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स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर बनीं 31 दुकानें अवैध घोषित

Wed, 01 Aug 2018 12:40 AM IST
Updated Wed, 01 Aug 2018 12:40 AM IST
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स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर बनीं 31 दुकानें अवैध घोषित
30पीबीटीपी- 28
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स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर बनीं 31 दुकानें अवैध घोषित
क्रासर...
स्वास्थ्य विभाग के पक्ष में आया फैसला, डीएम ने दिए धवस्तीकरण के आदेश
क्रासर...
तत्कालीन सपा सरकार में 54 लाख खर्च कर बनवाई गईं थी दुकानें
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। शहर के बीचो बीच स्थित बेशकीमती जमीन पर मालिकाना हक जताने वाले दो विभागों के बीच चल रही रस्साकसी पिछले दिनों स्वास्थ्य विभाग के पक्ष में फैसला आने के बाद भले ही खत्म हो गई है, लेकिन जिला पंचायत द्वारा नियमों को ताक पर रखकर बनाई गई 31 अवैध दुकानों को धवस्त कराना प्रशासन के लिए चुनौती साबित होता दिख रहा है जबकि सिटी मजिस्ट्रेट को दुकानों को धवस्त कराने के आदेश दिए जा चुके हैं।
सपा सरकार में तत्कालीन सरकार के कद्दावर मंत्री हाजी रियाज अहमद की बेटी रैकेया आरिफ जिला पंचायत अध्यक्ष थीं। उसी दौरान जिला पंचायत ने स्वास्थ्य विभाग की जमीन पर नियमों को ताक पर रखकर कांपलेक्स बनाने का प्रस्ताव पास कर लिया। जानकारी पर स्वास्थ्य विभाग ने जमीन पर अपना मालिकाना हक जताते हुए इसका विरोध किया लेकिन तब शासन प्रशासन में एक नहीं सुनी गई। जिला पंचायत ने आनन फानन में 54 लाख रुपये खर्च कर अवैध तरीके से 31 दुकानों का निर्माण करा दिया। उसी दौरान मामला संज्ञान में आने के बाद तत्कालीन जिला पंचायत सदस्य रमा गैरोला नें पहले जिला पंचायत के सदन में इसका विरोध किया लेकिन इसका कोई असर नहीं हुआ। इसके बाद रमा गैरोला ने हाईकोर्ट का सहारा लिया, जिसके बाद हाईकोर्ट ने याचिका परीक्षण करने के लिए शासन के पंचायती राज व स्वास्थ्य विभाग के प्रमुख सचिव को ममाले की जांच कर निस्तारण के निर्देश दिए। दोनों पक्षों की सुनवाई और जांच के बाद दस्तावेजों में जमीन स्वास्थ्य विभाग की निकली। इसके बाद पिछले दिनों डीएम डॉ. अखिलेश मिश्रा ने जिला पंचायत को नोटिस जारी करते हुए सिटी मजिस्टे्रट अर्चना द्विवेदी को दुकनों का धवस्तीरण कराने का निर्देश जारी कर दिए। खास बात यह है कि डीएम के बाद सिटी मजिस्ट्रेट की जांच में यह बात सामने आ गई है कि दुकानों का अवैध तरीके से निर्माण कराया गया है। उसका मानचित्र भी पास नहीं कराया गया है।
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तत्कालीन अधिकारियों पर गिर सकती गाज
जिला पंचायत ने नियमों को ताक पर रख 31 दुकानों के निर्माण पर 54 लाख रुपये खर्च किया। लिहाजा माना जा रहा है इस मामले में तत्कालीन अपर मुख्य अधिकारी जीके सिंह, एई हारुन अहमद और जेई सुमन पर भी गाज गिर सकती है।
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बढ़ी चिंता, कैसे होगी 54 लाख की रिकवरी
स्वास्थ्य और जिला पंचायत विभाग के बीच चल रही रस्साकसी मामले में समय रहते कोई निर्णय नहीं लिया गया और 54 लाख रुपये खर्च कर 31 दुकानों का निर्माण करा दिया गया। अब स्वास्थ्य विभाग के पक्ष में फैसला आने के बाद इन दुकानों को धवस्त तो प्रशासन करा देगा लेकिन जिला पंचायत से इस धनराशि की रिकवरी कैसे हो इस पर मंथन चल रहा है। दुकानों को धवस्त कराने के बाद भी अगर दुकानों का मलवा बेचा जाएगा तो भी विभाग इतनी बड़ी रिकवरी नहीं कर पाएगा।


30पीबीटीपी- 29
शासन स्तर पर हुई जांच में दस्तावेजों में जमीन स्वास्थ्य विभाग की निकली। जांच में सामने आया है कि अवैध तरीके से दुकानों का निर्माण कराया गया है। दुकानों का नक्शा भी स्वीकृत कराया जाना उचित नहीं समझा गया। जांच के बाद दुकानों को धवस्त कराने का आदेश हो गया है। 54 लाख की रिकवरी भी की जाएगी।
डॉ. अखिलेश मिश्रा, डीएम
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