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जिले में डिप्थीरिया के कहर से दो बच्चों की मौत, रिपोर्ट आने के इंतजार में बैठा है स्वास्थ्य विभाग
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Fri, 18 Aug 2017 12:57 AM IST
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अस्पताल में भर्ती बच्चे।
- फोटो : अमर उजाला
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टीकाकरण पर लाखों रुपये का बजट स्वाहा होने के बाद भी गलघोटू (डिप्थीरिया) ने कहर बरपाना शुरू कर दिया है। गलघोंटू मासूम बच्चों की जिंदगी का गला घोंट रहा है। जिले में स्वाइन फ्लू से अलग भी कई जानलेवा बीमारियों की चपेट में घिरा बचपन जिंदगी के वेंटिलेटर पर है। डिप्थीरिया से अब तक दो बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि तीन मासूम इसकी गिरफ्त में हैं।
डिप्थीरिया (गलघोंटू) भी उन आठ बीमारियों में एक है, जिनका हर बुधवार और शनिवार को टीकाकरण होता है। मासूम बच्चों में पनपने वाली यह बीमारी अब बढ़ती उम्र के बच्चों को भी जकड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग मिशन इंद्रधनुष के तहत डिप्थीरिया, बलगम, टिटनेस, पोलियो, तपेदिक, खसरा और हेपेटाइटिस-बी की रोकथाम के लिए टीके लगा रहा है। हर वर्ष लाखों रुपये अभियान और टीकाकरण पर वहन होने के बाद भी जानलेवा बीमारियों के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं।
जिले में टीकाकरण चलने के दौरान ही दो मासूमों को डिप्थीरिया अपना शिकार बना चुका है। इस बीमारी से खतौली निवासी शाहनजर का सात साल का बेटा असद और शहर की रहमत कालोनी निवासी फैज (3) पुत्र फाजिल की मृत्यु हो चुकी है। इनके अलावा भी निस्कत (11) पुत्री फाजिल, चरथावल की साजिया (12 वर्ष) पुत्री यासीन और खतौली के राकेश सैनी की बेटी वंशिका का दिल्ली के महर्षि बाल्मीकि अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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दो मासूमों की मौत होने के बाद स्वास्थ्य दिल्ली के अस्पताल से रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा भी जिले में पैर पसार चुके स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। बीते एक माह में चार मौत स्वाइन फ्लू से हो चुकी है। टीकाकरण के प्रभारी एवं एसीएमओ डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि डिप्थीरिया बीमारी से दो बच्चों की मौत होने की बात सामने आई है, लेकिन अभी उन्हें जिला या दिल्ली के अस्पताल से रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। टीकाकरण अभियान जारी है, रिस्की क्षेत्रों में कार्यक्रम तेज किया गया है।
ऐसे फैलता है डिप्थीरिया
मुजफ्फरनगर। कोराइनीबेक्टेरियम डिप्थीरी द्वारा डिप्थीरिया होता है। हवा के माध्यम से इसके कण सांस, गले में उतर जाते हैं। साथ ही व्यक्तिगत उपयोग की दूषित वस्तुएं और घरेलू दूषित वस्तुओं के जरिये भी बच्चों में संक्रमण होता है। इसका सीधा हमला गले में होता है, जिससे सांस लेने तकलीफ होती है।
यह जानलेवा बीमारी के लक्षण
मुजफ्फरनगर। उच्च तापमान वाला बुखार, गले में खराश, बैठी हुई आवाज (गहरा और भारी स्वर), कंपकंपी, गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां, थकावट, निगलने के दौरान दर्द, नाक से द्रव बहना के साथ गले में टॉन्सिल्स का बढना आदि बीमारी के लक्षण हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने किया मरीजों का परीक्षण
खतौली। नगर में स्वाइन फ्लू से दो साल के बच्चे समेत दो लोगों की मौत हो चुकी है। डिप्टी सीएमओ डॉ. वीके सिंह टीम के साथ वायरल से पीड़ित मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। स्वास्थ्य परीक्षण में अन्य किसी बुखार से पीड़ित मरीज को स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हो सकी। टीम ने बुखार से पीड़ित मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी वितरित की।
मोहल्ला सराफान के स्वाइन फ्लू से पीड़ित अंकुर वर्मा की 15 अगस्त को दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। एक सप्ताह पूर्व मोहल्ला लाल मोहम्मद निवासी अल्ताफ उर्फ टोनी के दो साल के बेटे उमेर की भी स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी।
बृहस्पतिवार को डिप्टी सीएमओ डॉ. वीके सिंह, डॉ. रोहित, डॉ. मोहम्मद मियां आदि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मोहल्ला सराफान और मोहल्ला लाल मोहम्मद में पहुंचे। टीम ने दोनों मोहल्लों में बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच की। जांच में किसी को भी स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि नहीं हुई। टीम ने मोहल्लों में मुनादी भी कराई और स्वाइन फ्लू से बचने के लिए अपने घरों के आसपास गंदा पानी इकट्ठा नहीं होने देने और सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया।
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डिप्थीरिया (गलघोंटू) भी उन आठ बीमारियों में एक है, जिनका हर बुधवार और शनिवार को टीकाकरण होता है। मासूम बच्चों में पनपने वाली यह बीमारी अब बढ़ती उम्र के बच्चों को भी जकड़ रही है। स्वास्थ्य विभाग मिशन इंद्रधनुष के तहत डिप्थीरिया, बलगम, टिटनेस, पोलियो, तपेदिक, खसरा और हेपेटाइटिस-बी की रोकथाम के लिए टीके लगा रहा है। हर वर्ष लाखों रुपये अभियान और टीकाकरण पर वहन होने के बाद भी जानलेवा बीमारियों के बादल छंटने का नाम नहीं ले रहे हैं।
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जिले में टीकाकरण चलने के दौरान ही दो मासूमों को डिप्थीरिया अपना शिकार बना चुका है। इस बीमारी से खतौली निवासी शाहनजर का सात साल का बेटा असद और शहर की रहमत कालोनी निवासी फैज (3) पुत्र फाजिल की मृत्यु हो चुकी है। इनके अलावा भी निस्कत (11) पुत्री फाजिल, चरथावल की साजिया (12 वर्ष) पुत्री यासीन और खतौली के राकेश सैनी की बेटी वंशिका का दिल्ली के महर्षि बाल्मीकि अस्पताल में उपचार चल रहा है।
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दो मासूमों की मौत होने के बाद स्वास्थ्य दिल्ली के अस्पताल से रिपोर्ट आने का इंतजार कर रहा है। इसके अलावा भी जिले में पैर पसार चुके स्वाइन फ्लू का कहर जारी है। बीते एक माह में चार मौत स्वाइन फ्लू से हो चुकी है। टीकाकरण के प्रभारी एवं एसीएमओ डॉ एसके अग्रवाल ने बताया कि डिप्थीरिया बीमारी से दो बच्चों की मौत होने की बात सामने आई है, लेकिन अभी उन्हें जिला या दिल्ली के अस्पताल से रिपोर्ट नहीं मिली है। रिपोर्ट आने के बाद ही कुछ कहा जा सकता है। टीकाकरण अभियान जारी है, रिस्की क्षेत्रों में कार्यक्रम तेज किया गया है।
ऐसे फैलता है डिप्थीरिया
मुजफ्फरनगर। कोराइनीबेक्टेरियम डिप्थीरी द्वारा डिप्थीरिया होता है। हवा के माध्यम से इसके कण सांस, गले में उतर जाते हैं। साथ ही व्यक्तिगत उपयोग की दूषित वस्तुएं और घरेलू दूषित वस्तुओं के जरिये भी बच्चों में संक्रमण होता है। इसका सीधा हमला गले में होता है, जिससे सांस लेने तकलीफ होती है।
यह जानलेवा बीमारी के लक्षण
मुजफ्फरनगर। उच्च तापमान वाला बुखार, गले में खराश, बैठी हुई आवाज (गहरा और भारी स्वर), कंपकंपी, गर्दन में सूजी हुई ग्रंथियां, थकावट, निगलने के दौरान दर्द, नाक से द्रव बहना के साथ गले में टॉन्सिल्स का बढना आदि बीमारी के लक्षण हैं।
स्वास्थ्य विभाग ने किया मरीजों का परीक्षण
खतौली। नगर में स्वाइन फ्लू से दो साल के बच्चे समेत दो लोगों की मौत हो चुकी है। डिप्टी सीएमओ डॉ. वीके सिंह टीम के साथ वायरल से पीड़ित मरीजों का स्वास्थ्य परीक्षण किया। स्वास्थ्य परीक्षण में अन्य किसी बुखार से पीड़ित मरीज को स्वाइन फ्लू की पुष्टि नहीं हो सकी। टीम ने बुखार से पीड़ित मरीजों को निशुल्क दवाइयां भी वितरित की।
मोहल्ला सराफान के स्वाइन फ्लू से पीड़ित अंकुर वर्मा की 15 अगस्त को दिल्ली में उपचार के दौरान मौत हो गई थी। एक सप्ताह पूर्व मोहल्ला लाल मोहम्मद निवासी अल्ताफ उर्फ टोनी के दो साल के बेटे उमेर की भी स्वाइन फ्लू से मौत हो गई थी।
बृहस्पतिवार को डिप्टी सीएमओ डॉ. वीके सिंह, डॉ. रोहित, डॉ. मोहम्मद मियां आदि स्वास्थ्य कर्मियों के साथ मोहल्ला सराफान और मोहल्ला लाल मोहम्मद में पहुंचे। टीम ने दोनों मोहल्लों में बुखार से पीड़ित मरीजों की जांच की। जांच में किसी को भी स्वाइन फ्लू होने की पुष्टि नहीं हुई। टीम ने मोहल्लों में मुनादी भी कराई और स्वाइन फ्लू से बचने के लिए अपने घरों के आसपास गंदा पानी इकट्ठा नहीं होने देने और सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने पर बल दिया।