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Muzaffarnagar News: वाहनों का आवागमन बंद, बिजनौर आने-जाने में करनी पड़ रही जेब ढीली
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मुजफ्फरनगर। बिजनौर-मुजफ्फरनगर जनपद की सीमा गंगा बैराज क्षेत्र में सड़क पर बारिश का पानी आ जाने व गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण बिजनौर जाने व आने वाले वाहनों का आवागमन बंद कर दिया गया है। इससे दैनिक यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। जेब भी ढीली करनी पड़ रही है। बिजनौर से मीरापुर स्थित स्कूलों में आने वाले शिक्षकों व छात्रों को स्कूल पहुंचने में एक घंटा ज्यादा लग रहा है।
बिजनौर प्रशासन ने वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया है। बिजनौर जाने वाली रोडवेज बस वाया मेरठ, गजरौला व चांदपुर होकर बिजनौर पहुंच रही हैं, जिस कारण यात्रियों को आर्थिक मार पड़ रही है। पहुंचने में भी कई घंटे ज्यादा लग रहे हैं। जो लोग मीरापुर से बैराज तक किसी तरह पहुंच कर छोटे वाहनों से बिजनौर से आना-जाना कर रहे हैं उन्हें ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
मनमानी कर रहे ई-रिक्शा व बाइक चालक
दैनिक यात्रियों ने बताया कि बैराज के निकट बिजनौर क्षेत्र में कुछ लोग सड़क पर भरे पानी व वाहनों के आवागमन बंद होने का फायदा उठा रहे है। वह अपनी ई-रिक्शा व बाइक पर बैठाकर एक यात्री को बिजनौर छोड़ते हैं। इसके लिए 50 से 100 रुपये तक वसूली की जा रही है।
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इन्होंने कहा-
मीरापुर के मोहल्ला गंगाभवन निवासी लोकेश शर्मा ने बताया कि वह धूपबत्ती की मार्केटिग करते हैं। उन्हें बिजनौर रोजाना जाना होता है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण बिजनौर क्षेत्र में बैराज से आगे पानी सड़क पर आ गया था, जिस कारण वाहनों का आवागमन बंद है। उन्हें आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वह किसी तरह गंगा बैराज तक पहुंचते हैं। वहां पुल पार करने के बाद बिजनौर जाने के लिए साधन देखना पड़ता है। कुछ ई-रिक्शा व बाइक लेकर युवक मौजूद रहते हैं, जो एक व्यक्ति से 50 से सौ रुपये वसूलते है। मीरापुर से बैराज तक पहुंचने में भी पचास से सौ रुपये तक खर्च करने पड़ रहे है।
बिजनौर निवासी शिखर शिक्षा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य पुनीत राजपूत ने बताया कि दस शिक्षकों सहित वह रोजाना स्कूल आते हैं। भारी वाहनों का आवागमन बैराज पुल से बंद होने के कारण वे बेहद परेशान हैं। एक वाहन से वह बैराज तक पहुंचते हैं। दूसरे वाहन में सवार होकर स्कूल पहुंचते हैं, उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
बिजनौर निवासी तारीक खान का कहना है कि वह मीरापुर के ज्ञान स्थली स्कूल में पढ़ाते हैं। वह रोजाना आते हैं। स्कूल में एक दर्जन शिक्षक व पांच बच्चे भी आते हैं। वह पहले बिजनौर से स्कूल बस में गंगा बैराज पहुंचते हैं। पुल को पैदल पार कर इधर आकर स्कूल की दूसरी बस खड़ी मिलती है। उससे सभी स्कूल पहुंचते है। सभी को स्कूल पहुंचने में एक घंटा अतिरिक्त लगता है।
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बिजनौर प्रशासन ने वाहनों के आवागमन पर प्रतिबंध लगाया है। बिजनौर जाने वाली रोडवेज बस वाया मेरठ, गजरौला व चांदपुर होकर बिजनौर पहुंच रही हैं, जिस कारण यात्रियों को आर्थिक मार पड़ रही है। पहुंचने में भी कई घंटे ज्यादा लग रहे हैं। जो लोग मीरापुर से बैराज तक किसी तरह पहुंच कर छोटे वाहनों से बिजनौर से आना-जाना कर रहे हैं उन्हें ज्यादा जेब ढीली करनी पड़ रही है।
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मनमानी कर रहे ई-रिक्शा व बाइक चालक
दैनिक यात्रियों ने बताया कि बैराज के निकट बिजनौर क्षेत्र में कुछ लोग सड़क पर भरे पानी व वाहनों के आवागमन बंद होने का फायदा उठा रहे है। वह अपनी ई-रिक्शा व बाइक पर बैठाकर एक यात्री को बिजनौर छोड़ते हैं। इसके लिए 50 से 100 रुपये तक वसूली की जा रही है।
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इन्होंने कहा-
मीरापुर के मोहल्ला गंगाभवन निवासी लोकेश शर्मा ने बताया कि वह धूपबत्ती की मार्केटिग करते हैं। उन्हें बिजनौर रोजाना जाना होता है। गंगा का जलस्तर बढ़ने के कारण बिजनौर क्षेत्र में बैराज से आगे पानी सड़क पर आ गया था, जिस कारण वाहनों का आवागमन बंद है। उन्हें आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वह किसी तरह गंगा बैराज तक पहुंचते हैं। वहां पुल पार करने के बाद बिजनौर जाने के लिए साधन देखना पड़ता है। कुछ ई-रिक्शा व बाइक लेकर युवक मौजूद रहते हैं, जो एक व्यक्ति से 50 से सौ रुपये वसूलते है। मीरापुर से बैराज तक पहुंचने में भी पचास से सौ रुपये तक खर्च करने पड़ रहे है।
बिजनौर निवासी शिखर शिक्षा सीनियर सेकेंडरी स्कूल के प्रधानाचार्य पुनीत राजपूत ने बताया कि दस शिक्षकों सहित वह रोजाना स्कूल आते हैं। भारी वाहनों का आवागमन बैराज पुल से बंद होने के कारण वे बेहद परेशान हैं। एक वाहन से वह बैराज तक पहुंचते हैं। दूसरे वाहन में सवार होकर स्कूल पहुंचते हैं, उन पर आर्थिक बोझ बढ़ा है।
बिजनौर निवासी तारीक खान का कहना है कि वह मीरापुर के ज्ञान स्थली स्कूल में पढ़ाते हैं। वह रोजाना आते हैं। स्कूल में एक दर्जन शिक्षक व पांच बच्चे भी आते हैं। वह पहले बिजनौर से स्कूल बस में गंगा बैराज पहुंचते हैं। पुल को पैदल पार कर इधर आकर स्कूल की दूसरी बस खड़ी मिलती है। उससे सभी स्कूल पहुंचते है। सभी को स्कूल पहुंचने में एक घंटा अतिरिक्त लगता है।