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गिनती शुरू होने से पहले कम हो गया एक और बाघ
Updated Thu, 29 Mar 2018 08:07 PM IST
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गिनती शुरू होने से पहले कम हो गया एक और बाघ
छह साल में जा चुकी है नौ बाघ व दो तेंदुओं की जान
कभी जंगल तो बाहर मिलते हैं शव
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बाघ संरक्षण के लिए पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया है। बाघों की जानकारी रखने के लिए समय समय पर बाघ गणना भी कराई जाती है। पहली अप्रैल से बाघ गणना शुरू होनी थी लेकिन गणना शुरू होने से पहले ही बाघ एक बाघ की गिनती कम हो गई। खास बात है कि इनमेें सर्वाधिक पांच बाघ/ तेंदुए बराही रेंज में कम हुए हैं।
पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से यहां बाघों की संख्या तो बढ़ी। साथ ही अपराधियों ने भी पैर पसारे हैं। समय समय पर बाघ की हत्या के मामले सामने आएं तो कई बाद विभिन्न घटनाओं में भी बाघ की जानें गई हैं। टाइगर रिजर्व बनने से पहले 24 और 25 मई 2012 को हरीपुर रेंज में घनाराघाट बीट में लगातार दो दिन बाघ के शव मिले थे। जिनकी जहर देकर हत्या की गई थी। इसके बाद पूरनपुर क्षेत्र में ही 12 जून को बाघ का शव मिला था। वर्ष 2013 की चार नवंबर को हरीपुर रेंज के कंपार्टमेंट 98बी में व 26 नवंबर को बराही रेंज के कंपार्टमेंट 79बी बाघ के शव पाए गए थे। इसके बाद टाइगर रिजर्व बनने के बाद पहली घटना 16 अक्तूबर 2014 को महोफ रेंज की फैजुल्लागंज बीट में बाघ का शव मिला था जो आपसी संघर्ष में मारा गया था। लगभग छह माह बाद बराही रेंज के निकट डगा गांव के पास हरदोई ब्रांच नहर में 23 अप्रैल 2015 को बाघ का शव मिला। इसके बाद वनविभाग ने कुछ शिकारी पकड़े थे जिन्होंने जनवरी 2016 में बराही रेंज में बाघ की हत्या करना स्वीकार किया था। माला रेंज में वनकटी के जंगल में तेंदुए का शव मिला था। जिसकी मौत का राज आज तक नहीं खुला। साल 2017 में 12 जुलाई को खुटार रेंज के निकट हरदोई ब्रांच में डूबने से बाघिन की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय बाद माला रेंज में ढहैना ताल के निकट दो शावकों के शव मिले थे। नौ मार्च को बराही रेंज के बाहर हरदोई ब्रांच नहर के निकट ही खाई में तेंदुए का शव मिला था। अब बृहस्पतिवार (29 मार्च) को बराही रेंज के निकट ही शारदा सागर डैम में बाघ का शव मिला है। इस तरह पिछले छह साल में कुल 11 बाघ कम हो चुके हैं जिसमें सर्वाधिक छह बराही रेंज में कम हुए हैं।
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छह साल में जा चुकी है नौ बाघ व दो तेंदुओं की जान
कभी जंगल तो बाहर मिलते हैं शव
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बाघ संरक्षण के लिए पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व का दर्जा दिया गया है। बाघों की जानकारी रखने के लिए समय समय पर बाघ गणना भी कराई जाती है। पहली अप्रैल से बाघ गणना शुरू होनी थी लेकिन गणना शुरू होने से पहले ही बाघ एक बाघ की गिनती कम हो गई। खास बात है कि इनमेें सर्वाधिक पांच बाघ/ तेंदुए बराही रेंज में कम हुए हैं।
पीलीभीत के जंगलों को टाइगर रिजर्व का दर्जा मिलने से यहां बाघों की संख्या तो बढ़ी। साथ ही अपराधियों ने भी पैर पसारे हैं। समय समय पर बाघ की हत्या के मामले सामने आएं तो कई बाद विभिन्न घटनाओं में भी बाघ की जानें गई हैं। टाइगर रिजर्व बनने से पहले 24 और 25 मई 2012 को हरीपुर रेंज में घनाराघाट बीट में लगातार दो दिन बाघ के शव मिले थे। जिनकी जहर देकर हत्या की गई थी। इसके बाद पूरनपुर क्षेत्र में ही 12 जून को बाघ का शव मिला था। वर्ष 2013 की चार नवंबर को हरीपुर रेंज के कंपार्टमेंट 98बी में व 26 नवंबर को बराही रेंज के कंपार्टमेंट 79बी बाघ के शव पाए गए थे। इसके बाद टाइगर रिजर्व बनने के बाद पहली घटना 16 अक्तूबर 2014 को महोफ रेंज की फैजुल्लागंज बीट में बाघ का शव मिला था जो आपसी संघर्ष में मारा गया था। लगभग छह माह बाद बराही रेंज के निकट डगा गांव के पास हरदोई ब्रांच नहर में 23 अप्रैल 2015 को बाघ का शव मिला। इसके बाद वनविभाग ने कुछ शिकारी पकड़े थे जिन्होंने जनवरी 2016 में बराही रेंज में बाघ की हत्या करना स्वीकार किया था। माला रेंज में वनकटी के जंगल में तेंदुए का शव मिला था। जिसकी मौत का राज आज तक नहीं खुला। साल 2017 में 12 जुलाई को खुटार रेंज के निकट हरदोई ब्रांच में डूबने से बाघिन की मौत हो गई थी। इसके कुछ समय बाद माला रेंज में ढहैना ताल के निकट दो शावकों के शव मिले थे। नौ मार्च को बराही रेंज के बाहर हरदोई ब्रांच नहर के निकट ही खाई में तेंदुए का शव मिला था। अब बृहस्पतिवार (29 मार्च) को बराही रेंज के निकट ही शारदा सागर डैम में बाघ का शव मिला है। इस तरह पिछले छह साल में कुल 11 बाघ कम हो चुके हैं जिसमें सर्वाधिक छह बराही रेंज में कम हुए हैं।
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