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डेंगू के डंक से निपटने को सेहत महकमा हुआ गंभीर
Updated Mon, 17 Jul 2017 05:34 PM IST
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डेंगू के डंक से निपटने के लिए बनाया गया संक्रामक वार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में गत वर्ष डेंगू से कोई मौत होना नहीं पाया गया। यह कागजी आंकड़ा लगभग हर साल ही सामने आता है, लेकिन संक्रामक रोगों के फैलने के दौरान हकीकत कुछ और ही होती है। इस बार डेंगू को लेकर शासन द्वारा की जा रही सख्ती के बाद जिले का स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर होता नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी में संक्रामक वार्ड बनाए जा चुके हैं। एंटी लार्वा के छिड़काव की तैयारी भी शुरू कर दी गयी है।
जिले में डेंगू लगभग हर साल ही कहर बरपाता है। सरकारी स्तर पर इसकी जांच आदि की कोई व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में मजबूरन शरण लेनी पड़ती है। जहां इलाज के नाम पर लोगों को गुमराह कर जमकर उनकी जेबें ढीली की जाती हैं। डेंगू को लेकर जब काफी हो-हल्ला शुरू होता है तो स्वास्थ्य विभाग चंद डेंगू के लक्षण वाले मरीजों का ब्लड सैंपल लेकर मामले की इतिश्री कर लेता है। गत वर्ष तो व्यापारियों ने भी डेंगू मामले में कोई कार्रवाई न होने पर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अपना रवैय्या नहीं बदला। जबकि गत वर्ष करीब दस से अधिक लोगों की मौत डेंगू से होना पाया गया। इधर कोर्ट द्वारा डेंगू मामले में हस्तक्षेप करने के बाद शासन ने सेहत महकमे को गंभीरता बरतने के आदेश दिए हैं। शासन की सख्ती का असर भी लगभग दिखने लगा है। डेंगू से निपटने को लेकर डीएम शीतल वर्मा की अध्यक्षता में बैठक कर इसकी रूपरेखा भी बनाई जा चुकी है। जिला अस्पताल से लेकर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू से निपटने की तैयारियां शुरू की जा चुकी है।
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़ों में गत वर्ष डेंगू से कोई मौत होना नहीं पाया गया। यह कागजी आंकड़ा लगभग हर साल ही सामने आता है, लेकिन संक्रामक रोगों के फैलने के दौरान हकीकत कुछ और ही होती है। इस बार डेंगू को लेकर शासन द्वारा की जा रही सख्ती के बाद जिले का स्वास्थ्य विभाग भी गंभीर होता नजर आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक जिला अस्पताल समेत सभी सीएचसी में संक्रामक वार्ड बनाए जा चुके हैं। एंटी लार्वा के छिड़काव की तैयारी भी शुरू कर दी गयी है।
जिले में डेंगू लगभग हर साल ही कहर बरपाता है। सरकारी स्तर पर इसकी जांच आदि की कोई व्यवस्था न होने के कारण मरीजों को प्राइवेट अस्पतालों में मजबूरन शरण लेनी पड़ती है। जहां इलाज के नाम पर लोगों को गुमराह कर जमकर उनकी जेबें ढीली की जाती हैं। डेंगू को लेकर जब काफी हो-हल्ला शुरू होता है तो स्वास्थ्य विभाग चंद डेंगू के लक्षण वाले मरीजों का ब्लड सैंपल लेकर मामले की इतिश्री कर लेता है। गत वर्ष तो व्यापारियों ने भी डेंगू मामले में कोई कार्रवाई न होने पर स्वास्थ्य विभाग के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया था, लेकिन स्वास्थ्य विभाग ने अपना रवैय्या नहीं बदला। जबकि गत वर्ष करीब दस से अधिक लोगों की मौत डेंगू से होना पाया गया। इधर कोर्ट द्वारा डेंगू मामले में हस्तक्षेप करने के बाद शासन ने सेहत महकमे को गंभीरता बरतने के आदेश दिए हैं। शासन की सख्ती का असर भी लगभग दिखने लगा है। डेंगू से निपटने को लेकर डीएम शीतल वर्मा की अध्यक्षता में बैठक कर इसकी रूपरेखा भी बनाई जा चुकी है। जिला अस्पताल से लेकर जिले के सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों में डेंगू से निपटने की तैयारियां शुरू की जा चुकी है।
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