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हाईवे के ढाबे पर 190 रुपये के दो पराठे, सेंट्रल एक्साइज से शिकायत, जांच शुरू
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Sat, 25 Nov 2017 11:44 PM IST
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ढाबों पर भोजन का स्वाद चखना है तो जेब में मोटी रकम रखनी पड़ेगी। ढाबों पर मिलने वाली वस्तुओं पर कोई लगाम नहीं है। खतौली के शेरे-ए-पंजाब ढाबे पर यात्री को आलू के दो पराठे 190 रुपये के दिए गए हैं। मामला उत्तराखंड परिवहन तक पहुंचा और उसके बाद सेंट्रल एक्साइज तक गया। अब ढाबे खिलाफ जीएसटी के साथ फर्जी बिल बनाकर यात्रियों से अधिक रुपये लेने की जांच बैठाई गई है।
मामला 17 सितंबर का है। उत्तराखंड निवासी संजय भट्ट यूके परिवहन की बस (संख्या यूके 07 ए 3245) में दिल्ली से देहरादून जा रहे थे। 17 सितंबर की रात्रि करीब दस बजे उत्तराखंड की बस खतौली में शेरे-ए-पंजाब ढाबे पर रुकी। बस परिचालक रामबाबू ने आधा घंटा का स्टॉपेज बताकर यात्रियों को जल-पान करने के लिए कहा।
इस पर बस में सवार संजय भट्ट ने ढाबा पर खाने का मूल्य मालूम किया, लेकिन बाद में उन्होंने दो आलू के पराठे खाए। ढाबा संचालक ने जो बिल दिया है, उसमें 190 रुपये के दो पराठे दर्शाए गए। खास यह है कि बिल में ग्राहक के नाम-पते के साथ जीएसटी अंकित नहीं थी। इस पर संजय ने शिकायत की तो जबरन 190 रुपये लिए गए। संजय ने उत्तराखंड परिवहन निगम को शिकायत दी। जिसके बाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज) को भी शिकायत दी गई।
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मेरठ मंडल कार्यालय से शनिवार को मुजफ्फरनगर के डिवीजन प्रथम (जीएसटी) कार्यालय को जांच सौंपी गई है। इस पर विभागीय अधिकारियों ने तत्काल पीड़ित संजय से फोन पर वार्ता कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब केंद्रीय उत्पात शुल्क के अधिकारी ढाबे की जांच करेंगे।
ढाबे पर खाने का मीनू क्या है और उसके रेट किस स्तर के हैं। इसके साथ ही ढाबे ने जीएसटी लिया है या नहीं, क्योंकि बिना उत्पाद शुल्क जमा कराए ढाबे का संचालन वैध नहीं है। सेंट्रल एक्साइज विभाग के जांचकर्ता इंद्रसेन ने बताया कि मामले की जांच करने के निर्देश मिले हैं। चुनाव के बाद इस प्रकरण की जांच की जाएगी।
परिवहन का होता है ढाबों से अनुबंध
मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड और यूपी रोडवेज का हाईवे और कसबों के भीतर पड़ने वाले ढाबों, होटलों से अनुबंध होता है। इन ढाबों, होटलों पर कुछ समय के लिए बसों को रोकना होता है। अधिकांश यह बसें लंबी दूरी की होती हैं।
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मामला 17 सितंबर का है। उत्तराखंड निवासी संजय भट्ट यूके परिवहन की बस (संख्या यूके 07 ए 3245) में दिल्ली से देहरादून जा रहे थे। 17 सितंबर की रात्रि करीब दस बजे उत्तराखंड की बस खतौली में शेरे-ए-पंजाब ढाबे पर रुकी। बस परिचालक रामबाबू ने आधा घंटा का स्टॉपेज बताकर यात्रियों को जल-पान करने के लिए कहा।
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इस पर बस में सवार संजय भट्ट ने ढाबा पर खाने का मूल्य मालूम किया, लेकिन बाद में उन्होंने दो आलू के पराठे खाए। ढाबा संचालक ने जो बिल दिया है, उसमें 190 रुपये के दो पराठे दर्शाए गए। खास यह है कि बिल में ग्राहक के नाम-पते के साथ जीएसटी अंकित नहीं थी। इस पर संजय ने शिकायत की तो जबरन 190 रुपये लिए गए। संजय ने उत्तराखंड परिवहन निगम को शिकायत दी। जिसके बाद केंद्रीय उत्पाद शुल्क (सेंट्रल एक्साइज) को भी शिकायत दी गई।
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मेरठ मंडल कार्यालय से शनिवार को मुजफ्फरनगर के डिवीजन प्रथम (जीएसटी) कार्यालय को जांच सौंपी गई है। इस पर विभागीय अधिकारियों ने तत्काल पीड़ित संजय से फोन पर वार्ता कर मामले की जांच शुरू कर दी है। अब केंद्रीय उत्पात शुल्क के अधिकारी ढाबे की जांच करेंगे।
ढाबे पर खाने का मीनू क्या है और उसके रेट किस स्तर के हैं। इसके साथ ही ढाबे ने जीएसटी लिया है या नहीं, क्योंकि बिना उत्पाद शुल्क जमा कराए ढाबे का संचालन वैध नहीं है। सेंट्रल एक्साइज विभाग के जांचकर्ता इंद्रसेन ने बताया कि मामले की जांच करने के निर्देश मिले हैं। चुनाव के बाद इस प्रकरण की जांच की जाएगी।
परिवहन का होता है ढाबों से अनुबंध
मुजफ्फरनगर। उत्तराखंड और यूपी रोडवेज का हाईवे और कसबों के भीतर पड़ने वाले ढाबों, होटलों से अनुबंध होता है। इन ढाबों, होटलों पर कुछ समय के लिए बसों को रोकना होता है। अधिकांश यह बसें लंबी दूरी की होती हैं।