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सात दिन से जंगल के बाहर देखा जा रहा था बाघ, कहां था वन विभाग
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पीलीभीत। खेत पर फसल में भरे बारिश के पानी को निकालते समय किसान पर बाघ के हमले की हुई घटना में वन विभाग की लापरवाही उजागर हुई है। ग्रामीणों की माने तो सप्ताह भर पहले से जंगल से बाहर गांव की सीमा में बाघ की चहलकदमी देखी जा रही थी। वहीं ग्रामीणों का आरोप हैं कि सूचना के बाद भी वन विभाग की ओर से इस पर कोई अमल नहीं किया गया। ऐसे में ग्रामीण यह कहते दिखे कि अगर समय से वन विभाग सूचना पर अमल कर बाघ की चहलकदमी पर नजर रखता तो शायद यह घटना घटित नहीं होती।
जंगल से बाहर अमरिया तहसील क्षेत्र में वैसे तो लंबे समय से बाघ का कुनबा प्रवास किए हुए है। आबादी क्षेत्र के निकट खेतों में बाघ की चहलकदमी भी जारी रहती है। इधर न्यूरिया क्षेत्र के भरतपुर कालोनी की सीमा में हुए बाघ के हमले की घटना के बाद इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सप्ताहभर पूर्व से बाघ की चहलकदमी जंगल से बाहर देखी जा रही है। चार दिन पूर्व शाम के समय गांव की ओर वापस लौट रहे साइकि ल सवार मोती ने खेतों की ओर बाघ की चहलकदमी देखती तो इसकी सूचना वन विभाग को दी थी। इसके अलावा गांव का ही आशिक भी जंगल से बाहर बाघ को देख दहशतजदा हो गया था। आशिक की माने तो उसने भी मामले की सूचना वन विभाग को दी थी। इस सब के बाद भी वन विभाग सक्रिय नहीं हो सका।
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जंगल से बाहर अमरिया तहसील क्षेत्र में वैसे तो लंबे समय से बाघ का कुनबा प्रवास किए हुए है। आबादी क्षेत्र के निकट खेतों में बाघ की चहलकदमी भी जारी रहती है। इधर न्यूरिया क्षेत्र के भरतपुर कालोनी की सीमा में हुए बाघ के हमले की घटना के बाद इस बात का भी खुलासा हुआ है कि सप्ताहभर पूर्व से बाघ की चहलकदमी जंगल से बाहर देखी जा रही है। चार दिन पूर्व शाम के समय गांव की ओर वापस लौट रहे साइकि ल सवार मोती ने खेतों की ओर बाघ की चहलकदमी देखती तो इसकी सूचना वन विभाग को दी थी। इसके अलावा गांव का ही आशिक भी जंगल से बाहर बाघ को देख दहशतजदा हो गया था। आशिक की माने तो उसने भी मामले की सूचना वन विभाग को दी थी। इस सब के बाद भी वन विभाग सक्रिय नहीं हो सका।
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