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लापरवाही में जान गंवा रहे टीबी के मरीज
Updated Sun, 15 Jul 2018 07:20 PM IST
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नियमित कोर्स पूरा नहीं करना बताई एक वजह
पांच साल में 32 लोग गंवा चुका है जान
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। सरकार द्वारा टीबी रोग से पीड़ित मरीजों को तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं, हर महीने पांच सौ रुपये भी दिए जा रहे है, उसके बाद भी लापरवाही में टीबी बीमारी से पीड़ित मरीज जान गंवा रहे हैं। जान गवां देने वालों में अधिकांश ऐसे मरीज बताए गए हैं जिन्होंने नियमित तरीके से दवाई का कोर्स नहीं किया और बीच में ही उसे छोड़ दिया।
लोगों को टीबी बीमारी से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। समय-समय पर टीबी रोगियों को खोजने के लिए अभियान चलाया जाता है। सरकार टीबी मरीजों के खाते में हर माह पांच सौ रुपये भी भेज रही है। उसके बाद भी टीबी के लक्षण मिलने पर लोग इलाज से दूर भाग रहे है। यही वजह है कि हर साल इस गंभीर बीमारी से मरीजों को जान तक गंवानी पड़ती है। पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 32 लोग अपनी जान खो चुके है। इनमें अधिकांश को गंभीर टीबी थी। इलाज से पहले और इलाज के बाद उन्होंने सावधानी नहीं बरती। नियमित तरीके से चलने वाली दवाइयों को कोर्स भी पूरा नहीं किया। बीच में ही दवा खाना छोड़ दिया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट बताते है अब भी कई ऐसे मरीज से जिनका इलाज उनके यहां से चल रहा है। वह गंभीर टीबी से पीड़ित है। एक बार दवाई लेने के बाद दोबारा वह नहीं पहुंचे है। मरीजों के तीमारदारों से किसी तरह संपर्क किया जाता है। फिर भी इस बीमारी को लेकर परिवार वाले गंभीर नहीं दिखते।
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पांच साल में जान गंवाने वालों का आंकड़ा
2013-1
2014-6
2015-10
2016-7
2017-7
2018-1
000
15पीबीटीपी-32
वर्जन-
गंभीर टीबी का पता चलने पर मरीज को उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। नियमित तरीके से दवाई का कोर्स पूरा नहीं करने और दवाई छोड़ने पर पर मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। कई मामले ऐसे भी सामने आए है जिसमें खुद की लापरवाही के कारण मरीज को अपनी जान तक गंवानी पड़ गई।
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- डॉ. राजेश भट्ट, जिला क्षय रोग अधिकारी
पांच साल में 32 लोग गंवा चुका है जान
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। सरकार द्वारा टीबी रोग से पीड़ित मरीजों को तमाम सुविधाएं दी जा रही हैं, हर महीने पांच सौ रुपये भी दिए जा रहे है, उसके बाद भी लापरवाही में टीबी बीमारी से पीड़ित मरीज जान गंवा रहे हैं। जान गवां देने वालों में अधिकांश ऐसे मरीज बताए गए हैं जिन्होंने नियमित तरीके से दवाई का कोर्स नहीं किया और बीच में ही उसे छोड़ दिया।
लोगों को टीबी बीमारी से मुक्त करने के लिए केंद्र सरकार तमाम योजनाएं चला रही है। समय-समय पर टीबी रोगियों को खोजने के लिए अभियान चलाया जाता है। सरकार टीबी मरीजों के खाते में हर माह पांच सौ रुपये भी भेज रही है। उसके बाद भी टीबी के लक्षण मिलने पर लोग इलाज से दूर भाग रहे है। यही वजह है कि हर साल इस गंभीर बीमारी से मरीजों को जान तक गंवानी पड़ती है। पांच साल के आंकड़ों पर गौर करें तो अब तक 32 लोग अपनी जान खो चुके है। इनमें अधिकांश को गंभीर टीबी थी। इलाज से पहले और इलाज के बाद उन्होंने सावधानी नहीं बरती। नियमित तरीके से चलने वाली दवाइयों को कोर्स भी पूरा नहीं किया। बीच में ही दवा खाना छोड़ दिया। जिला क्षय रोग अधिकारी डॉ. राजेश भट्ट बताते है अब भी कई ऐसे मरीज से जिनका इलाज उनके यहां से चल रहा है। वह गंभीर टीबी से पीड़ित है। एक बार दवाई लेने के बाद दोबारा वह नहीं पहुंचे है। मरीजों के तीमारदारों से किसी तरह संपर्क किया जाता है। फिर भी इस बीमारी को लेकर परिवार वाले गंभीर नहीं दिखते।
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पांच साल में जान गंवाने वालों का आंकड़ा
2013-1
2014-6
2015-10
2016-7
2017-7
2018-1
000
15पीबीटीपी-32
वर्जन-
गंभीर टीबी का पता चलने पर मरीज को उसके बारे में विस्तार से जानकारी दी जाती है। नियमित तरीके से दवाई का कोर्स पूरा नहीं करने और दवाई छोड़ने पर पर मरीज की हालत बिगड़ने लगती है। कई मामले ऐसे भी सामने आए है जिसमें खुद की लापरवाही के कारण मरीज को अपनी जान तक गंवानी पड़ गई।
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- डॉ. राजेश भट्ट, जिला क्षय रोग अधिकारी