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बचपन में लगी 55 वाली बीमारी, जांच में सैकड़ों बच्चों में मिली टीबी की बीमारी
अमर उजाला ब्यूरो/ मुजफ्फरनगर
Updated Mon, 03 Apr 2017 11:49 PM IST
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55 साल की उम्र में होने वाली बीमारियां अब बचपन को जकड़ रही हैं। इससे स्वास्थ्य महकमे के भी होश उड़ गए हैं। जिले में बड़ी संख्या में बच्चे टीबी की बीमारी से पीड़ित मिले हैं। बच्चों में इस खतरनाक बीमारी के लक्षण टीबी पीड़ित माता-पिता, दादा-दादी के संपर्क में आने से मिले हैं।
क्षय रोग (टीबी) अभी तक उम्र दराज लोगों को जकड़ती थी, लेकिन खान-पान और वातावरण में आ रहे बदलाव के चलते इसके जीवाणु फैल रहे हैं। जनपद में एक साल के अंदर क्षय रोग विभाग में बड़े पैमाने पर मरीजों को ट्रैस किया गया है। यह वह मरीज हैं, जो अस्पताल से उपचाराधीन हैं। इन मरीजों में सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें बच्चों की भी संख्या काफी है। इस खतरनाक बीमारी की जद में बचपन घिर रहा है। बच्चों में आंख, गला और आंत की टीबी के लक्षण मिले हैं।
आंखों की टीबी में बच्चों की पुतलियों पर प्रभाव पड़ने के साथ रैटिना कमजोर पड़ रहा है। गले की नसें फूलने के साथ खाने-पीने में तकलीफ है। टीबी से पीड़ित बच्चों की उम्र देखकर हैरानी है। इस खतरनाक बीमारी की जकड़न में दुधमुंहे बच्चों से लेकर 14 साल तक के बच्चे शामिल हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। जिला प्रोग्राम समन्वयक शाहबान उल हक ने बताया कि बच्चों में इस बीमारी के लक्षण पीड़ित माता-पिता या अन्य मरीजों के संपर्क में जाने से मिल रहे हैं।
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200 से अधिक एमडीआर मरीज
क्षय रोग विभाग में 200 से अधिक मरीजों में टीबी की स्टेज मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंट (एमडीआर) स्तर पर है। यह सामान्य मरीजों से अलग हैं, जो खतरनाक स्टेज होती है। इसके इलाज के लिए विभाग को 24 से 27 महीने तक मरीज को दवाइयां देनी होती हैं। एमडीआर लेवल के मरीज के संपर्क में आने से तेजी से जीवाणु हमला करते हैं। साथ ही इनके जरिये अन्य लोगों को भी खतरा बढ़ जाता है।
टीबी के लक्षण की पहचान
टीबी के संक्रमण का मुख्य रुप से फेफड़ों पर प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटती रहती है। दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन में कमी होना, शाम को बुखार आना, भूख कम लगना, सीने में दर्द होना आदि इसके लक्षण हैं।
2016 में तीन-तीन
माह में मिले मरीज बच्चों की संख्या
मार्च तक 816 52
जून तक 986 46
सितंबर तक 1095 78
दिसंबर तक 986 76
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क्षय रोग (टीबी) अभी तक उम्र दराज लोगों को जकड़ती थी, लेकिन खान-पान और वातावरण में आ रहे बदलाव के चलते इसके जीवाणु फैल रहे हैं। जनपद में एक साल के अंदर क्षय रोग विभाग में बड़े पैमाने पर मरीजों को ट्रैस किया गया है। यह वह मरीज हैं, जो अस्पताल से उपचाराधीन हैं। इन मरीजों में सबसे अधिक चौंकाने वाली बात यह है कि इनमें बच्चों की भी संख्या काफी है। इस खतरनाक बीमारी की जद में बचपन घिर रहा है। बच्चों में आंख, गला और आंत की टीबी के लक्षण मिले हैं।
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आंखों की टीबी में बच्चों की पुतलियों पर प्रभाव पड़ने के साथ रैटिना कमजोर पड़ रहा है। गले की नसें फूलने के साथ खाने-पीने में तकलीफ है। टीबी से पीड़ित बच्चों की उम्र देखकर हैरानी है। इस खतरनाक बीमारी की जकड़न में दुधमुंहे बच्चों से लेकर 14 साल तक के बच्चे शामिल हैं, जिनका उपचार किया जा रहा है। जिला प्रोग्राम समन्वयक शाहबान उल हक ने बताया कि बच्चों में इस बीमारी के लक्षण पीड़ित माता-पिता या अन्य मरीजों के संपर्क में जाने से मिल रहे हैं।
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200 से अधिक एमडीआर मरीज
क्षय रोग विभाग में 200 से अधिक मरीजों में टीबी की स्टेज मल्टी ड्रग्स रेजिस्टेंट (एमडीआर) स्तर पर है। यह सामान्य मरीजों से अलग हैं, जो खतरनाक स्टेज होती है। इसके इलाज के लिए विभाग को 24 से 27 महीने तक मरीज को दवाइयां देनी होती हैं। एमडीआर लेवल के मरीज के संपर्क में आने से तेजी से जीवाणु हमला करते हैं। साथ ही इनके जरिये अन्य लोगों को भी खतरा बढ़ जाता है।
टीबी के लक्षण की पहचान
टीबी के संक्रमण का मुख्य रुप से फेफड़ों पर प्रभाव पड़ता है। इससे शरीर की प्रतिरोधक क्षमता घटती रहती है। दो सप्ताह से अधिक खांसी, वजन में कमी होना, शाम को बुखार आना, भूख कम लगना, सीने में दर्द होना आदि इसके लक्षण हैं।
2016 में तीन-तीन
माह में मिले मरीज बच्चों की संख्या
मार्च तक 816 52
जून तक 986 46
सितंबर तक 1095 78
दिसंबर तक 986 76