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घड़े और सुराही के पानी से बुझ रही प्यास

Sun, 28 Jun 2020 10:15 PM IST
Meerut Bureau मेरठ ब्यूरो
Updated Sun, 28 Jun 2020 10:15 PM IST
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Thirst quenched with pitcher and jug water
चरथावल घर में रखे घड़े से पानी लेती बालिका - फोटो : MUZAFFARNAGAR
घड़े और सुराही के पानी से बुझ रही प्यास
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मुजफ्फरनगर, चरथावल। कोरोना के ख़ौफ ने रोजमर्रा की जिंदगी में तमाम आदतें बदलवा दी हैं। गर्मी से सब बेहाल है, फिर भी गले के संक्रमण से बचाव के लिए फ्रिज के ठंडे पानी को पीने से गुरेज कर रहे है। घरों के आंगन और रसोई में घड़े, करवे और सुराही ने फिर से बड़े स्तर पर अपनी जगह बना ली है।
मोहल्ला महाब्राह्मनान की बुजुर्ग सुशीला त्यागी कहती है कि कोरोना वायरस से सुरक्षा को घर में सब फ्रिज में रखा ठंडा पानी पीना छोड़ चुके हैं। घड़े के शीतल जल को पीने से गले के संक्रमण का खतरा कम है। मोहल्ला कानूनगोयान की गृहणी सविता त्यागी बताती हैं कि कोरोना संक्रमण की रोकथाम को चिकित्सकों द्वारा गर्म पेय पदार्थों के इस्तेमाल की सलाह से भी जागरुकता आई है। बच्चे फ्रिज के ठंडे पानी की जिद करते हैं, मगर स्वजनों को प्यास लगने पर घड़े का सादा पानी दे रहे है। छात्रा भूमि त्यागी कहती है कि मिट्टी के घड़े का पानी अलग ही स्वाद देता है। अब फ्रिज की बोतल का पानी पीने का मन नहीं करता है। सीएचसी के चिकित्सा प्रभारी डॉ. सतीश कुमार कहते है कि कोरोना वायरस मुंह, नाक के जरिये गले पर अटैक करता है। नियंत्रण हेतु जहां मास्क सबसे जरूरी है, वहीं ठंडे पेय पदार्थों से बचने की राय भी दी गई है। फ्रिज का ठंडा पानी हानिकारक है, इसलिए लोग घड़े, सुराही आदि में रखे जल का प्रयोग कर सही कदम उठा रहे हैं।
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बढ़ी बिक्री, घूमने लगे चाक
मिट्टी की किल्लत से जूझ रहे कुम्हार
चरथावल। लॉकडाउन के दौरान घड़ों, सुराहियों और करवों की मांग बढ़ने से कुम्हारों के चाक फिर घूमने लगे है। कस्बे के मांगेराम प्रजापति के मुताबिक कोरोना संकट में उनका टेंट का कारोबार ठप्प हो गया था। ऐसे में फिलहाल मिट्टी के बर्तन बना रहे है। हकीमपुरा रोड़ के विनोद कुमार तथा बाग बस्ती के सतीश का कहना है कि लॉकडाउन में घड़ों के साथ हुक्का चिलम की भी बिक्री बढ़ी है। बुड्ढाखेड़ा निवासी बिरम सिंह बीते 50 बरस से मिट्टी के बर्तन बनाते है। वे भी बेटे रामचंद्र के साथ मिलकर पुश्तैनी काम में जुटे है। हालांकि इन सभी का कहना है कि कस्बे के तालाबों पर कब्जे हैं, जिससे मिट्टी की किल्लत है।

चरथावल के कानूनगोयान मोहल्ले में चाक पर बर्तन बनाता मांगेराम

चरथावल के कानूनगोयान मोहल्ले में चाक पर बर्तन बनाता मांगेराम- फोटो : MUZAFFARNAGAR

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