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जंगल से बाहर आ रहे बाघ, नहीं हुई तार फेसिंग
Updated Sat, 02 Dec 2017 12:07 AM IST
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गत वर्ष बाघ हमले में गई थी कई जाने
पीलीभीत/जराकोठी। जंगल से सटे क्षेत्रों में बाघ एवं वन्यजीवों को बाहर आने से रोकने के लिए तार फेंसिंग की घोषणाएं की गई थी। विधायक और सांसद निधि के अलावा शासन से भी बजट जारी हो गया है, लेकिन अब तक तार फेंसिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। इससे बाघ एवं अन्य पशु जंगल से बाहर आ रहे हैं। खेतों में बाघ दिखने से किसानों में दहशत है और उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
जंगल से सटे खेतों में ठंड का सीजन शुरू होते ही बाघ सहित कई वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ जाती है। चूंकि इस समय गन्ने की कटाई और गेहूूं की बुआई युद्धस्तर पर चल रही है, ऐसे में बाघों के खेतों में आने से दिक्कत आ रही है। गत वर्ष इन दिनों में ही बाघ के हमले शुरू हुए थे, जिसमें पूरे साल मे 20 लोग की जानें गई थी। लगातार हुए हमलों के बाद जंगल की तार फेंसिंग कराने की मांग ने जोर पकड़ा था। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए विधायकों और संासद ने निधि से 25 लाख रुपया दिया था। साथ ही एनटीसीए 1.50 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई थी, लेकिन अब तक तार फेंसिंग कार्य शुरू नहीं हुआ है। हालांकि कुछ संपन्न किसानों ने खेतों की सुरक्षा के लिए स्वयं के खर्चे पर तार फेंसिंग करा ली है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को दिक्कत हो रही है। 26 नवंबर से गजरौला क्षेत्र के पौरखास गांव निवासी कुलवंत सिंह के फार्म हाउस एक बाघिन दो शावकों से साथ घूमती देखी जा रही है वहीं बुधवार को माधोटाडा क्षेत्र के अर्जुनपुर और गुलाबटांडा के निकट खेतों में भी बाघ देखे गए। यदि समय रहते तार फेंसिंग नहीं कराई जाती तो खेती प्रभावित होने के साथ ही किसी ग्रामीण की जान भी जा सकती है। इस बाबत जानकारी करने पर डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि ई-टेंडरिंग के चलते तार फेंसिंग में देरी हुई है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है जल्द काम शुरू कराया जाएगा।
ड्यूनीडाम के निकट खैरवन में मिले बाघ के पगचिह्न
पीलीभीत। वन विभाग की निगरानी टीम ने बृहस्पतिवार को सुबह अमरिया क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान ड्यूनी डाम क्षेत्र के खैरवन में देवहा नदी के किनारे बाघ के पगचिह्न देखे गए हैं। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर सर्तक रहने की अपील की है। इसके अलावा वन विभाग की टीम ने मग्गर सिंह फार्म, दरोगा फार्म, भिकारीपुर, जगदीशपुर, अड़ौली, पंसौली, सुस्वार आदि ग्रामों में भी गश्त की लेकिन कहीं कोई पगचिह्न नहीं मिले।
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पीलीभीत/जराकोठी। जंगल से सटे क्षेत्रों में बाघ एवं वन्यजीवों को बाहर आने से रोकने के लिए तार फेंसिंग की घोषणाएं की गई थी। विधायक और सांसद निधि के अलावा शासन से भी बजट जारी हो गया है, लेकिन अब तक तार फेंसिंग का काम शुरू नहीं हुआ है। इससे बाघ एवं अन्य पशु जंगल से बाहर आ रहे हैं। खेतों में बाघ दिखने से किसानों में दहशत है और उनकी खेती प्रभावित हो रही है।
जंगल से सटे खेतों में ठंड का सीजन शुरू होते ही बाघ सहित कई वन्यजीवों की आवाजाही बढ़ जाती है। चूंकि इस समय गन्ने की कटाई और गेहूूं की बुआई युद्धस्तर पर चल रही है, ऐसे में बाघों के खेतों में आने से दिक्कत आ रही है। गत वर्ष इन दिनों में ही बाघ के हमले शुरू हुए थे, जिसमें पूरे साल मे 20 लोग की जानें गई थी। लगातार हुए हमलों के बाद जंगल की तार फेंसिंग कराने की मांग ने जोर पकड़ा था। बढ़ते जनाक्रोश को देखते हुए विधायकों और संासद ने निधि से 25 लाख रुपया दिया था। साथ ही एनटीसीए 1.50 करोड़ की धनराशि प्राप्त हुई थी, लेकिन अब तक तार फेंसिंग कार्य शुरू नहीं हुआ है। हालांकि कुछ संपन्न किसानों ने खेतों की सुरक्षा के लिए स्वयं के खर्चे पर तार फेंसिंग करा ली है, लेकिन आर्थिक रूप से कमजोर किसानों को दिक्कत हो रही है। 26 नवंबर से गजरौला क्षेत्र के पौरखास गांव निवासी कुलवंत सिंह के फार्म हाउस एक बाघिन दो शावकों से साथ घूमती देखी जा रही है वहीं बुधवार को माधोटाडा क्षेत्र के अर्जुनपुर और गुलाबटांडा के निकट खेतों में भी बाघ देखे गए। यदि समय रहते तार फेंसिंग नहीं कराई जाती तो खेती प्रभावित होने के साथ ही किसी ग्रामीण की जान भी जा सकती है। इस बाबत जानकारी करने पर डीएफओ कैलाश प्रकाश ने बताया कि ई-टेंडरिंग के चलते तार फेंसिंग में देरी हुई है। टेंडर प्रक्रिया चल रही है जल्द काम शुरू कराया जाएगा।
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ड्यूनीडाम के निकट खैरवन में मिले बाघ के पगचिह्न
पीलीभीत। वन विभाग की निगरानी टीम ने बृहस्पतिवार को सुबह अमरिया क्षेत्र का भ्रमण किया। इस दौरान ड्यूनी डाम क्षेत्र के खैरवन में देवहा नदी के किनारे बाघ के पगचिह्न देखे गए हैं। वन विभाग की टीम ने ग्रामीणों के साथ बैठक कर सर्तक रहने की अपील की है। इसके अलावा वन विभाग की टीम ने मग्गर सिंह फार्म, दरोगा फार्म, भिकारीपुर, जगदीशपुर, अड़ौली, पंसौली, सुस्वार आदि ग्रामों में भी गश्त की लेकिन कहीं कोई पगचिह्न नहीं मिले।
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