उच्चाधिकारी ने बर्खास्तगी की कार्रवाई न होने का मौन आश्वासन दिया है। वहीं दूसरी ओर शिक्षक नेता बिना किसी नोटिस बर्खास्तगी की कार्रवाई न होने को लेकर आश्वस्त हैं।
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शिक्षक नेताओं ने कार्रवाई को नियमवली के विपरीत बताया, सौंपा ज्ञापन
पीलीभीत। डीएम द्वारा गैरहाजिर मिले शिक्षकों व अनुदेशकों की बर्खास्तगी को लेकर चल रही प्रक्रिया को गलत बताते हुए ज्ञापन सौंपकर बर्खास्तगी की कार्रवाई को रोकने की मांग की है।
प्राथमिक शिक्षक संघ के जिला मंत्री उमेश गंगवार के नेतृत्व में सोमवार को शिक्षक नेताओं ने डीएम को संबोधित ज्ञापन प्रशासनिक अधिकारी को सौंपा। ज्ञापन में कहा कि जिले में 20 मई से पूर्व हुए निरीक्षण में कई शिक्षकों व अनुदेशकों के गैरहाजिर रहने के आरोप लगाए गए। जिसके चलते बर्खास्तगी की कार्रवाई गतिमान है। कहा कि जो शिक्षक अनुपस्थित पाए गए, उनसे उनका पक्ष भी नहीं लिया गया और एकतरफा कार्रवाई शुरू कर दी गई जोकि बेसिक शिक्षा नियमावली के अलावा राज्य कर्मचारी आचार संहिता के विपरीत है। शिक्षकों से उनका पक्ष लिया जाना चाहिए। यदि दोषी पाए जाते हैं तो शासकीय नियमों के तहत कार्रवाई की जानी चाहिए। ज्ञापन में बर्खास्तगी कार्रवाई को रोकने की मांग की गई। ज्ञापन सौंपने वालों में जिला कोषाध्यक्ष पवन कुमार सिन्हा, ब्लाक अध्यक्ष बाबूराम गंगवार, पंकज गंगवार, नंदकिशोर, विजय कुमार, अश्वनी गंगवार आदि शामिल रहे।