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किसान आंदोलन के दम पर रालोद को धार देने की कोशिश
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किसान आंदोलन के दम पर रालोद को धार देने की कोशिश
मुजफ्फरनगर। किसान आंदोलन के दम पर रालोद को धार देने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने 2022 के चुनाव में भाजपा के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजाने की घोषणा भी कर दी है। भाकियू का मंच विपक्षी दलों के लिए लगातार सुलभ होता जा रहा है। बीते कुछ दिनों में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और रालोद अध्यक्ष कई मंच साझा कर चुके हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाकियू और रालोद दोनों लगातार नजदीक आते जा रहे हैं। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है कि भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी लगातार मंच साझा कर रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान जनवरी में जीआईसी मैदान में हुई रैली में दोनों एक साथ एक मंच पर आए थे। चौधरी नरेश टिकैत ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि चौधरी अजित सिंह को हराना उनकी बड़ी भूल थी। तब से लगातार कई बार नरेश टिकैत और जयंत चौधरी एक साथ मंच साझा कर चुके हैं। जयंत चौधरी के पगड़ी के कार्यक्रम छपरौली में भी नरेश टिकैत मुख्य भूमिका में रहे। अब सिसौली में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती के कार्यक्रम में तो ऐसा लगा जैसे एक ही विचारधारा का कार्यक्रम हो। इसी मंच से जयंत चौधरी ने भाजपा के खिलाफ बिगुल बजाते हुए किसानों को इस युद्ध में साथ देने की दावत दी। किसान आंदोलन के बहाने उन्होंने समाज की एकजुटता का प्रयास किया। यहां तक कहा कि आपस में बंटे नहीं सभी किसान एक होकर इस लड़ाई को लड़े। उन्होंने भावनात्मक रूप से भी समाज को जोडऩे का प्रयास किया। बड़ी बात यह है कि भाकियू का मंच अब विपक्षी दलों के लिए आसानी से सुलभ हो रहा है।
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मुजफ्फरनगर। किसान आंदोलन के दम पर रालोद को धार देने का प्रयास किया जा रहा है। कार्यक्रम में रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी ने 2022 के चुनाव में भाजपा के खिलाफ युद्ध का बिगुल बजाने की घोषणा भी कर दी है। भाकियू का मंच विपक्षी दलों के लिए लगातार सुलभ होता जा रहा है। बीते कुछ दिनों में भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और रालोद अध्यक्ष कई मंच साझा कर चुके हैं।
पश्चिमी उत्तर प्रदेश में भाकियू और रालोद दोनों लगातार नजदीक आते जा रहे हैं। ऐसा लंबे समय बाद हुआ है कि भाकियू अध्यक्ष चौधरी नरेश टिकैत और रालोद अध्यक्ष जयंत चौधरी लगातार मंच साझा कर रहे हैं। किसान आंदोलन के दौरान जनवरी में जीआईसी मैदान में हुई रैली में दोनों एक साथ एक मंच पर आए थे। चौधरी नरेश टिकैत ने सार्वजनिक मंच से कहा था कि चौधरी अजित सिंह को हराना उनकी बड़ी भूल थी। तब से लगातार कई बार नरेश टिकैत और जयंत चौधरी एक साथ मंच साझा कर चुके हैं। जयंत चौधरी के पगड़ी के कार्यक्रम छपरौली में भी नरेश टिकैत मुख्य भूमिका में रहे। अब सिसौली में चौधरी महेंद्र सिंह टिकैत की जयंती के कार्यक्रम में तो ऐसा लगा जैसे एक ही विचारधारा का कार्यक्रम हो। इसी मंच से जयंत चौधरी ने भाजपा के खिलाफ बिगुल बजाते हुए किसानों को इस युद्ध में साथ देने की दावत दी। किसान आंदोलन के बहाने उन्होंने समाज की एकजुटता का प्रयास किया। यहां तक कहा कि आपस में बंटे नहीं सभी किसान एक होकर इस लड़ाई को लड़े। उन्होंने भावनात्मक रूप से भी समाज को जोडऩे का प्रयास किया। बड़ी बात यह है कि भाकियू का मंच अब विपक्षी दलों के लिए आसानी से सुलभ हो रहा है।
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