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Hindi News ›   Uttar Pradesh ›   Muzaffarnagar News ›   UP Election 2022: The candidate of the Brahmin community has not won in 45 years in Muzaffarnagar

चुनावी किस्सा: 45 साल से खाली हाथ खड़ा ब्राह्मण समाज, नहीं मिली जीत, पढ़िए क्यों खास है इस सीट का इतिहास

Wed, 19 Jan 2022 07:08 PM IST
कपिल kapil मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर
मदन बालियान, अमर उजाला, मुजफ्फरनगर Published by: कपिल kapil Updated Wed, 19 Jan 2022 07:08 PM IST
सार

मुजफ्फरनगर जिले में एक चुनावी किस्सा ऐसा भी है। यहां पिछले 45 साल से ब्राह्मण समाज खाली हाथ खड़ा है। इस बार भी उम्मीद पर पानी फिर गया। पढ़िए जिले की दिलचस्प चुनावी कहानी।

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UP Election 2022: The candidate of the Brahmin community has not won in 45 years in Muzaffarnagar
मतदाता। - फोटो : amar ujala

विस्तार

सियासत में चाणक्य की पहचान रखने वाले ब्राह्मण पिछले 45 साल से राजनीति में खाली हाथ खड़े हैं। आखिरी बार 1977 में जनता पार्टी के टिकट पर मालती शर्मा विधानसभा पहुंचीं थीं। इसके बाद बातें तो खूब हुईं। टिकट के लिए लखनऊ और दिल्ली की दौड़ भी लगी। चुनाव भी लड़े गए, लेकिन विधानसभा में मुजफ्फरनगर जिले से ब्राह्मण समाज का प्रतिनिधित्व नहीं रहा। हर बार वजह अलग रही। इस बार आचार संहिता लगने से पहले प्रदेश भर में ब्राह्मण समाज को प्रमुखता दिए जाने की बातें सभी राजनीतिक दलों की ओर से चलीं, लेकिन टिकट बंटवारे में समाज फिर खाली हाथ नजर आया। परिसीमन में वोटों का अलग-अलग विधानसभा में वोटों का बंटवारा भी एक वजह रहा। मालती शर्मा को भाजपा ने 1996 में राज्यसभा सदस्य बनाया था। इससे पहले उत्तर प्रदेश की रामनरेश यादव सरकार में वह शिक्षा राज्यमंत्री बनाई गईं थीं। स्थापना के बाद से ही वह भाजपा के साथ जुड़ी रहीं।

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इस तरह विधानसभा पहुंचे त्यागी समाज के प्रतिनिधि
साल                    सीट                           विधायक
1952        मुजफ्फरनगर पश्चिमी          राजेंद्र दत्त त्यागी
1957        खतौली                             राजेंद्र दत्त त्यागी
1962        खतौली                             शुगनचंद त्यागी
1967        मोरना                               राजेंद्र दत्त त्यागी
1969        मोरना                               धर्मवीर त्यागी
1980        खतौली                              धर्मवीर त्यागी

लोकसभा में खाता खुलते ही हो गया बंद
लोकसभा में भी ब्राह्मण समाज के प्रत्याशी सिर्फ एक बार ही जीते। 1952 में हरिद्वार-मुजफ्फरनगर लोकसभा सीट से हीरा वल्लभ त्रिपाठी सांसद चुने गए थे। उनके बाद कोई ब्राह्मण सांसद नहीं बना। वह कनखल के रहने वाले थे।

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जिलाध्यक्ष पद पर इनकी है ताजपोशी
वर्तमान में भाजपा जिलाध्यक्ष विजय शुक्ला, कांग्रेस जिलाध्यक्ष सुबोध शर्मा और भाकियू जिलाध्यक्ष योगेश शर्मा ही ब्राह्मण चेहरे बनाए गए हैं।

लंबे समय से समाजवादी चेहरा हैं प्रमोद त्यागी
समाजवादी पार्टी में लंबे समय से प्रमोद त्यागी सक्रिय हैं। वर्तमान में जिलाध्यक्ष हैं। सपा के टिकट पर वह विधानसभा चुनाव भी लड़ चुके हैं। इसके अलावा वह जिला बार संघ के कई बार अध्यक्ष रहे। एडवोकेट राजेश्वर दत्त त्यागी जिला बार संघ के लंबे समय तक अध्यक्ष रहे।

पालिका चेयरमैन रहे सुभाष चंद शर्मा
भाजपा नेता सुभाष चंद शर्मा पालिका मुजफ्फरनगर के एक दिसंबर 1995 से 2000 तक चेयरमैन रहे। वह लंबे समय से भाजपा का ब्राह्मण चेहरा हैं। सहारनपुर और मेरठ मंडल में चुनाव का कार्य देख चुके हैं। लंबा राजनीतिक अनुभव है।

 

टिकट की दौड़ हार गए राकेश शर्मा
ब्राह्मण समाज को एकजुट कर टिकट के लिए ताकत झोंकने वाले सपा नेता राकेश शर्मा भी टिकट की दौड़ हार गए। सपा ने उन्हें टिकट नहीं दिया, रालोद से पूर्व मंत्री चित्तरंजन स्वरूप के बेटे सौरभ उर्फ बंटी टिकट हासिल करने में कामयाब रहे।

यह भी लड़ चुके हैं चुनाव
बसपा के टिकट पर अरविंद राज शर्मा सदर विधानसभा का चुनाव लड़ चुके हैं। इसके बाद वह भाजपा के सिंबल पर शहर पालिक का चुनाव लड़े, लेकिन हार गए। कांग्रेस नेता सुबोध शर्मा भी चुनाव मैदान में उतर चुके हैं।

1984 में सांसद बन गए थे धर्मवीर त्यागी
त्यागी समाज के वरिष्ठ नेताओं में शामिल रहे धर्मवीर त्यागी कांग्रेस इंदिरा के टिकट पर 1984 में सांसद बने थे। उन्होंने नजदीकी अंतर से लोकदल के टिकट पर चुनाव लड़े नारायण सिंह को हरा दिया था।

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