{"_id":"5c40d045bdec22737a366c1e","slug":"11547751493-pilibhit-news","type":"story","status":"publish","title_hn":"सावधान! रैबीज की वैक्सीन के लिए दौड़ते रह जाओगे","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
सावधान! रैबीज की वैक्सीन के लिए दौड़ते रह जाओगे
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
सावधान! रैबीज की वैक्सीन के लिए दौड़ते रह जाओगे
पीलीभीत। यदि किसी को कुत्ते या बंदरों ने कांट लिया है, तो वह सरकारी अस्पताल के भरोसे ना रहे। क्योंकि जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन का टोटा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही से अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीज अस्पताल से या तो बिना टीका लगाए लौट रहे हैं या फिर वह बाहर से महंगे दाम पर वैक्सीन खरीदकर लगवा रहे हैं।
जिले में कुत्तों का आंतक छाया हुआ है। इसके रोकथाम को लेकर जिला और पालिका प्रशासन की ओर से कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई है। प्रतिदिन जिला अस्पताल में कुत्तों के काटने के 100 से अधिक मरीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां अधिकांश मरीजों को सिर्फ घाव देखकर दवाई लिखकर काम चलाया जा रहा है। बीस से तीस मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। वहीं जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन नहीं होने पर मरीजों को जिला अस्पताल तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। बीसलपुर से आए राजवीर ने बताया कि उनके बेटे को बुधवार शाम एक कुत्ते ने काट लिया। सीएचसी पर वैक्सीन नहीं होने पर उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां भी वैक्सीन नहीं मिली। सुनगढ़ी के रामनरेश ने वैक्सीन न मिलने पर बाहर से वैक्सीन खरीदने की बात कही। वहीं न्यूरिया से आए महेश को सीएचसी के बाद जिला अस्पताल में भी वैक्सीन नहीं मिलने पर निराशा हाथ लगी। हैरत की बात ये है कि अधिकृत कंपनी से वैक्सीन की सप्लाई न होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग लोकल खरीद करने को तैयार नहीं है। जबकि, हर साल करोड़ों रुपये की लोकल खरीद होती है। इस बाबत सीएमएस डॉ. रतनपाल सिंह सुमन का कहना है कि एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए शासन स्तर पर पत्र लिखने के साथ ही कई बार सीएमओ को भी अवगत करा दिया है। बावजूद वैक्सीन का स्टॉक नहीं भेजा गया है।
विज्ञापन
पीलीभीत। यदि किसी को कुत्ते या बंदरों ने कांट लिया है, तो वह सरकारी अस्पताल के भरोसे ना रहे। क्योंकि जिला अस्पताल समेत सभी स्वास्थ्य केंद्रों पर एंटी रैबीज वैक्सीन का टोटा है। स्वास्थ्य विभाग के अफसरों की लापरवाही से अस्पताल पहुंचने वाले अधिकांश मरीजों को परेशानी उठानी पड़ रही है। मरीज अस्पताल से या तो बिना टीका लगाए लौट रहे हैं या फिर वह बाहर से महंगे दाम पर वैक्सीन खरीदकर लगवा रहे हैं।
जिले में कुत्तों का आंतक छाया हुआ है। इसके रोकथाम को लेकर जिला और पालिका प्रशासन की ओर से कोई ठोस रणनीति नहीं बनाई गई है। प्रतिदिन जिला अस्पताल में कुत्तों के काटने के 100 से अधिक मरीज वैक्सीन लगवाने अस्पताल पहुंच रहे हैं। लेकिन यहां अधिकांश मरीजों को सिर्फ घाव देखकर दवाई लिखकर काम चलाया जा रहा है। बीस से तीस मरीजों को वापस लौटना पड़ता है। वहीं जिले के प्राथमिक और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों पर वैक्सीन नहीं होने पर मरीजों को जिला अस्पताल तक की दौड़ लगानी पड़ रही है। बीसलपुर से आए राजवीर ने बताया कि उनके बेटे को बुधवार शाम एक कुत्ते ने काट लिया। सीएचसी पर वैक्सीन नहीं होने पर उसे जिला अस्पताल भेज दिया गया। यहां भी वैक्सीन नहीं मिली। सुनगढ़ी के रामनरेश ने वैक्सीन न मिलने पर बाहर से वैक्सीन खरीदने की बात कही। वहीं न्यूरिया से आए महेश को सीएचसी के बाद जिला अस्पताल में भी वैक्सीन नहीं मिलने पर निराशा हाथ लगी। हैरत की बात ये है कि अधिकृत कंपनी से वैक्सीन की सप्लाई न होने के बावजूद स्वास्थ्य विभाग लोकल खरीद करने को तैयार नहीं है। जबकि, हर साल करोड़ों रुपये की लोकल खरीद होती है। इस बाबत सीएमएस डॉ. रतनपाल सिंह सुमन का कहना है कि एंटी रैबीज वैक्सीन के लिए शासन स्तर पर पत्र लिखने के साथ ही कई बार सीएमओ को भी अवगत करा दिया है। बावजूद वैक्सीन का स्टॉक नहीं भेजा गया है।
विज्ञापन