देवबंद (सहारनपुर)। सीएए के विरोध में मुत्तहिदा ख्वातीन कमेटी के बैनर तले चल रहे धरना प्रदर्शन के 39वें दिन आंदोलनकारी महिलाओं ने दो टूक कहा कि मुसलमान पैदाइशी हिंदुस्तानी होने के साथ साथ बाई च्वाइस इंडियन भी है। 1947 में हमारे बुजुर्गों ने अपनों को छोड़ दिया, लेकिन हिंदुस्तान की सरजमीं को नहीं छोड़ा। अफसोस की बात है कि आज हमसे हमारी नागरिकता पूछी जा रही है।
ईदगाह मैदान में देवबंद सत्याग्रह के नाम से चल रहे सीएए विरोधी धरना प्रदर्शन में बृहस्पतिवार को अरशी अंसारी व सायमा ने संयुक्त रूप से कहा कि हम बाई चांस नहीं बल्कि बाई च्वाइस इंडियन हैं। 70 साल के बाद हमसे हमारी नागरिकता पूछी जा रही है, जो कानून और मोहब्बत के खिलाफ है। निदा इरशाद और सूफिया जिया ने कहा कि हमारे बुजुर्गों ने कुर्बानी देकर अंग्रेजों की गुलामी से मुल्क को आजाद कराया और अब हम खास विचारधारा से देश को दोबारा आजाद कराने की लड़ाई लड़ रहे हैं। इसके लिए चाहे कोई भी कुर्बानी क्यों न देनी पड़े। अकसा परवीन ने कहा कि केंद्र सरकार के गलत फैसलों के खिलाफ पूरे देश में लोग सड़कों पर उतर कर आंदोलन कर रहे हैं, लेकिन सरकार जान बूझकर जनता की आवाज को सुनना नहीं चाहती। उन्होंने कहा कि यह आवाजें उस वक्त तक बुलंद होती रहेंगी जब तक सरकार अपनी गलती मानकर काले कानून को वापस न ले ले। धरनास्थल पर पहुंची कुछ स्कूली छात्रों ने देशभक्ति गीत प्रस्तुत किए। जिन्हें सुनकर ईदगाह मैदान हिंदुस्तान जिंदाबाद और इंकलाब जिंदाबाद के नारों से गूंज उठा।