Muzaffarnagar Election Seat Result 2022: आज फिर भाजपा और गठबंधन के उम्मीदवारों में कांटे का मुकाबला
मुजफ्फरनगर की सभी छह सीटों का इतिहास काफी दिलचस्प है। वहीं इस बार भी भाजपा और गठबंधन के प्रत्याशियों के बीच कांटे का मुकाबला है। जानिए अब तक हर सीट का इतिहास क्या रहा है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
उत्तर प्रदेश के मुजफ्फरनगर जिले की सभी छह विधानसभाओं का दिलचस्प इतिहास है। यहां हर चुनाव में ज्यादातर सीटों पर प्रत्याशियों के बीच कांटे की होती है। वहीं इस बार भी भाजपा और गठबंधन के उम्मीदवारों में बड़ा मुकाबला माना जा रहा है।
आज सुबह आठ बजे से मतगणना शुरू हो जाएगी। अब यह देखना काफी दिलचस्प होगा कि आज कौन किसे मात देकर विजय हासिल करता है। वैसे शहर की ज्यादतर सीटों पर भाजपा और सपा-रालोद गठबंधन के प्रत्याशियों में कांटे की टक्कर है।
ये भी पढ़ें- विधानसभा चुनाव के हर नतीजे से रूबरू होने के लिए इस लिंक पर करें क्लिक
मुजफ्फरनगर सीट का इतिहास
सदर सीट पर मुख्य रूप से भाजपा और सपा के बीच टक्कर रही है। वर्तमान में कौशल विकास राज्यमंत्री कपिल देव अग्रवाल यहां से विधायक हैं। कांग्रेस की चारु शीला 1985 में यहां से विधायक चुनी गई थी, इसके बाद कांग्रेस सीट नहीं जीत सकी। 1989 में जनता दल से सोमांश प्रकाश, 1991 और 1993 में भाजपा के सुरेश संगल, 1996 में भाजपा की सुशीला देवी, 2002 में सपा के टिकट पर चितरंजन स्वरूप, 2007 में भाजपा के अशोक कंसल, 2012 में सपा के चितरंजन स्वरूप जीते। चितरंजन स्वरूप के निधन के बाद उपचुनाव में भाजपा के कपिल देव अग्रवाल और 2017 में भी कपिल देव अग्रवाल चुनाव जीते।
कुल मतदाता--346253
पुरुष--185295
महिला--160925
अन्य--33
खतौली सीट का इतिहास
1967 में खतौली विधानसभा से सीपीआई के सरदार सिंह विधायक चुने गए थे। इसके बाद बीकेडी के टिकट पर वीरेंद्र वर्मा, 1974 में लक्ष्ण सिंह, 1980 में कांग्रेस इदिरा से धर्मवीर सिंह, 1985 में लोकदल से हरेंद्र सिंह, 1989 में जनता दल से धर्मवीर बालियान, 1991 व 1993 मेें भाजपा के टिकट पर सुधीर बालियान, बीकेडी के टिकट 1996 और रालोद के टिकट पर 2002 में राजपाल बालियान, 2007 में बसपा के योगराज सिंह और 2012 में रालोद के करतार भड़ाना और 2012 में भाजपा के विक्रम सैनी विधायक चुने गए थे।
कुल मतदाता--312662
पुरुष--166989
महिला--145659
अन्य--14
मीरापुर सीट का इतिहास
परिसीमन के बाद 2012 में मीरापुर विधानसभा सीट बनाई गई। इससे पहले मोरना के नाम से सीट थी। 2012 में बसपा के जमील अहमद कासमी विधायक चुने गए थे। वर्तमान में यहां से भाजपा के अवतार भड़ाना विधायक हैं।
कुल मतदाता--307553
पुरुष--163848
महिला--143693
अन्य--12
पुरकाजी सुरक्षित सीट का इतिहास
चरथावल सीट का आरक्षण खत्म कर 2012 में पुरकाजी सुरक्षित सीट बनाई है। पहले चुनाव में बसपा के अनिल कुमार विधायक चुने गए थे। वर्तमान में भाजपा के प्रमोद ऊटवाल विधायक हैं।
कुल मतदाता--323378
पुरुष--174748
महिला--148592
अन्य--38
चरथावल सीट का इतिहास
वर्ष 1967 के चुनाव में चरथावल सुरक्षित सीट बनाई गई थी। यहां से पहले विधायक हरीश चंद चुने गए। 1969 में बीकेडी के नैन सिंह और 1974 में नंदराम विधानसभा पहुंचे थे। यहां 1980 में कांग्रेस इंदिरा के रामप्रसाद ने जीत हासिल की। 1985 में कांग्रेस के फूल सिंह जीते। 1989 और 1991 में जनता दल के जीएस विनोद ने परचम लहराया। 1993 व 1996 में भाजपा का खाता खुला और रणधीर सिंह जीते। 2002 में समाजवादी पार्टी की उमाकिरण, 2007 में बसपा के अनिल कुमार और 2012 में बसपा के नूरसलीम राना ने चुनाव जीता। 2017 में बसपा की जीत का रथ रोकते हुए भाजपा के विजय कश्यप ने चुनाव जीता।
कुल मतदाता--325092
पुरुष--175722
महिला--149351
अन्य--19
बुढ़ाना सीट का इतिहास
परिसीमन के बाद 2012 में बुढ़ाना सीट बनीं थी। इस सीट पर 2012 में सपा के टिकट पर पूर्व सांसद अमीर आलम खान के बेटे नवाजिश आलम खान विधायक चुने गए थे। 2017 में यहां से भाजपा के उमेश मलिक विधायक चुने गए।
कुल मतदाता--367175
पुरुष--199349
महिला--167820
अन्य--06
ये भी पढ़ें- विधानसभा चुनाव के हर नतीजे से रूबरू होने के लिए इस लिंक पर करें क्लिक