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Muzaffarnagar News: दिल्ली में गन्ने की मिठास...खेतों में खटास
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मोरना क्षेत्र में गन्ने की छिलाई करते मजदूर व किसान। संवाद
मोरना। रबी की अगेती फसलों के लिए किसानों ने गन्ने के खेत खाली कराने शुरू कर दिए हैं। आजादपुर मंडी के ठेकेदार क्षेत्र के किसानों से 550 रुपये प्रति क्विंटल से गन्ना खरीद रहे हैं। प्रति बीघा सिर्फ 70 क्विंटल के उत्पादन ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। न्यूनतम 30 क्विंटल प्रति बीघा का नुकसान है। लगातार बारिश और बीमारी इसकी वजह है।
यूपी में पेराई सत्र की शुरुआत अक्तूबर के आखिर में होती है। इसके बाद इंडेंट की समस्या सरसों और सब्जी के उत्पादक किसानों के सामने मुसीबत बनती है। ऐसे में किसान असोजी गन्ने की बोआई करते हैं, ताकि फसल को सितंबर और अक्तूबर के शुरू में बेचकर रबी की अगेती फसलें तैयार की जा सके। वर्तमान में दिल्ली की आजादपुर मंडी में गन्ने की मांग होने के कारण क्षेत्र से गन्ने की खरीदारी शुरू हो गई है।
चारे में अगोलों के लिए मजदूर में निशुल्क छिलाई के काम में जुटे हैं। किसान गन्ने की इस अगेती फसल को जल्द-से-जल्द निकालकर खेतों को खाली कर रहे हैं ताकि सरसों, मटर और अन्य सब्जियों की बोआई की तैयारी समय पर की जा सके।
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गन्ने का वर्तमान भाव 550 प्रति क्विंटल ठेकेदारों द्वारा खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि महंगाई को देखते हुए कम से कम 750 प्रति क्विंटल का भाव मिलना चाहिए था। किसान को नुकसान 200 प्रति क्विंटल कम दाम मिलने से किसानों में निराशा बनी हुई है। अधिक बारिश के बावजूद खेतों में 60 से 70 क्विंटल प्रति बीघा की पैदावार निकल रही है।
क्षेत्र के किसान करहेड़ा से सिन्नी बाबा, प्रधान अमित राठी, बिशनपाल, बबलू, विदेश व गांव किशनपुर से असलम, इखलाक कहते हैं कि बारिश के कारण गन्ने में अभी पर्याप्त मिठास भी नहीं है। उत्पादन भी कम हुआ है।
तेवड़ा से अब्दुल सलाम, मुरसलीन, शाहनजर, वहाब और गांव कमहेड़ा से मुस्तकीम, फरमान ने बताया कि किसानों ने पिछले साल अगस्त और सितंबर के महीने में ट्रेंच विधि (आधुनिक तकनीक) से असोजी गन्ने की बोआई की थी।
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दिल्ली में बढ़ रही गन्ने की खपत
ठेकेदार सलीम बताते हैं कि इस मौसम में दिल्ली समेत देश के अन्य बड़े शहरों में रस के अलावा गन्ने की चूसने में भी मांग बढ़ने लगती है। यही कारण है कि मिलों और स्थानीय बाजारों से पहले ही ठेकेदार सीधे खेतों से 550 प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना खरीद रहे हैं।
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मिल से पहले कोल्हू...फिर प्राइसवार
चीनी मिलों के पेराई सत्र में अभी समय है। गन्ना विभाग ने फिलहाल 15 सितंबर से कच्चे कैलेंडर के प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। उधर, मिलों का पेराई सत्र अक्तूबर के आखिर में शुरू होगा। जबकि श्राद्ध के बाद कोल्हुओं का संचालन शुरू हो जाता है। ऐसे में इस बार भी प्राइसवार छिड़ने का अनुमान है।
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यूपी में पेराई सत्र की शुरुआत अक्तूबर के आखिर में होती है। इसके बाद इंडेंट की समस्या सरसों और सब्जी के उत्पादक किसानों के सामने मुसीबत बनती है। ऐसे में किसान असोजी गन्ने की बोआई करते हैं, ताकि फसल को सितंबर और अक्तूबर के शुरू में बेचकर रबी की अगेती फसलें तैयार की जा सके। वर्तमान में दिल्ली की आजादपुर मंडी में गन्ने की मांग होने के कारण क्षेत्र से गन्ने की खरीदारी शुरू हो गई है।
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चारे में अगोलों के लिए मजदूर में निशुल्क छिलाई के काम में जुटे हैं। किसान गन्ने की इस अगेती फसल को जल्द-से-जल्द निकालकर खेतों को खाली कर रहे हैं ताकि सरसों, मटर और अन्य सब्जियों की बोआई की तैयारी समय पर की जा सके।
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गन्ने का वर्तमान भाव 550 प्रति क्विंटल ठेकेदारों द्वारा खरीदा जा रहा है। किसानों का कहना है कि महंगाई को देखते हुए कम से कम 750 प्रति क्विंटल का भाव मिलना चाहिए था। किसान को नुकसान 200 प्रति क्विंटल कम दाम मिलने से किसानों में निराशा बनी हुई है। अधिक बारिश के बावजूद खेतों में 60 से 70 क्विंटल प्रति बीघा की पैदावार निकल रही है।
क्षेत्र के किसान करहेड़ा से सिन्नी बाबा, प्रधान अमित राठी, बिशनपाल, बबलू, विदेश व गांव किशनपुर से असलम, इखलाक कहते हैं कि बारिश के कारण गन्ने में अभी पर्याप्त मिठास भी नहीं है। उत्पादन भी कम हुआ है।
तेवड़ा से अब्दुल सलाम, मुरसलीन, शाहनजर, वहाब और गांव कमहेड़ा से मुस्तकीम, फरमान ने बताया कि किसानों ने पिछले साल अगस्त और सितंबर के महीने में ट्रेंच विधि (आधुनिक तकनीक) से असोजी गन्ने की बोआई की थी।
दिल्ली में बढ़ रही गन्ने की खपत
ठेकेदार सलीम बताते हैं कि इस मौसम में दिल्ली समेत देश के अन्य बड़े शहरों में रस के अलावा गन्ने की चूसने में भी मांग बढ़ने लगती है। यही कारण है कि मिलों और स्थानीय बाजारों से पहले ही ठेकेदार सीधे खेतों से 550 प्रति क्विंटल के हिसाब से गन्ना खरीद रहे हैं।
मिल से पहले कोल्हू...फिर प्राइसवार
चीनी मिलों के पेराई सत्र में अभी समय है। गन्ना विभाग ने फिलहाल 15 सितंबर से कच्चे कैलेंडर के प्रदर्शन की तैयारी कर ली है। उधर, मिलों का पेराई सत्र अक्तूबर के आखिर में शुरू होगा। जबकि श्राद्ध के बाद कोल्हुओं का संचालन शुरू हो जाता है। ऐसे में इस बार भी प्राइसवार छिड़ने का अनुमान है।