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कागजों में चल रहा टाइगर सर्च अभियान
Updated Mon, 09 Oct 2017 11:51 PM IST
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पीलीभीत। बेहरी क्षेत्र में खूनी बाघ को पकड़ने का अभियान लगभग ठप पड़ चुका है। पिछले करीब एक माह से खूनी बाघ की लोकेशन नहीं मिली है और वह क्षेत्र से जा चुका है। अभियान से जुड़े विशेषज्ञ भी जा चुके हैं इसके बाद भी कागजों में अभियान अभी भी जारी है। लेकिन अधिकारी कागजों में अभियान चलाने की लकीर अभी भी पीट रहे हैं।
वनकटी के जंगल से जुलाई माह में निकले बाघ ने देवहा नदी पार करते हुए बेहरी और हिमकनपुर गांव के निकट तीन किसानों की जान ले ली थी। 7, 8 व 9 अगस्त को लगातार हुई इन घटनाओं के बाद बाघ को मानव के लिए खतरा मानते हुए पकड़ने के निर्देश शासन से जारी किए थे। इसके बाद वन विभाग के साथ विशेषज्ञों की टीमों को चार हाथियों व एक बंद ट्रैक्टर उपलब्ध कराकर सर्च अभियान शुरू किया गया था। 14 अगस्त से शुरू हुए अभियान में लगातार टीमों ने क्षेत्र में पहुंचकर बाघ की तलाश की लेकिन भारी भरकर टीम को धता बताकर बाघ सितंबर के पहले सप्ताह में ही वहां से निकल गया। पांच सितंबर के बाद से खूनी बाघ के कोई पंजे नहीं मिले हैं और न ही उसकी कोई फोटो कैमरों में कैद हुई है। इसके चलते अभियान धीरे धीरे ठप पड़ने लगा। हालांकि इस बीच करीब 15 दिन पूर्व अमरिया क्षेत्र का एक बाघ चहलकदमी करता हुआ इस क्षेत्र में पहुंचा। इसकी पहचान होने के बाद वन विभाग ने उसे वापस जाने दिया। खूनी बाघ के चले जाने के बाद लखनऊ, दिल्ली एवं अन्य स्थानों से आए विशेषज्ञ वापस चले गए। साथ ही हाथियों व बंद ट्रैक्टर को भी क्षेत्र से हटा दिया गया। अब नाम के लिए कुछ वनकर्मी सुबह शाम क्षेत्र में जाकर सर्च अभियान की औपचारिकता निभा रहे हैं। सर्च अभियान अब हकीकत से ज्यादा अभिलेखों में चल रहा है। इस बाबत जानकारी करने पर डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि रविवार को माधोपुर, सुस्वार, हिमकरपुर, जगदीशपुर, भिकारीपुर, पिंजरा वमनपुरी, नगरिया कालोनी में टीमों की गश्त कराई गई। बाघ भले ही नहीं मिल रहा है ग्रामीणों को एलर्ट रहने की अपील की जा रही है।
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वनकटी के जंगल से जुलाई माह में निकले बाघ ने देवहा नदी पार करते हुए बेहरी और हिमकनपुर गांव के निकट तीन किसानों की जान ले ली थी। 7, 8 व 9 अगस्त को लगातार हुई इन घटनाओं के बाद बाघ को मानव के लिए खतरा मानते हुए पकड़ने के निर्देश शासन से जारी किए थे। इसके बाद वन विभाग के साथ विशेषज्ञों की टीमों को चार हाथियों व एक बंद ट्रैक्टर उपलब्ध कराकर सर्च अभियान शुरू किया गया था। 14 अगस्त से शुरू हुए अभियान में लगातार टीमों ने क्षेत्र में पहुंचकर बाघ की तलाश की लेकिन भारी भरकर टीम को धता बताकर बाघ सितंबर के पहले सप्ताह में ही वहां से निकल गया। पांच सितंबर के बाद से खूनी बाघ के कोई पंजे नहीं मिले हैं और न ही उसकी कोई फोटो कैमरों में कैद हुई है। इसके चलते अभियान धीरे धीरे ठप पड़ने लगा। हालांकि इस बीच करीब 15 दिन पूर्व अमरिया क्षेत्र का एक बाघ चहलकदमी करता हुआ इस क्षेत्र में पहुंचा। इसकी पहचान होने के बाद वन विभाग ने उसे वापस जाने दिया। खूनी बाघ के चले जाने के बाद लखनऊ, दिल्ली एवं अन्य स्थानों से आए विशेषज्ञ वापस चले गए। साथ ही हाथियों व बंद ट्रैक्टर को भी क्षेत्र से हटा दिया गया। अब नाम के लिए कुछ वनकर्मी सुबह शाम क्षेत्र में जाकर सर्च अभियान की औपचारिकता निभा रहे हैं। सर्च अभियान अब हकीकत से ज्यादा अभिलेखों में चल रहा है। इस बाबत जानकारी करने पर डीएफओ आदर्श कुमार ने बताया कि रविवार को माधोपुर, सुस्वार, हिमकरपुर, जगदीशपुर, भिकारीपुर, पिंजरा वमनपुरी, नगरिया कालोनी में टीमों की गश्त कराई गई। बाघ भले ही नहीं मिल रहा है ग्रामीणों को एलर्ट रहने की अपील की जा रही है।
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