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यज्ञोपवीत संस्कार आध्यात्मिक जीवन का आभूषण
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मोरना। श्रावणी पूर्णिमा के अवसर पर भागवत पीठ शुकदेव आश्रम स्थित शुकदेव संस्कृत विद्यालय में नवप्रविष्ट 35 छात्रों का आचार्यों द्वारा विधि-विधान से यज्ञोपवीत संस्कार कराया गया। भागवत पीठाधीश्वर ओमानंद महाराज ने छात्रों को फल, मिष्ठान, पुस्तकें और दक्षिणा प्रदान की।
शुकदेव संस्कृत विद्यालय में आयोजित यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुकदेव भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार से बल, बुद्धि, विद्या और तेज मिलता है। यज्ञोपवीत ही उन्नत जीवन का आधार है। आध्यात्मिक आभूषण है। यज्ञोपवीत की उत्पत्ति और उसके धारण करने की परंपरा अनादि काल से है। जब मानव सृष्टि शुरू हुई थी। उस समय सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी स्वयं यज्ञोपवीत धारण किए हुए थे। यशस्वी जीवन प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ शुद्ध ब्रह्मसूत्र ही यज्ञोपवीत है। मनुष्य ही नहीं, देवता भी यज्ञोपवीत धारण करते हैं। भगवान राम और कृष्ण के भी यज्ञोपवीत संस्कार हुए थे। ओमानंद महाराज ने कहा कि जीवन के सभी सोलह संस्कार यज्ञों द्वारा होते हैं। यज्ञोपवीत संस्कार से प्रगतिशील, सफल और वेद अनुकूल जीवन जीने की शिक्षा और शक्ति मिलती है। कथाव्यास सुमन कृष्ण, आचार्य आशीष माधव, आचार्य ज्ञानप्रसाद, आचार्य अरुण, आचार्य उत्प्रेती, राजू शर्मा, ठाकुर प्रसाद, आचार्य प्रदीप और जीवन आदि मौजूद रहे।
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शुकदेव संस्कृत विद्यालय में आयोजित यज्ञोपवीत संस्कार कार्यक्रम को संबोधित करते हुए शुकदेव भागवत पीठाधीश्वर स्वामी ओमानंद महाराज ने कहा कि यज्ञोपवीत संस्कार से बल, बुद्धि, विद्या और तेज मिलता है। यज्ञोपवीत ही उन्नत जीवन का आधार है। आध्यात्मिक आभूषण है। यज्ञोपवीत की उत्पत्ति और उसके धारण करने की परंपरा अनादि काल से है। जब मानव सृष्टि शुरू हुई थी। उस समय सृष्टिकर्ता ब्रह्माजी स्वयं यज्ञोपवीत धारण किए हुए थे। यशस्वी जीवन प्रदान करने वाला सर्वश्रेष्ठ शुद्ध ब्रह्मसूत्र ही यज्ञोपवीत है। मनुष्य ही नहीं, देवता भी यज्ञोपवीत धारण करते हैं। भगवान राम और कृष्ण के भी यज्ञोपवीत संस्कार हुए थे। ओमानंद महाराज ने कहा कि जीवन के सभी सोलह संस्कार यज्ञों द्वारा होते हैं। यज्ञोपवीत संस्कार से प्रगतिशील, सफल और वेद अनुकूल जीवन जीने की शिक्षा और शक्ति मिलती है। कथाव्यास सुमन कृष्ण, आचार्य आशीष माधव, आचार्य ज्ञानप्रसाद, आचार्य अरुण, आचार्य उत्प्रेती, राजू शर्मा, ठाकुर प्रसाद, आचार्य प्रदीप और जीवन आदि मौजूद रहे।
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