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सरकार ने पूरा नहीं किया जमीन देने का वादा
Updated Thu, 26 Jul 2018 01:24 AM IST
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खेकड़ा (बागपत)।
खेकड़ा नगर के कारगिल शहीद राजेंद्र सिंह के पिता जय सिंह धामा ने कहा सरकार ने नौ बीघा जमीन देने का वादा किया, वह आज तक पूरा नहीं किया, पेंशन मिलने में भी अब तो परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहीद के नाम से बना द्वार क्षतिग्रस्त होने पर उन्होंने खुद के खर्च से बनवाया।
आठ जुलाई 1999 कारगिल युद्ध के जवान नगर निवासी राजेंद्र सिंह पुत्र मास्टर जयसिंह धामा का शव जब खेकड़ा नगर में पहुंचा तो खेकड़ा नगर भारत माता के जयकारे और शहीद राजेंद्र अमर रहे के नारों से गूंज उठा था। तत्कालीन अटल सरकार ने शहीद फंड के अलावा पेट्रोल पंप, पत्नी और माता पिता की पेंशन आदि तमाम राहत दीं। तत्कालीन विधायक रूप चौधरी ने नगर के प्रवेश पर कारगिल शहीद द्वार का निर्माण कराया। बड़ागांव मार्ग का नाम कारगिल शहीद राजेंद्र सिंह द्वार के नाम पर रखा गया। ऐसे समय में राजेंद्र धामा के परिजन पिता जय सिंह, माता शकुंतला देवी, पत्नी मुनेश व पुत्र हिमांशु सबने हिम्मत से काम लिया। शहादत के 13 साल बीतने के साथ साथ सरकार के वादे भी अधूरे रह गए। शहीद राजेंद्र सिंह के पिता जय सिंह धामा ने कहा सरकार ने तभी नौ बीघा जमीन देने का वायदा किया, जो आज तक पूरा नहीं किया। साथ ही उन्हें पेंशन मिलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार वह अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। पिछले दिनों अज्ञात वाहन ने बेटे की शहादत की याद में लगे शहीद द्वार को गिरा दिया था, उसका पुननिर्माण जब सरकार ने नहीं कराया तो उन्होंने खुद अपने खर्च पर कराया है। सरकार शहीद परिवारों को भूलकर बैठी है।
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खेकड़ा नगर के कारगिल शहीद राजेंद्र सिंह के पिता जय सिंह धामा ने कहा सरकार ने नौ बीघा जमीन देने का वादा किया, वह आज तक पूरा नहीं किया, पेंशन मिलने में भी अब तो परेशानी का सामना करना पड़ता है। शहीद के नाम से बना द्वार क्षतिग्रस्त होने पर उन्होंने खुद के खर्च से बनवाया।
आठ जुलाई 1999 कारगिल युद्ध के जवान नगर निवासी राजेंद्र सिंह पुत्र मास्टर जयसिंह धामा का शव जब खेकड़ा नगर में पहुंचा तो खेकड़ा नगर भारत माता के जयकारे और शहीद राजेंद्र अमर रहे के नारों से गूंज उठा था। तत्कालीन अटल सरकार ने शहीद फंड के अलावा पेट्रोल पंप, पत्नी और माता पिता की पेंशन आदि तमाम राहत दीं। तत्कालीन विधायक रूप चौधरी ने नगर के प्रवेश पर कारगिल शहीद द्वार का निर्माण कराया। बड़ागांव मार्ग का नाम कारगिल शहीद राजेंद्र सिंह द्वार के नाम पर रखा गया। ऐसे समय में राजेंद्र धामा के परिजन पिता जय सिंह, माता शकुंतला देवी, पत्नी मुनेश व पुत्र हिमांशु सबने हिम्मत से काम लिया। शहादत के 13 साल बीतने के साथ साथ सरकार के वादे भी अधूरे रह गए। शहीद राजेंद्र सिंह के पिता जय सिंह धामा ने कहा सरकार ने तभी नौ बीघा जमीन देने का वायदा किया, जो आज तक पूरा नहीं किया। साथ ही उन्हें पेंशन मिलने में भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार वह अधिकारियों के दफ्तरों के चक्कर लगाकर थक चुके हैं, लेकिन अभी तक उनकी कोई सुनवाई नहीं हो सकी। पिछले दिनों अज्ञात वाहन ने बेटे की शहादत की याद में लगे शहीद द्वार को गिरा दिया था, उसका पुननिर्माण जब सरकार ने नहीं कराया तो उन्होंने खुद अपने खर्च पर कराया है। सरकार शहीद परिवारों को भूलकर बैठी है।
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