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दारुल उलूम का इफ्ता विभाग हुआ कंप्यूटरराइज्ड

Sun, 07 Aug 2022 11:48 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 07 Aug 2022 11:48 PM IST
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Those who take fatwa in writing will be able to get computerized copy
लिखित में फतवा लेने वालों को मिल सकेगी कंप्यूटराइज्ड कॉपी
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देवबंद (सहारनपुर)। इस्लामी तालीम के प्रमुख केंद्र दारुल उलूम के दारुल इफ्ता (फतवा विभाग) को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत कर दिया गया है। अब यहां से लिखित में फतवे लेने वालों को कंप्यूटराइज्ड कॉपी मिल सकेगी। साथ ही यहां से जारी होने वाले सभी मूल फतवों को सुरक्षित भी रखा जा सकेगा।
पिछले कई माह से दारुल इफ्ता को पूरी तरह कंप्यूटरीकृत करने के लिए कार्य चल रहा था। कार्य पूर्ण होने के बाद रविवार को संस्था के मोहतमिम मौलाना मुफ्ती अबुल कासिम नोमानी ने कंप्यूटरीकृत फतवा विभाग का आगाज किया। कंप्यूटराइज्ड फतवे देने के लिए विभाग में करीब नौ कंप्यूटर लगाए गए हैं। इस दौरान मोहतमिम मौलाना अबुल कासिम ने कहा कि इफ्ता विभाग से जारी होने वाले फतवे सुरक्षित रहे, इसके लिए इसे कंप्यूटराइज्ड किया गया है। पूरी व्यवस्था कंप्यूटरीकृत होने से फतवा देने के कार्य में तेजी आएगी। दारुल इफ्ता के इंचार्ज मौलाना मोईनुद्दीन कासमी ने बताया कि सुप्रीम पावर मजलिस-ए-शूरा ने पूर्व की बैठक में दारुल इफ्ता को कंप्यूटराइज्ड करने के लिए प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। अब लिखित में लिए जाने वाले मूल फतवों को सुरक्षित रखा जा सकेगा। इस मौके पर नायब मोहतमिम मौलाना अब्दुल खालिक मद्रासी, मुफ्ती महमूद बुलंदशहरी, मुफ्ती राशिद आजमी, मुफ्ती हबीबुर्रहमान खैराबादी, मुफ्ती जैनुल इस्लाम आदि मौजूद रहे।
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दारुल उलूम की स्थापना के 27 साल बाद शुरू हुआ था फतवा विभाग
देवबंद। दारुल उलूम में दारुल इफ्ता (फतवा विभाग) की स्थापना दारुल उलूम की स्थापना के करीब 27 साल बाद हुई थी। वर्ष 1866 में दारुल उलूम की स्थापना हुई और वर्ष 1893 में दारुल इफ्ता शुरु किया गया था। 156 साल की उम्र में दारुल उलूम ने कई तरह के उतार चढ़ाव देखे। लेकिन उसने कभी अपना मूल उद्देश्य नहीं छोड़ा। यह संस्था धीरे धीरे आधुनिकता के रंग में रंगती चली गई। वर्ष 2005 में संस्था में ऑनलाइन फतवा विभाग का कयाम किया गया। जिससे देश विदेश से बड़ी संख्या में मुफ्तियों से सवाल पूछे जाने लगे। वर्तमान में ऑनलाइन फतवों की संख्या 50 हजार से ज्यादा बताई गई है।
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