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बारिश के बाद डेंगू का खतरा, स्वास्थ्य विभाग ने जारी किया अलर्ट
Updated Sat, 08 Sep 2018 12:00 AM IST
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बारिश के बाद डेंगू का खतरा, अलर्ट जारी
जिला अस्पताल में स्थापित किया डेंगू वार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बुखार से होने वाली मौतों व डेंगू के मरीज आसपास के जिलों में सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि अभी तक जिले में डेंगू का कोई भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। सभी चिकित्सा अधिकारियों को डेंगू को लेकर सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। वहीं जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड भी स्थापित किया गया है। इस वार्ड में सिर्फ डेंगू से पीड़ित लोगों का ही उपचार होगा।
मंडल के शाहजहांपुर, बदायूं व बरेली में डेंगू बुखार से कई लोगों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। शासन स्तर पर इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। अफसरों पर शिकंजा कसा जा रहा है। वहीं अब सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने भी इसको लेकर जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। सभी प्राइवेट अस्पतालों व जिल के सभी बीएमओ को निर्देश दिए हैं कि जिस व्यक्ति में डेंगू के लक्षण दिखें उसे तुरंत जिला अस्पताल रेफर करें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में 10 बेड का डेंगू वार्ड स्थापित किया गया है। इस विशेष वार्ड में डेंगू पीड़ित मरीज ही भर्ती होंगे। डेंगू बीमारी को देखते हुए मच्छरों से बचने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव व फागिंग कराने के निर्देश दिए हैं।
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रिकार्ड में तीन साल में नहीं मिला एक भी मरीज, प्राइवेट में भरमार
जिला अस्पताल के सरकारी आंकड़ों की बात करें तो पिछले तीन साल में एक भी डेंगू का मरीज भर्ती नहीं हुआ और न ही किसी को डेंगू की पुष्टि हुई। जबकि वास्तविकता में स्थिति बिल्कुल उलट है। सरकारी स्तर पर डेंगू का बेहतर इलाज न होने के कारण हर साल 50 से 100 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती होते है। इनमें भी अधिकांश को बरेली रेफर कर दिया जाता है। वहीं कुछ मरीज डेंगू होने की आशंका के चलते सीधे महानगरों के अस्पतालों का रुख करते हैं। इधर, इस साल अभी तक जिले में डेंगू का कोई भी मरीज प्रकाश में नहीं आया है।
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ऐसे होता है डेंगू
जिला मलेरिया अधिकारी डीआर सिंह ने बताया कि डेंगू की बीमारी एडीज एजेप्टी मच्छर के काटने से होती है। डेंगू का वायरस प्लेटलेट्स कम कर देता है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही रहता है और दिन में काटता है। डेंगू की पुष्टि के लिए मरीज का ब्लड सैंपल लखनऊ स्थित लैब में भेजा जाता है।
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यह बरतें सावधानियां
-कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें।
-पानी में एक-दो चम्मच मिट्टी का तेल व डीजल डाल दे।
-पुराने टायरों व कंटेनरों को खुला न छोड़ें।
-टंकियों को ढक कर व बर्तनों को उल्टा करके रखें।
-आसपास व छतों पर पानी न जमा होनें दें।
- ऐसे कपड़े पहने, इससे अधिकतम शरीर ढका रहे।
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एहतियात बरतने के दिए निर्देश
सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि विभाग डेंगू को लेकर पूरी तरह सतर्क है। 36 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही 34 कैंप अब तक लगाए जा चुके हैं। चार विशेष कैंप हाल में लगाए गए थे। नगरपालिका व नगर पंचायत में फागिंग कराने के साथ एंटी लार्वा स्प्रे करने को कहा गया है। एमओआईसी, बीएमओ और जिले के अस्पतालों को भी डेंगू को लेकर एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।
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बारिश के बाद डेंगू का खतरा, अलर्ट जारी
जिला अस्पताल में स्थापित किया डेंगू वार्ड
अमर उजाला ब्यूरो
पीलीभीत। बुखार से होने वाली मौतों व डेंगू के मरीज आसपास के जिलों में सामने आने के बाद स्वास्थ्य विभाग ने अलर्ट जारी कर दिया है। हालांकि अभी तक जिले में डेंगू का कोई भी मरीज भर्ती नहीं हुआ है। सभी चिकित्सा अधिकारियों को डेंगू को लेकर सतर्क रहने की हिदायत दी गई है। वहीं जिला अस्पताल में डेंगू के मरीजों के लिए अलग से वार्ड भी स्थापित किया गया है। इस वार्ड में सिर्फ डेंगू से पीड़ित लोगों का ही उपचार होगा।
मंडल के शाहजहांपुर, बदायूं व बरेली में डेंगू बुखार से कई लोगों की मौत के मामले सामने आ चुके हैं। शासन स्तर पर इसकी मॉनीटरिंग की जा रही है। अफसरों पर शिकंजा कसा जा रहा है। वहीं अब सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने भी इसको लेकर जिले में अलर्ट जारी कर दिया है। सभी प्राइवेट अस्पतालों व जिल के सभी बीएमओ को निर्देश दिए हैं कि जिस व्यक्ति में डेंगू के लक्षण दिखें उसे तुरंत जिला अस्पताल रेफर करें। स्वास्थ्य विभाग द्वारा जिला अस्पताल में 10 बेड का डेंगू वार्ड स्थापित किया गया है। इस विशेष वार्ड में डेंगू पीड़ित मरीज ही भर्ती होंगे। डेंगू बीमारी को देखते हुए मच्छरों से बचने के लिए एंटी लार्वा का छिड़काव व फागिंग कराने के निर्देश दिए हैं।
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रिकार्ड में तीन साल में नहीं मिला एक भी मरीज, प्राइवेट में भरमार
जिला अस्पताल के सरकारी आंकड़ों की बात करें तो पिछले तीन साल में एक भी डेंगू का मरीज भर्ती नहीं हुआ और न ही किसी को डेंगू की पुष्टि हुई। जबकि वास्तविकता में स्थिति बिल्कुल उलट है। सरकारी स्तर पर डेंगू का बेहतर इलाज न होने के कारण हर साल 50 से 100 मरीज निजी अस्पतालों में भर्ती होते है। इनमें भी अधिकांश को बरेली रेफर कर दिया जाता है। वहीं कुछ मरीज डेंगू होने की आशंका के चलते सीधे महानगरों के अस्पतालों का रुख करते हैं। इधर, इस साल अभी तक जिले में डेंगू का कोई भी मरीज प्रकाश में नहीं आया है।
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ऐसे होता है डेंगू
जिला मलेरिया अधिकारी डीआर सिंह ने बताया कि डेंगू की बीमारी एडीज एजेप्टी मच्छर के काटने से होती है। डेंगू का वायरस प्लेटलेट्स कम कर देता है। डेंगू का मच्छर साफ पानी में ही रहता है और दिन में काटता है। डेंगू की पुष्टि के लिए मरीज का ब्लड सैंपल लखनऊ स्थित लैब में भेजा जाता है।
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यह बरतें सावधानियां
-कूलर का पानी नियमित रूप से बदलें।
-पानी में एक-दो चम्मच मिट्टी का तेल व डीजल डाल दे।
-पुराने टायरों व कंटेनरों को खुला न छोड़ें।
-टंकियों को ढक कर व बर्तनों को उल्टा करके रखें।
-आसपास व छतों पर पानी न जमा होनें दें।
- ऐसे कपड़े पहने, इससे अधिकतम शरीर ढका रहे।
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एहतियात बरतने के दिए निर्देश
सीएमओ डॉ. सीमा अग्रवाल ने बताया कि विभाग डेंगू को लेकर पूरी तरह सतर्क है। 36 बाढ़ चौकियां बनाई गई हैं। इसके साथ ही 34 कैंप अब तक लगाए जा चुके हैं। चार विशेष कैंप हाल में लगाए गए थे। नगरपालिका व नगर पंचायत में फागिंग कराने के साथ एंटी लार्वा स्प्रे करने को कहा गया है। एमओआईसी, बीएमओ और जिले के अस्पतालों को भी डेंगू को लेकर एहतियात बरतने के निर्देश दिए गए हैं।