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Muzaffarnagar News: स्वदेशी मेले में मोरना की खड्डी पर तैयार गर्म परिधान बने ग्राहकों की पसंद
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मुजफ्फरनगर। स्वदेशी मेले में मोरना की स्वयं सहायता समूह की महिलाओं के द्वारा परंपरागत तरीके से खड्डी पर तैयार गर्म परिधान शहर के ग्राहकों को पसंद आ रहे हैं। भेड़ की ऊन के रेशे से बनने वाली लोई और जैकेट के एक एक धागे को खड्डी की सहायता और हाथों से बुना गया है। यह वजन में काफी हल्के, मुलायम और गर्म हैं।
मां जगदंबा स्वयं सहायता समूह की संस्थापक सीमा ने बताया कि उनके ससुराल में पहले खड्डी का काम किया जाता था। बाजार में जैसे जैसे मशीन से बने कपड़े आने लगे तो खड्डी से कपड़ा तैयार करने का काम भी खतम होता गया। कताई का काम बंद होने से भेड़ की ऊन का धागा भी मिलना मुश्किल हो गया। पुरखों की इस परंपरागत कला को खोने से बचाने के लिए वर्ष 2016 में स्वयं सहायता समूह बनाकर हस्तकला को बचाने की कोशिश की।
स्टॉल पर काम में सहयोग कर रहे पति सुनील ने बताया कि अब भेड़ की ऊन का धागा पानीपत से बनकर आता है। इसलिए इस काम में लागत ज्यादा लगती है लेकिन आज भी इस लोई की गर्माहट की तुलना मशीन के माल से नहीं की जा सकती है। भेड़ की ऊन से बनी लोई गर्म और आरामदायक तो होती है। इसके साथ ही यह फफूंदी रोधी और आग प्रतिरोधी भी होती है। उन्होंने बताया कि गांव की अन्य महिलाएं भी इस काम से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। प्रदेश भर में होने वाली प्रदर्शनी में उनकी कला को सराहना और प्रोत्साहन मिलता है।े
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मां जगदंबा स्वयं सहायता समूह की संस्थापक सीमा ने बताया कि उनके ससुराल में पहले खड्डी का काम किया जाता था। बाजार में जैसे जैसे मशीन से बने कपड़े आने लगे तो खड्डी से कपड़ा तैयार करने का काम भी खतम होता गया। कताई का काम बंद होने से भेड़ की ऊन का धागा भी मिलना मुश्किल हो गया। पुरखों की इस परंपरागत कला को खोने से बचाने के लिए वर्ष 2016 में स्वयं सहायता समूह बनाकर हस्तकला को बचाने की कोशिश की।
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स्टॉल पर काम में सहयोग कर रहे पति सुनील ने बताया कि अब भेड़ की ऊन का धागा पानीपत से बनकर आता है। इसलिए इस काम में लागत ज्यादा लगती है लेकिन आज भी इस लोई की गर्माहट की तुलना मशीन के माल से नहीं की जा सकती है। भेड़ की ऊन से बनी लोई गर्म और आरामदायक तो होती है। इसके साथ ही यह फफूंदी रोधी और आग प्रतिरोधी भी होती है। उन्होंने बताया कि गांव की अन्य महिलाएं भी इस काम से जुड़कर आत्मनिर्भर बनी हैं। प्रदेश भर में होने वाली प्रदर्शनी में उनकी कला को सराहना और प्रोत्साहन मिलता है।े
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