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श्रमिकों की साइकिल व रेहड़े होने लगे कबाड़

Sat, 13 Jun 2020 11:30 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sat, 13 Jun 2020 11:30 PM IST
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Workers' bicycles and ravages started getting junk
जानसठ के कवाल के कालेज में लावारिस हालत में खड़ी श्रमिकों की साइकिल। - फोटो : KHATAULI
श्रमिकों की साइकिल और रेहड़े होने लगे कबाड़
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जानसठ (मुजफ्फरनगर)। प्रवासी श्रमिक तो मुसीबत उठाते हुए किसी तरह से अपने घर तक पहुंच गए हैं, लेकिन उनकी साइकिल और रेहड़े लावारिस हालत में खड़े हैैं। अब श्रमिकों के ये वाहन कबाड़ में तब्दील होने लगे हैं। प्रशासन की ओर से श्रमिकों की साइकिल व रेहड़ों को उनके घर भेजवाने की अभी तक कोई व्यवस्था नहीं की गई है। श्रमिक भी इनको लेने नहीं आए हैं। अगर एक माह तक और साइकिल व रेहड़े इसी तरह से खड़े रहे तो, ये चलाने लायक नहीं रहेंगे।
वैश्विक कोरोना महामारी के फैलने और देशव्यापी लॉकडाउन लगने पर दूसरे प्रदेशों में मजदूरी करने वाले श्रमिकों को फैक्टरी मालिकों ने निकाल दिया था। ट्रेन और रोडवेज डिपो की बसें बंद होने से श्रमिक पैदल ही अपने घर जाने के लिए निकल पड़े थे। इनमें से अधिकांश श्रमिक दो-दो हजार रुपये में साइकिल और रेहड़े खरीद कर अपने घर जाने की व्यवस्था की। बाद में सरकार ने श्रमिकों को उनके घर भिजवाने की व्यवस्था करते हुए बसों का प्रबंध किया था। शासन के आदेश पर प्रशासन ने साइकिल व रेहड़े से जाने वाले श्रमिकों को क्वारंटीन करते हुए उनको स्कूल कालेजों में रखकर उनके स्वास्थ्य की जांच कराई थी। पुलिस प्रशासन ने श्रमिकों को बसों से भेजकर उनकी साइकिल व रेहड़े नहीं भेजे थे। गांव कवाल के राजकीय कन्या इंटर कालेज में 100 से अधिक श्रमिकों की साइकिल और दो रेहड़े खड़े हैं। पुलिस प्रशासन ने उस वक्त श्रमिकों से कहा था कि वे अभी भी आकर अपनी साइकिल व रेहड़े ले जाएं। एक माह से अधिक का समय बीत जाने के बाद भी अभी श्रमिक अपनी साइकिल व रेहड़े नहीं लेने आए हैं। कालेज में लावारिस हालत में साइकिल व रेहड़े खड़े होने से कबाड़ में तब्दील होने लगे हैं।
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धूप में टायर खराब होने लगे
कवाल के कॉलेज में 100 से अधिक लावारिस हालत में खड़ी साइकिल व रेहड़े के टायर धूप में खराब होने लगे हैं। पुलिस प्रशासन की ओर से इनको अलग जगह पर खड़ी करने की व्यवस्था भी नहीं की गई है। इस संबंध में कवाल पुलिस चौकी प्रभारी राजकुमार शर्मा का कहना है कि श्रमिकों की साइकिल व रेहड़े का पूरा रिकॉर्ड दर्ज है। उन श्रमिकों का नाम व पता भी दर्ज है। श्रमिक कभी भी आकर अपनी साइकिल व रेहड़े ले जा सकते हैं। जिन श्रमिकों की साइकिल व रेहड़े हैं, उनको ही दिए जाएंगे।
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